01/02/2025
पहले हर घर एक परिवार था, हर गाँव एक दिल। अब रिश्ते स्क्रीन के पीछे छुप गए हैं, और अपनापन औपचारिकताओं में गुम हो गया है।
क्या वाकई दूसरों की खुशी में खुश रहने का जमाना चला गया है?
आओ, फिर से रिश्तों की गर्माहट लौटाएं, बुजुर्गों का सम्मान करें और बच्चों को हमारी मिट्टी की खुशबू से जोड़ें।
क्योंकि असली खुशी अपनों के साथ बांटने में है, अकेले कमाने में नहीं।❤️