06/06/2025
यौम-ए-अरफा 2025
अगर किसी ने क़यामत का मंज़र देखना है तो अर्फात के इस मंज़र को देख ले - एक जैसा लिबास, एक जैसी आवाज़, एक जैसा नज़ारा और एक ही दुआ:
"ऐ प्यारे रब, हम हाज़िर हैं, हम हाज़िर हैं।"
आँखें अश्कबार (आँसूओं से भरी), कांपते हुए हाथ, और दिलों में सिर्फ एक तमन्ना – जन्नत की तलब और जहन्नुम से आज़ादी के परवाने इकट्ठा करने वाले सब वहाँ जमा हैं।
सुब्हान अल्लाह।
अल्लाह करीम हमें भी आने वाले वक्त में उन खुश-नसीबों में शामिल कर ले। आमीन या रब्बल-आलमीन 💖❤️