25/05/2025
कहते हैं मानव एक सामाजिक प्राणी है
पर क्या ऐसा सच में है
ऐसे कई सवाल मेरे मन उठते हैं
क्या समाज का हर इंसान एक दूसरे की ख़ुशी चाहता है?
क्या हर परिवार दूसरे परिवार की तरक्की चाहता है?
क्या जो समाज के रक्षक हैं वो पैसे और रिश्ते से ऊपर उठ के फ़र्ज़ निभाते हैं?
क्या शिक्षा से लेकर जॉब तक में भ्रस्टाचार, रिश्ता, पैसा, ताकत, पहुच, आदि नहीं समाया हुआ है?
क्या मासूम इंसान को परेशान नहीं किया जाता है?
क्या अनजाने में हुई गलती को मानने पर मासूम व्यक्ति को परेशान करना चाहिए?
क्या हर इंसान सही है वो चाहे गरीब हो या अमीर?
क्या आजकल ख़ुद को बेबस और लाचार कहने वाले ग़रीब मासूम है या चालाक?
क्या पावर और पैसे की जंग है आपके पास पैसे नहीं हैं तो आपके साथ कोई नहीं होगा?
क्या जिसने उच्च अधिकारी बनकर भी सिर्फ रिश्ते ही कमाये/बनाये है पैसे नहीं वो सलामी और साथ के हकदार हैं या परेशानी के?
क्या जिसने बेनाम रहके गरीबों के लिए अपनी जिंदगी लगादी उस मासूम को उसके अच्छे और सच्चे होने की इतनी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी?
आदि आदि सवालों के जवाब .....
और भी ऐसे ही कई सवालो के जवाब खोजने को हम जुरेंगे आर एंड पी मीडिया से सुनेंगे सच्ची कहानी हर राज्य के प्रसाशन प्रणाली की फिर चाहे वो पुलिस के छोटे से हवलदार हो या उच्च अधिकारी , सांसद हो या सीएम.🙏🙏
-- नयनप्रिया