Jhar UpDate

Jhar UpDate एक कदम नवनिर्माण झारखंड की ओर झारखंड की संस्कृति सभ्यता और अस्मिता को बचाना है।

06/09/2026

📰 श्रद्धांजलि सभा एवं पुण्यतिथि आयोजन
सामाजिक एवं युवा सामाजिक कार्यकर्ता, युवा क्रांतिकारी
स्वर्गीय सुमित कुमार महतो की पांचवीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जा रहा है।
स्व. सुमित कुमार महतो का जन्म 07 अप्रैल 1997 को धातकीडीह, चक्रधरपुर, पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड में हुआ था। समाज एवं युवाओं के प्रति समर्पित उनका जीवन सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
मृत्यु तिथि: 08 सितंबर 2021
उनकी पुण्यतिथि पर उनकी पुण्य आत्मा की शांति एवं स्मृति को नमन करते हुए श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी।
📍 स्थान: धातकीडीह सामुदायिक भवन
🕙 समय: सुबह 10:00 बजे
🙏 कार्यक्रम: श्रद्धांजलि सभा एवं पुण्य आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना
विशेष अपील
समाज के सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, बुद्धिजीवियों एवं गणमान्य लोगों से विशेष अपील है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर स्व. सुमित कुमार महतो को श्रद्धांजलि अर्पित करें और उनके सामाजिक विचारों एवं अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लें।
🌹 स्व. सुमित कुमार महतो को पांचवीं पुण्यतिथि पर शत-शत नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

बारिपूजा (मनसा पुजा)पर विशेष:--------------------छोटनागपुर पठार के अंतर्गत पाए जाने वाले झारखंड ,बंगाल ,उड़ीसा आदि राज्य...
16/08/2026

बारिपूजा (मनसा पुजा)पर विशेष:-
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छोटनागपुर पठार के अंतर्गत पाए जाने वाले झारखंड ,बंगाल ,
उड़ीसा आदि राज्यों के गुसटि धारी कुड़मियों में एक विशेष पर्व सावन महीना के संक्रांति से लेकर पूरे भादर माह तक मनाया जाने वाला त्योहार बारि पूजा हैं,इसे मनसा पूजा के नाम से भी जाना जाता है । बारि यानी पानी की पूजा। ऐसे तो इस क्षेत्र के आदिवासी मूलवासी सभी कोई मनाते हैं लेकिन लेकिन कुड़ियों में इसका हर्ष उल्लास कुछ और ही होता है । कुड़मि मुलतः कृषि पर जीवन यापन करने वाले जनजाति है और इनकी कृषि मुख्यरूप से वर्षा पर निर्भर करती हैं ।यदि वर्षा कम हुई तो कृषि का काम अधूरा रह जाता है ओर वर्षा अधिक होती है तो कृषि का काम समय पर पूरा कर लेता है तो ऐसी स्थिति में वह श्रावण माह के संक्रांति के दिन बारि पूजा / मनसा पूजा करता है और यदि कृषि कार्य अधूरा रहा तो यह पर्व भादर माह के किसी भी दिन रोपा डोभा करने के बाद करता है।
इस पूजा के पीछे कारण है की खेती बाड़ी का काम पानी के बिना असंभव है जब किसान पानी से संतुष्ट हो जाता है तो उसकी कृतज्ञता ,उपकार को पूजा करके प्रकृति महाशक्ति के प्रति अपने श्रद्धा निष्ठा को दर्शाता है।
बारी पूजा के एक दिन पूर्व नियम पूर्वक घर की एक पुरुष और एक महिला संजोत करके रहते है फिर पूजा के दिन महिलाएं घर आंगन लीपा पोता कर घाटरा पीठा बनाती है और शाम के समय पुरुष नदी ,तालाब आदि जगह से स्नान करके नियम पूर्वक बारी लेकर आता है और अपने घर की भूत पीड़ा के सामने विधिवत रखता है और उसकी पूजा अर्चना करता है इस पूजा में वह बेल पत्ता, दूब घास, तुलसी पत्ता ,अरवा चावल, पीठा ,धान खइ ,अपने बाड़ी में उपजाए हुए मकाई आदि को चढ़ाता है एवं बत्तख की बलि देता है। बत्तख की बली देने के पीछे भी एक रहस्य है कि वह 2 माह से कृषि कार्य करते हुए यहां वहां की पानी पीने से उसके शरीर में जल में स्थिति विभिन्न प्रकार के जीवाणु जैसे - जोंक आदि चले जाते हैं और उसकी जठराग्नि कम हो जाती है इससे पुनः अधिक करने हेतु बत्तख का मांस काफी लाभदायक होता है और इसे पूरे परिवार को एक नई ऊर्जा मिलती है। इसके अलावा बत्तख के मांस में ओर भी अनेक फायदा है। बत्तख को बलि देने के पीछे और भी कारण है यह गांव घर के या तालाब के आसपास के खेत जो धान की रोपाई हो चुकी है उसे वह क्षति पहुंचाता है। तथा धान के लिए लाभकारी जीव केंचुए को भी खा जाता है। यदि इसकी संख्या कम हो जाती है तो धान की उपज में केंचुए जिसकी मिट्टी से धान की फसल की पैदावार अच्छी होती है की रक्षा भी हो जाती है,इस दृष्टिकोण से भी बत्तख की बलि देना गांव घर के लोग अच्छा मानते हैं। इसलिए पूजा के साथ साथ बत्तख की बलि की प्रथा भी संभवत लागू की गई थी। वर्तमान समय में लोग बकरी ,बकरा, भेड़ा आदि भी बलि दे रहे हैं लेकिन परंपरा में बत्तख का ही बली देते थे और अभी भी ज्यादातर घरों में बतख की ही बलि दी जाती है।
बारी प्रकृति रूपी महाशक्ति यानी पानी की पूजा है ।इसमें किसी प्रकार की मूर्ति की पूजा नहीं है ।आज से लगभग 150 -200 वर्ष पूर्व देखा जाए तो लगभग सभी लोग पानी की ही पूजा करते थे। लेकिन अब कुछ मनगढ़ंत कहानियां बनाकर लोग मनासा रूपी मूर्ति की पूजा करने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं जो न्याय संगत नहीं है इसके पीछे जोड़ी गई कहानी मे कहा गया है की मनासा शिव जी की पुत्री है और इसकी पूजा सबसे पहले चांद राजा ने की थी इस प्रकार की कई कहानियां जोड़ी गई है जो काल्पनिकता की ओर ले जा रही है। मनासा यानी मन कि आशा मिटाने वाली को मनासा कहा गया है क्योंकि कृषक की मन कि आशा पानी ही मिटाती है ।यदि वर्षा अच्छा हुआ तो फसल की बुवाई ,रोपाई, सिंचाई तथा अनाज भी अच्छी होगी । इसके लिए मनसा पूजा का प्रचलन सदियों से होता आ रहा है।
धन्यवाद।
सभार-हरे किसनअ हिंदइआर।

Happy independence Day
15/08/2026

Happy independence Day

15/08/2026

स्वतंत्रता दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं

15/08/2026

Happy Independence Day 🫡

09/08/2026

शिक्षक श्याम सुंदर महतो गुप्त रूप से झारखंड आंदोलनकारियों को करते थे आर्थिक मदद
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राजेन्द्र प्रसाद महतो 'राजेन'
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शिक्षक, शिक्षाविद्, समाजसेवी व राजनेता के रूप में कोल्हान का एक परिचित चेहरा थे श्याम सुंदर महतो । ये सरकारी मध्यमिक शिक्षक के पद पर नौकरी करने के बावजूद भी झारखंड आंदोलनकारियों को गुप्त रूप से आर्थिक मदद कर उचित परामर्श दिया करते थे । चक्रधरपुर के आसनतलिया गांव निवासी श्याम सुंदर महतो का जन्म 16 जुलाई 1949 को एक साधारण कृषक परिवार में हुआ था । करीबन 76 साल की उम्र में इनकी निधन 10 अगस्त 2025 को हुआ। इनके निधन की समाचार सुनते ही कोल्हान के विधायक, पूर्व विधायक , सांसद , पूर्व सांसद आदि विभिन्न राजनीतिक दल के नेता , मंत्री व पूर्व मंत्री एवं सामाजिक संगठन के लोग आकर श्रद्धांजलि अर्पित किए ।
इनके पिता पूर्व मुखिया मधुसूदन महतो कांग्रेस के कट्टर समर्थक थे । वे गांधी जी के विचारधारा से प्रभावित होकर आजीवन खादी वस्त्र धारण किए । पिता के विरासत से श्याम सुंदर महतो को राजनीति की रुचि जगी थी । शिक्षक की नौकरी करने के बावजूद राजनीति में श्याम सुंदर महतो का व्यापक रुचि था । साथ - साथ सामाजिक कार्यों में भी खासे रुचि रखते थे । सरकारी नौकरी में रहने के बावजूद भी झारखंड आंदोलन के श्याम सुंदर महतो कट्टर समर्थक थे । झारखंड आंदोलनकारियों को गुप्त रूप से ये हमेशा मदद करते थे । श्याम सुंदर महतो ने अपने करीबी नौकरी पेशे से जुड़े कुछ प्रबुद्ध लोगों को संगठित करके केनरा बैंक चक्रधरपुर में एक संयुक्त बैंक खाता खोला था , जिसका संचालन श्याम सुंदर महतो तथा बैंक कर्मी स्वरूप प्रधान कोलचकड़ा के द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता था । इस बैंक खाता में जगदीश प्रधान रेल कर्मी देवगांव, राजकिशोर महतो शिक्षक आसनतलिया, आदि कुछ समाजसेवी ने प्रतिमाह अपनी मासिक वेतन से ₹1000 का अंशदान कर इस बैंक खाते में जमा करते थे । ये राशि स्थानीय झारखंड आंदोलनकारियों को न्यायालय से संबंधित मुकदमा लड़ने, न्यायालय आने - जाने एवं बेल कराने आदि कार्य के लिए इस खाते से रुपये निकासी कर श्याम सुंदर महतो झारखंड आंदोलनकारियों को मदद करते थे । इस बैंक खाता को झारखंड आंदोलन के दौरान गुप्त रूप से खोलकर रखा गया था । क्षेत्र के झारखंड आंदोलनकारियों को श्याम सुंदर महतो इस तरह गुप्त रूप से आर्थिक सहयोग प्रदान करते थे । उनके इस आर्थिक सहयोग को कभी भुलाया नहीं जा सकता है । झारखंड आंदोलनकारी बहादुर उरांव पूर्व विधायक, शैलेंद्र महतो पूर्व सांसद, कृष्णा मार्डी पूर्व सांसद ,सोला पूर्ति, लखन बोदरा ,शहीद मछुआ गागराई, भुवनेश्वर महतो झारखंड आंदोलनकारी चिन्हित आयोग के सदस्य आदि झारखंड अलग राज्य के आंदोलन के अगुवा आंदोलनकारियों ने गुप्त रूप से श्याम सुंदर महतो से भेंट वार्ता कर परामर्श लिया करते थे। ये केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं करते थे बल्कि आंदोलनकारियों के साथ गुप्त रूप में विचार - विमर्श कर आंदोलन की रूपरेखा तय करके आन्दोलन को धार प्रदान किया करते थे । झारखंड आंदोलन के दौरान न्यायालय से वारंटी आंदोलनकारियों को जब पुलिस काफी तंग किया करता था तो श्याम सुंदर महतो ने अपने घर पर आश्रय देकर छिपा कर रखने का जोखिम भरा काम किया करते थे । अपने घर में आश्रय देकर रखने के बाद इन्हें खाने-पीने के अलावा हर आवश्यकता की पूर्ति स्वयं के खर्च से करते थे । इसके बाद इन्हें गुप्त रूप से सहयोग कर न्यायालय में आत्म समर्पण कराने का भी काम किया करते थे ।
झारखंड आंदोलन के सच्चे समर्थक शिक्षक श्याम सुंदर महतो ने 30 सितंबर 2008 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर स्वतंत्र रूप से राजनीतिक एवं सामाजिक आंदोलन में कूद पड़े । इनका संसदीय एवं विधानसभा क्षेत्र एसटी आरक्षित होने की वजह से इन्हें आम चुनाव में भाग्य आजमाने का मौका नहीं मिला, लेकिन 2010 के पंचायत चुनाव में जिला परिषद चक्रधरपुर भाग - 2 से चुनाव मैदान में उतरने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । चुनाव में अथाह जन समर्थन मिला एवं भारी मतों से विजय हुए । जिला परिषद के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद के लिए दांव - पेंच चला । अध्यक्ष पद एसटी आरक्षित था लेकिन उपाध्यक्ष पद सामान्य था । उपाध्यक्ष पद के लिए श्याम सुंदर महतो को चुना गया था।
वर्ष 1992 को माध्यमिक शिक्षक संघ अविभाजित सिंहभूम जिला के जिला सचिव के पद पर निर्वाचित हुए थे । ये क्षेत्र के कोई सामाजिक पदों को संभाल कर रखे हुए थे । मानव संसाधन विकास विभाग झारखंड सरकार द्वारा आयोजित पश्चिम सिंहभूम के जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में वर्ष 2007-2008 को इन्हें प्रशस्ति पत्र , रजत पदक एवं 15,000/- रुपए प्रदान कर सम्मानित किया गया था । सम्मान स्वरूप प्राप्त राशि को इन्होंने बिहार के बाढ़ पीड़ित राहत कोष में बाढ़ पीड़ितों के लिए दान कर दिए थे । इसके अलावा क्षेत्र में इनके उत्कृष्ट योगदान के लिए इंडियन इकोनामिक डेवलपमेंट एंड रिसर्च एसोसिएशन नई दिल्ली के तत्वाधान में जून 2009 को 'राष्ट्रीय शिक्षा रत्न' तथा लोक सेवा समिति रांची द्वारा जुलाई 2009 को 'झारखंड रत्न' से सम्मानित किया गया था । झारखंडी जनजातीय कला व संस्कृति को पुनर्जीवित व विकसित करने के लिए इन्हें कला संस्कृति विकास केंद्र चक्रधरपुर के तत्वाधान में 9 अगस्त 2006 को , झारखंड कुड़माली भाषा विकास परिषद केंद्रीय कमेटी चक्रधरपुर द्वारा 25 अक्टूबर 2007 को एवं आदिवासी कुड़मी समाज पश्चिम सिंहभूम जिला कमेटी के द्वारा 19 मई 2008 को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया था ।

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