21/09/2026
“जब सहनाई की धुन गूंजती है, तो सिर्फ़ सुर नहीं बजते… पूरी गद्दी संस्कृति थिरक उठती है। ❤️🎶
इन सुरों में हमारी परंपरा है, हमारी आस्था है और हमारी मिट्टी की खुशबू है। 🙏🚩”
या एकदम छोटी और दमदार:
“सहनाई के सुर उठे… और पूरा दंडारास थिरक उठा। 🎶❤️
ये सुर नहीं, हमारी संस्कृति की धड़कन हैं। 🙏🚩”