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सती प्रथा भारत में कब बंद कर दी गई
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टंका और जीतल सिक्के किसने चलाए थे

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दिल्ली भारत की राजधानी कब बनी थी189719001911
28/11/2025

दिल्ली भारत की राजधानी कब बनी थी
1897
1900
1911

1773 से 1947 तक के 15 प्रमुख अधिनियम :रेगुलेटिंग एक्ट 1773 (Regulating Act):इसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों क...
27/11/2025

1773 से 1947 तक के 15 प्रमुख अधिनियम :
रेगुलेटिंग एक्ट 1773 (Regulating Act):
इसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को विनियमित और नियंत्रित करने का पहला प्रयास किया।
बंगाल के गवर्नर को 'गवर्नर-जनरल ऑफ बंगाल' पद दिया गया और एक कार्यकारी परिषद बनाई गई।
पिट्स इंडिया एक्ट 1784 (Pitt's India Act):
इसने कंपनी के वाणिज्यिक और राजनीतिक कार्यों को अलग-अलग कर दिया।
राजनीतिक मामलों के प्रबंधन के लिए इंग्लैंड में 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' की स्थापना की गई।
चार्टर अधिनियम 1793 (Charter Act):
इसने कंपनी के चार्टर को अगले 20 वर्षों के लिए नवीनीकृत किया।
यह प्रावधान किया गया कि बोर्ड ऑफ कंट्रोल के सदस्यों का वेतन भारतीय राजस्व से दिया जाएगा।
चार्टर अधिनियम 1813 (Charter Act):
इसने भारत में कंपनी के व्यापार एकाधिकार को समाप्त कर दिया (चाय और चीन के साथ व्यापार को छोड़कर)।
ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार की अनुमति दी गई।
चार्टर अधिनियम 1833 (Charter Act):
इसने बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया (प्रथम लॉर्ड विलियम बेंटिक)।
कंपनी की व्यापारिक गतिविधि पूरी तरह समाप्त कर दी गई और यह एक विशुद्ध प्रशासनिक निकाय बन गई।
चार्टर अधिनियम 1853 (Charter Act):
यह अंतिम चार्टर अधिनियम था, जिसने सिविल सेवकों की भर्ती के लिए खुली प्रतियोगिता प्रणाली शुरू की।
इसने पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और कार्यकारी कार्यों को अलग किया।
भारत सरकार अधिनियम 1858 (Government of India Act):
इसने ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया और शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित कर दिया।
'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर 'भारत के राज्य सचिव' का पद सृजित किया गया।
भारतीय परिषद अधिनियम 1861 (Indian Councils Act):
इसने भारतीयों को कानून बनाने की प्रक्रिया में गैर-आधिकारिक सदस्यों के रूप में शामिल करना शुरू किया।
इसने विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया शुरू की और वायसराय को अध्यादेश जारी करने की शक्ति दी।
भारतीय परिषद अधिनियम 1892 (Indian Councils Act):
इसने केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों में गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या में वृद्धि की।
सदस्यों को बजट पर चर्चा करने और कार्यपालिका से प्रश्न पूछने का अधिकार दिया गया।
भारतीय परिषद अधिनियम 1909 (मार्ले-मिंटो सुधार):
इसने केंद्रीय विधान परिषद का आकार बढ़ाया और प्रांतीय परिषदों के सदस्यों को अधिक विधायी अधिकार दिए।
इसने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की शुरुआत की (सांप्रदायिकता को वैधानिकता दी)।
भारत सरकार अधिनियम 1919 (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार):
इसने केंद्रीय और प्रांतीय विषयों को अलग किया और प्रांतों में 'द्वैध शासन' (Dyarchy) प्रणाली शुरू की।
इसने देश में पहली बार द्विसदनीय व्यवस्था और प्रत्यक्ष चुनाव की शुरुआत की।
भारत सरकार अधिनियम 1935 (Government of India Act):
यह भारतीय संविधान का एक प्रमुख स्रोत है, जिसने अखिल भारतीय महासंघ (All-India Federation) का प्रस्ताव रखा (जो कभी लागू नहीं हुआ)।
इसने प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता शुरू की और केंद्र में द्वैध शासन शुरू किया।
क्रिप्स मिशन 1942 (Cripps Mission):
यह एक प्रस्ताव था जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत को डोमिनियन स्टेटस देने का वादा किया था।
इसे कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने अस्वीकार कर दिया क्योंकि इसमें विभाजन की स्पष्टता नहीं थी।
कैबिनेट मिशन योजना 1946 (Cabinet Mission Plan):
इसने भारत की एकता बनाए रखने और एक संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव रखा।
इसने पाकिस्तान की मांग को अस्वीकार कर दिया और अंतरिम सरकार का मार्ग प्रशस्त किया।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 (Indian Independence Act):
इसने 15 अगस्त 1947 को भारत को दो स्वतंत्र और संप्रभु डोमिनियन राज्यों (भारत और पाकिस्तान) में विभाजित किया।
इसने भारत में ब्रिटिश शासन को समाप्त कर दिया और वायसराय का पद समाप्त कर दिया।

सती प्रथा भारत में एक कुप्रथा थी, राममोहन राय के   से  इस कुप्रथा का भारत में अंत हुआ1829 में उन्होंने मांग की: सामाजिक ...
27/11/2025

सती प्रथा भारत में एक कुप्रथा थी, राममोहन राय के से इस कुप्रथा का भारत में अंत हुआ
1829 में उन्होंने मांग की:
सामाजिक सुधारक राजा राममोहन राय ने सती प्रथा को अमानवीय बताया और इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाया।

उन्होंने धार्मिक ग्रंथों से प्रमाण देकर सिद्ध किया कि सती हिंदू धर्म की अनिवार्य प्रथा नहीं है बल्कि
एक #कुरीति है
#समाजसुधारक

Let’s take a moment to appreciate the rights we enjoy and the responsibilities we carry as citizens of this great nation...
26/11/2025

Let’s take a moment to appreciate the rights we enjoy and the responsibilities we carry as citizens of this great nation.
May we continue to uphold the values that make India truly democratic and diverse.
✨ Proud to be an Indian! ✨

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