Ajeet kumar up 67vlog

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सुबह-सुबह सभी को गुड मॉर्निंग नमस्कार प्रणाम जय भीम नमो बुद्धाय जय संविधान 🙏
21/07/2026

सुबह-सुबह सभी को गुड मॉर्निंग नमस्कार प्रणाम जय भीम नमो बुद्धाय जय संविधान 🙏

आज हमारी बेटी रौनक को जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं जय भीम नमो बुद्धाय जय संविधान 🙏
12/07/2026

आज हमारी बेटी रौनक को जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं जय भीम नमो बुद्धाय जय संविधान 🙏

12/07/2026

इस विडियो में जिंदगी की सच्चाई जरूर सुने

12/07/2026
11/07/2026

चोरी भी हो गया डांस भी हो गया और मजा भी आ गया 😁😁

बिरजा चमार को 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के एक दलित क्रांतिकारी के रूप में स्मरण किया जाता है। उन्होंने अंग्रेजी शासन के...
11/07/2026

बिरजा चमार को 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के एक दलित क्रांतिकारी के रूप में स्मरण किया जाता है। उन्होंने अंग्रेजी शासन के अन्याय का विरोध किया और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले बहादुर योद्धाओं की परंपरा का प्रतिनिधित्व किया। यद्यपि उनके जीवन के बारे में विस्तृत ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी अनेक सामाजिक और लोक परंपराओं में उन्हें साहस, स्वाभिमान और बलिदान के प्रतीक के रूप में सम्मान दिया जाता है। उनका नाम उन गुमनाम वीरों में लिया जाता है जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना योगदान दिया।

10/07/2026

लिखी संविधानवा काट दिहले गुलामिया के

10/07/2026

बाबा साहब ने Ac St को अधिकार दिलाया

रात के ठीक 11:55 बजे शहर के पुराने बस स्टैंड पर आख़िरी बस खड़ी थी। चारों ओर सन्नाटा था। बस स्टाफ़ चाय पीते हुए यात्रियों...
10/07/2026

रात के ठीक 11:55 बजे शहर के पुराने बस स्टैंड पर आख़िरी बस खड़ी थी। चारों ओर सन्नाटा था। बस स्टाफ़ चाय पीते हुए यात्रियों का इंतज़ार कर रहा था। तभी एक काले कोट में लिपटा एक आदमी आया और बिना कुछ बोले बस की आख़िरी सीट पर जाकर बैठ गया।
कंडक्टर टिकट काटने पहुँचा तो उसने धीमी आवाज़ में कहा, "मुझे उसी जगह ले चलो... जहाँ मैं दस साल पहले उतर गया था।"
कंडक्टर चौंक गया। उसने पूछा, "कौन-सी जगह?"
वह मुस्कुराया और बोला, "तुम भूल गए... लेकिन मैं नहीं।"
बस चल पड़ी। रास्ते में एक-एक करके सभी यात्री उतर गए। अब बस में केवल ड्राइवर, कंडक्टर और वह रहस्यमय आदमी बचा था।
अचानक बस की सारी लाइटें बुझ गईं। इंजन अपने-आप बंद हो गया। बाहर घना कोहरा छा गया। तभी कंडक्टर की नज़र रियर व्यू मिरर पर पड़ी...
आख़िरी सीट खाली थी!
वह आदमी कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।
घबराकर दोनों बस से नीचे उतरे। तभी सड़क किनारे एक टूटा हुआ पत्थर दिखा, जिस पर लिखा था—
"यहीं दस वर्ष पहले बस दुर्घटना में 18 यात्रियों की मृत्यु हुई थी।"
ड्राइवर के हाथ से टॉर्च गिर गई। उसे याद आया कि दस साल पहले इसी रास्ते पर हुई दुर्घटना में एक यात्री आख़िरी सीट पर बैठा था... और उसकी लाश कभी नहीं मिली थी।
उसी समय पीछे से वही धीमी आवाज़ सुनाई दी—
"अब मुझे मेरा स्टॉप मिल गया..."
दोनों ने मुड़कर देखा... लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
सुबह जब दूसरी बस उसी रास्ते से गुज़री, तो सड़क पर केवल एक पुराना टिकट पड़ा मिला। उस टिकट पर तारीख़ आज की नहीं, बल्कि दस साल पुरानी थी।
उस दिन के बाद से लोग कहते हैं कि हर साल उसी तारीख़ की रात 11:55 बजे वह रहस्यमय मुसाफ़िर आख़िरी बस में सफ़र करने ज़रूर आता है...
क्या वह सचमुच कोई आत्मा थी, या किसी पुराने राज़ का गवाह? यह रहस्य आज तक कोई नहीं सुलझा पाया।

आप सभी फेसबुक फ्रेंड को गुड मॉर्निंग जय भीम नमो बुद्धाय जय संविधान 🙏 आप लोग कैसे हैं जरूर बताना
08/07/2026

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