10/07/2026
रात के ठीक 11:55 बजे शहर के पुराने बस स्टैंड पर आख़िरी बस खड़ी थी। चारों ओर सन्नाटा था। बस स्टाफ़ चाय पीते हुए यात्रियों का इंतज़ार कर रहा था। तभी एक काले कोट में लिपटा एक आदमी आया और बिना कुछ बोले बस की आख़िरी सीट पर जाकर बैठ गया।
कंडक्टर टिकट काटने पहुँचा तो उसने धीमी आवाज़ में कहा, "मुझे उसी जगह ले चलो... जहाँ मैं दस साल पहले उतर गया था।"
कंडक्टर चौंक गया। उसने पूछा, "कौन-सी जगह?"
वह मुस्कुराया और बोला, "तुम भूल गए... लेकिन मैं नहीं।"
बस चल पड़ी। रास्ते में एक-एक करके सभी यात्री उतर गए। अब बस में केवल ड्राइवर, कंडक्टर और वह रहस्यमय आदमी बचा था।
अचानक बस की सारी लाइटें बुझ गईं। इंजन अपने-आप बंद हो गया। बाहर घना कोहरा छा गया। तभी कंडक्टर की नज़र रियर व्यू मिरर पर पड़ी...
आख़िरी सीट खाली थी!
वह आदमी कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।
घबराकर दोनों बस से नीचे उतरे। तभी सड़क किनारे एक टूटा हुआ पत्थर दिखा, जिस पर लिखा था—
"यहीं दस वर्ष पहले बस दुर्घटना में 18 यात्रियों की मृत्यु हुई थी।"
ड्राइवर के हाथ से टॉर्च गिर गई। उसे याद आया कि दस साल पहले इसी रास्ते पर हुई दुर्घटना में एक यात्री आख़िरी सीट पर बैठा था... और उसकी लाश कभी नहीं मिली थी।
उसी समय पीछे से वही धीमी आवाज़ सुनाई दी—
"अब मुझे मेरा स्टॉप मिल गया..."
दोनों ने मुड़कर देखा... लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
सुबह जब दूसरी बस उसी रास्ते से गुज़री, तो सड़क पर केवल एक पुराना टिकट पड़ा मिला। उस टिकट पर तारीख़ आज की नहीं, बल्कि दस साल पुरानी थी।
उस दिन के बाद से लोग कहते हैं कि हर साल उसी तारीख़ की रात 11:55 बजे वह रहस्यमय मुसाफ़िर आख़िरी बस में सफ़र करने ज़रूर आता है...
क्या वह सचमुच कोई आत्मा थी, या किसी पुराने राज़ का गवाह? यह रहस्य आज तक कोई नहीं सुलझा पाया।