30/01/2026
रानी भटियाणी (स्वरूप कंवर), जिन्हें जसोल माजीसा के नाम से जाना जाता है, 18वीं शताब्दी की एक सम्मानित राजस्थानी लोक देवी हैं। जैसलमेर में जन्मी और जसोल (बाड़मेर) की रानी, उन्होंने अपने पुत्र के वियोग में सतीत्व को अपनाया और अपने दयालु स्वभाव व चमत्कारों के लिए जन-जन में पूजी जाती हैं। उनका प्रमुख मंदिर बाड़मेर के जसोल में स्थित है।
रानी भटियाणी का ऐतिहासिक और पौराणिक जीवन:
जन्म और प्रारंभिक जीवन: रानी भटियाणी का असली नाम स्वरूप कंवर था। उनका जन्म जैसलमेर जिले के जोगीदास गाँव में एक भाटी राजपूत परिवार में ठाकुर जोगराज सिंह जी के घर हुआ था।
विवाह: उनका विवाह जसोल के राव कल्याण सिंह के साथ हुआ था, जो उनके दूसरे विवाह के रूप में जाना जाता है।
पुत्र वियोग और सतीत्व: रानी भटियाणी के एक पुत्र हुआ जिसका नाम लाल सिंह था। पहली रानी (देवड़ी) की ईर्ष्या के कारण, लाल सिंह को जहर देकर मार दिया गया। इस असहनीय पुत्र वियोग में, माता सती हो गईं।
लोक देवी के रूप में मान्यता: सती होने के बाद, उन्हें एक देवी के रूप में सम्मान मिलने लगा। भक्त उन्हें "माजीसा" या "भुआसा" कहकर पूजते हैं।
जसोल का मुख्य मंदिर: जसोल में उनकी स्मृति में एक भव्य मंदिर बनवाया गया है, जहाँ हर साल भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी को एक बड़ा मेला भरता है।
पर्चे (चमत्कार) और आस्था:
रानी भटियाणी के प्रति अटूट आस्था का कारण उनके द्वारा पीहर के दमामी को दिए गए पर्चे (चमत्कार) माने जाते हैं। वे न केवल राजस्थान में बल्कि गुजरात, महाराष्ट्र, और सीमा पार सिंध तक पूजी जाती हैं। उनका इतिहास केवल एक रानी का नहीं, बल्कि एक दिव्य आत्मा का है, जो आज भी अपने भक्तों की झोली भरती हैं।
प्रमुख स्थल:
जसोल (बाड़मेर): मुख्य शक्तिपीठ।
जोगीदास (जैसलमेर): जन्मस्थान और पवित्र मंदिर।