03/03/2026
सुप्रीम कोर्ट में तलाक की सुनवाई हुई। इस केस में पति का कहना है कि वह अपनी पत्नी को हर महीने एलिमनी के तौर पर 12 हजार रुपये नहीं दे सकता। क्योंकि वह दिहाड़ी मजदूर है और उसे हर महीने महज 325 रुपये ही मिलते हैं। उसने कोर्ट को बताया कि वह खूब मेहनत भी करे तो मुश्किल से 9 हजार रुपये महीने ही कमा पाता है। ऐसे में वह पत्नी को 12 हजार रुपये महीने कैसे दे सकता है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस दावे पर यकीन नहीं किया और कहा कि यह मानना मुश्किल है कि आज के समय में कोई इतना कम कमाता है। बेंच ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि कोई कंपनी मिनिमम डेली वेज से कम देगी। शख्स ने हिंदुस्तान ऑटो एजेंसी नाम की फर्म को बुलाने की भी इच्छा जताई। कोर्ट ने सवाल किया कि आज कौन सी कंपनी इतनी कम सैलरी देती है। अदालत ने यह भी कहा कि यह बात भरोसेमंद नहीं लगती है।