17/08/2026
उत्तराखण्ड लोक पर्व 'घी-त्यार" की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।
Note - कृपया पूरा पढ़े ।
भादपद (भादो ) (सावन ) की संक्रांति को हमारे राज्य उत्तराखंड में घी त्यार मनाया जाता है इसे घी सक्रांति भी बोलते है । आप सभी को घी त्यार की बधै ।
आज के दिन घी का सेवन जरूर करे अन्यथा मान्यताओं के अनुसार अगले जन्म में घोंघा बनने को तैयार रहे ।
आज के दिन उत्तराखंड के किसान हरेला में बीजे गये बीजो से अंकुरित हुई बलियो को अपने घरों की चौखट के दोनों तरफ गोबर से लगा कर अच्छी फसल की कामना करते है और खुशियां मानते है ।
बेडू रोटी (उड़द की दाल को भर के रोटी ) और पिनालू (अरबी )के पत्तो की सब्जी या पतोड़ ,देसी घी संग खाये और त्यौहार को परम्परागत तरीके से मनाये |
चरक संहिता में लिखा है "घी- स्मृति, मेधा, ऊर्जा, बलवीर्य, ओज, कफ और वसावर्धक है। यह वात, पित्त, बुखार और विषैले पदार्थों का नाशक है " ज्योतिष शास्त्र और सौर मासीय पंचांग के अनुसार सूर्य एक राशि में संचरण करते हुए जब दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो उसे सक्रांति कहते है आज के दिन उनके अनुसार सूर्य सिंह राशि मे प्रवेश कर रहा है इस लिए भारत मे कई जगह इसे सिंह सक्रांति भी कहते है ।
Note *मेरी सोच के अनुसार आज सूर्य की किरणों से घी एक सुपर दवाई का कार्य करता होगा तभी आज के दिन पुरखो ने इसका सेवन करने को घी -त्यार लोक पर्व मनवाना शुरू किया होगा । #घी_त्यार