Pahadi Sardar Badrish Chhabra

Pahadi Sardar Badrish Chhabra जन्म पंजाबी परिवार में हुआ पर जन्म से ही गढ़वाल क्षेत्र में रहा तो गढ़वाल दिमाग और दिल में बस गया ।

उत्तराखण्ड लोक पर्व 'घी-त्यार" की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।  Note - कृपया पूरा पढ़े । भादपद (भादो ) (सावन ) की संक्रांत...
17/08/2026

उत्तराखण्ड लोक पर्व 'घी-त्यार" की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।
Note - कृपया पूरा पढ़े ।
भादपद (भादो ) (सावन ) की संक्रांति को हमारे राज्य उत्तराखंड में घी त्यार मनाया जाता है इसे घी सक्रांति भी बोलते है । आप सभी को घी त्यार की बधै ।
आज के दिन घी का सेवन जरूर करे अन्यथा मान्यताओं के अनुसार अगले जन्म में घोंघा बनने को तैयार रहे ।
आज के दिन उत्तराखंड के किसान हरेला में बीजे गये बीजो से अंकुरित हुई बलियो को अपने घरों की चौखट के दोनों तरफ गोबर से लगा कर अच्छी फसल की कामना करते है और खुशियां मानते है ।
बेडू रोटी (उड़द की दाल को भर के रोटी ) और पिनालू (अरबी )के पत्तो की सब्जी या पतोड़ ,देसी घी संग खाये और त्यौहार को परम्परागत तरीके से मनाये |
चरक संहिता में लिखा है "घी- स्मृति, मेधा, ऊर्जा, बलवीर्य, ओज, कफ और वसावर्धक है। यह वात, पित्त, बुखार और विषैले पदार्थों का नाशक है " ज्योतिष शास्त्र और सौर मासीय पंचांग के अनुसार सूर्य एक राशि में संचरण करते हुए जब दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो उसे सक्रांति कहते है आज के दिन उनके अनुसार सूर्य सिंह राशि मे प्रवेश कर रहा है इस लिए भारत मे कई जगह इसे सिंह सक्रांति भी कहते है ।
Note *मेरी सोच के अनुसार आज सूर्य की किरणों से घी एक सुपर दवाई का कार्य करता होगा तभी आज के दिन पुरखो ने इसका सेवन करने को घी -त्यार लोक पर्व मनवाना शुरू किया होगा । #घी_त्यार

अपणू लिखी एक गीत कू AI चित्रण 🙏🌄⛰️🏔️song lyrics - Badrish Chhabra pahadi sardar (badrishchhabra@gmail.com  ) Lyrics Are ...
09/08/2026

अपणू लिखी एक गीत कू AI चित्रण 🙏🌄⛰️🏔️
song lyrics - Badrish Chhabra pahadi sardar
([email protected] ) Lyrics Are under copyright act of "Intellectual property" as according to copyright act of India

Actor and screenplay creater Badrissh Chhabbra alias Pahadi Sardar Badrish Chhabra

voice by

music prompts and video creativity scenes and editing prompt - and and Chhabbra

music by -

video editing - by



Note- यह घटना काल्पनिक गीत के माध्यम से दर्शायी जा रही है ।

!!गीत की कहानी!!
एक पहाड़ी आदमी जो दूर देश के नौकरी कर रहा है वहां की बड़ी बड़ी बिल्डिंगों, ट्रेन ,ट्रैफिक ,दम घोटते वातावरण के बीच , फिल्टर पानी के बीच अपने यहां के तरह तरह के पानी , पत्थरों , पेड़ो , गानों,खान पान,दोस्तो का साथ ,अध्यापक ,ठेकेदार ,नेता, छटगाल यानी छटके हुए( NRi) लोगो को याद करके स्कूटर उठा कर पहाड़ में अपने गांव वापस आता है

गीत के बोल...
गाड़ ,गंगाल, मंगरा, छिचडो,
बुराँस, काफल, फ्यूँली, कंडाली,
सिलौटा, पठ्ठाल , घट, ढांग, ढुंगो, गंगलोड ,
खुदेड़ ,चेन्तवली,छोपती,रखवाली, जागर ,
छैमी,झांगोरा,भट्ट,माल्टा,काख़ड़ी ,
अरसा, चेन्सू, थिचवाणी, खुमड़ि ; काफली
बंथो मां चलकन्वास .शेहर गौं को गठजोड बाटो ,
दगड़ियों की टोली , स्वादी स्वादी खांणू
फौजी, नेता , ठेकेदार, अध्यापक अर छटगाल
मित्ते पहाड़ की खुद लगान्दू !!!

#पहाड़ी #गढ़वाली #उत्तराखंड #उत्तराखंडी #गढ़वाली_सॉन्ग #पहाड़ी #पहाड़ीlifestyle
#पहाड़ीculture

song lyrics - Badrish Chhabra pahadi sardar [email protected]...

  जी ते श्रद्धांजलि गढ़वाली फिल्म कू एक गाने वास्ता ..
12/04/2026

जी ते श्रद्धांजलि गढ़वाली फिल्म कू एक गाने वास्ता ..

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फूलदेई पर्व की बधे 🙏🌺💐🌹🌼🌸
14/03/2026

फूलदेई पर्व की बधे 🙏🌺💐🌹🌼🌸

मंडुआ किंग Subhash Raturi ने राजभवन देहरादून में वसंतउत्सव में मडुवे से बने आधुनिक खान पान में धूम मचा रखी है । वैसे इनक...
28/02/2026

मंडुआ किंग Subhash Raturi ने राजभवन देहरादून में वसंतउत्सव में मडुवे से बने आधुनिक खान पान में धूम मचा रखी है । वैसे इनका रेस्टोरेंट मियांवाला देहरादून में स्थित है । Online food delivery apps पर Mandua king के नाम से भी है ।



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20/02/2026

धारी मां के मंदिर के समीप मोटर बोट की आवाजे परेशान तो करती ही थी अब हादसे भी कर कर रही है कही देवी देवता नाराज तो नहीं हो

गढ़वाली फिल्म ज़लमभूमि देखने मत जाना अगर तुम्हारी आँखें दिल से ज्यादा संवेदनशील  है और आंसू निकल पड़ते है ।क्या कमाल का त...
09/02/2026

गढ़वाली फिल्म ज़लमभूमि देखने मत जाना अगर तुम्हारी आँखें दिल से ज्यादा संवेदनशील है और आंसू निकल पड़ते है ।
क्या कमाल का ताना बाना ले कर उच्चतर की कहानी के माध्यम से पटकथा ,संवाद , किरदार , रिश्तों की गहराई ,समाजिक मुद्दे ,कैमरा और संगीत के बाद एडिटिंग द्वारा बनी perfect फिल्म । समस्त टीम को शुभकामनाएं और दर्शकों से निवेदन समय निकाल का जाए देखे । और मुझे एक बात समझ नहीं आई की डायरेक्टर कौन है ? कलाकार दिल जीत गए ,इस फिल्म में वही कलाकार चमत्कार कर गए और पिछली फिल्मों में अदाकारी !!!!!

गढ़वाल के वर्तमान में एक युग पुरुष है दाता राम जी यानी D.r. Purohit जी उन्होंने मुझे अपने विश्व विख्यात नाटक चक्रव्यूह (...
20/01/2026

गढ़वाल के वर्तमान में एक युग पुरुष है दाता राम जी यानी D.r. Purohit जी
उन्होंने मुझे अपने विश्व विख्यात नाटक चक्रव्यूह (गढ़वाली) में एक पूजारी का रोल करने को कहा जिसे मैंने अपना सौभाग्य समझ स्वीकार किया नाट्य मंचन देहरादून विरासत में हुआ था ।
इस किरदार ने मुझे बहुत ऑफर्स दे दिए है इस लिए आज सहर्ष लिंक शेयर कर रहा हूँ।

https://youtu.be/_Yp_LpB08AY?si=cR11VfyEKbzUMb1f

Day 8 Chakravyuh Full Performance - Virasat 2025 | 12th October 2025

आपको ये जरूर जानना चाहिए......🙏🔆🙏14 जनवरी को घुघुतिया पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। उत्तराखंड में मकर संक्रांति को घुघुत...
14/01/2026

आपको ये जरूर जानना चाहिए......🙏🔆🙏

14 जनवरी को घुघुतिया पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। उत्तराखंड में मकर संक्रांति को घुघुतिया संक्रांति या पुस्योड़िया संक्रांति भी कहते हैं। हालांकि इसके अन्य नाम मकरैण, उत्तरैण, घोल्डा, घ्वौला, चुन्यात्यार, खिचड़ी संक्रांति, खिचड़ी संगरादि भी हैं।
मकर संक्रांति के त्यौहार के दिन अनेक पकवान कव्वों को खिलाये जाते हैं। घुघता इन पकवानों में मुख्य है। घुघुत एक पक्षी का नाम भी है। त्यौहार के दिन बनने वाला घुघुत पकवान हिन्दी के अंक ४ के आकार का होता है।
आटे को गुड़ में गूंदने के बाद उससे घुघते बनाए जाते हैं। इस बात का कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं है कि यह त्यौहार कब से और क्यों मनाया जाता है। साथ ही इस बात का भी कोई प्रमाण नहीं है कि इस पकवान को घुघता क्यों कहते हैं।
एक लोककथा के अनुसार कहा जाता है कि बहुत समय पहले घुघुत नाम का एक राजा हुआ करता था। एक ज्योतिषी ने उसे बताया कि मकर संक्रांति की सुबह कव्वों द्वारा उसकी हत्या कर दी जायेगी।
राजा ने इसे टालने का एक उपाय सोचा। उसने राज्य भर में घोषणा कर दी कि सभी लोग गुड़ मिले आटे के विशेष प्रकार के पकवान बनाकर अपने बच्चों से कव्वों को अपने अपने घर बुलायेंगे। इन पकवानों का आकर सांप के आकार के रखने के आदेश दिए गये ताकि कव्वा इन पर और जल्दी झपटे।
राजा का अनुमान था कि पकवान खाने में उलझ कर कव्वे उस पर आक्रमण की घड़ी को भूल जायेंगे। लोगों ने राजा के नाम से बनाये जाने वाले इस पकवान का नाम ही घुघुत रख दिया। तभी से यह परम्परा चली आ रही है।
इसी तरह की एक अन्य जनश्रुति के अनुसार सालों पहले उत्तराखंड क्षेत्र में एक राजा हुआ करता था। उसे एक ज्योतिषी ने बताया कि उस पर मारक ग्रहदशा आयी हुई है। यदि वह घुघुतों (फ़ाख्तों) का भोजन कव्वों को करा दे तो उसके इस ग्रहयोग का प्रभाव टल सकता है।
राजा अहिंसावादी था। उसे संक्रांति के दिन निर्दोष पक्षियों को मारना ठीक नहीं लगा। उसने उपाय के तौर पर गुड़ मिले आटे के प्रतीकात्मक घुघते बनवाये। राज्य के बच्चों से कव्वों को इसे खिलवाया तभी से यह परम्परा चल पड़ी।
कव्वे को पकवान खिलाने के संबंध में एक अन्य मान्यता यह है कि ठण्ड और हिमपात के कारण अधिकांश पक्षी मैदानों की ओर प्रवास कर जाते हैं। कव्वा पहाड़ों से प्रवास नहीं करता है। कव्वे के अपने प्रवास से इस प्रेम के कारण स्थानीय लोग मकर संक्रांति के दिन उसे पकवान खिलाकर उसका आदर करते हैं।
गढ़वाल में इसे ‘चुन्या त्यार’ भी कहा जाता है। इस दिन वहां दाल, चावल, झंगोरा आदि सात अनाजों को पीसकर उससे चुन्या नाम का विशेष व्यंजन तैयार किया जाता है। इस दिन गढ़वाल में आटे के मीठे घोल्डा/ घ्वौलो के बनाये जाने के कारण इसे घोल्डा या घ्वौल भी कहा जाता है।
ंक्रांति

पर मेरे ज्ञान के अनुसार 8 के आकर के घुगुतिया कीड़े के आकार की अनुभूति देता है जिसे कौआ तुरन्त खा लेता है इस दिनों कौओ ने पीपल , गूलर के पेड़ से दाने या फल खाये होते है । जिस मिश्रण से घुगुतिया बनाया जाता है वो उसके पेट मे एक रसायन बनाता है तो बीज के अंकुरित होने में बहुत सहायता करता है । जब कौआ बीट करता है तो बीज जहाँ भी गिरता है पौधे का रूप ले लेता है । हमारे पुरखो ने कितने अच्छे तरीके से हमारे द्वारा त्योहार के रूप में बीजारोपण करवा दिया ।

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