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बच्चों में बचपन से ही खाना बनाने और घर के छोटे-मोटे काम करने का जो शौक होता है, उसे बिल्कुल बढ़ावा देना चाहिए। यह उनकी ग...
02/09/2026

बच्चों में बचपन से ही खाना बनाने और घर के छोटे-मोटे काम करने का जो शौक होता है, उसे बिल्कुल बढ़ावा देना चाहिए। यह उनकी ग्रोथ के लिए बहुत फायदेमंद है। काम करने देने से बच्चों को कई जरूरी सीख मिलती है।

25/08/2026

टिप्पणीडॉ. आंबेडकर का मानना था कि राजनीतिक कारणों से देश के नेता कुछ समाज की बुराइयों पर पर्दा डाल रहे हैं। उन्होंने लिखा:महिलाओं की स्थिति: उन्होंने कुछ समाज में प्रचलित पर्दा प्रथा, बहुविवाह (Polygamy), और एकतरफा तलाक की प्रथाओं की तीखी आलोचना की। उनका कहना था कि इन प्रथाओं ने महिलाओं को सामाजिक रूप से बेहद कमजोर और अलग-थलग कर दिया है।सामाजिक जड़ता (Social Stagnation): बाबासाहेब ने स्पष्ट कहा कि जहां हिंदू समाज में (तमाम विरोधों के बावजूद) कुछ हद तक आंतरिक सुधार की प्रक्रिया चल रही थी, वहीं अन्य समाज अपनी पुरानी रूढ़ियों को छोड़ने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था।2. गांधी जी की 'तुष्टिकरण' नीति की आलोचनाडॉ. आंबेडकर ने गांधी जी द्वारा सांप्रदायिक एकता (हिंदू-मुस्लिम भाईचारे) के लिए अपनाए गए तरीकों को व्यावहारिक रूप से असफल माना।अल्पसंख्यक कट्टरपंथ को बढ़ावा: बाबासाहेब का तर्क था कि गांधी जी मुस्लिम नेतृत्व की हर मांग को बिना किसी शर्त के मानते जा रहे थे। उनका मानना था कि जब आप किसी की गलत बात या जिद के आगे बार-बार झुकते हैं, तो वह भाईचारा नहीं बनता, बल्कि दूसरे पक्ष की आक्रामकता और बढ़ जाती है।खिलाफत आंदोलन का विरोध: 1920 में जब गांधी जी ने तुर्की के खलीफा के समर्थन में भारत में 'खिलाफत आंदोलन' चलाया, तो डॉ. आंबेडकर इसके सख्त खिलाफ थे। उनका कहना था कि एक धार्मिक और विदेशी मुद्दे को भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ना देश में धार्मिक कट्टरता को न्योता देने जैसा था, जिसके परिणाम बाद में 'मोपला दंगों' के रूप में सामने आए।3. 'भाईचारे' की जगह 'राजनैतिक सौदेबाजी'डॉ. आंबेडकर ने साफ शब्दों में लिखा कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच जो चल रहा था, वह कोई वास्तविक भाईचारा नहीं बल्कि एक राजनैतिक सौदेबाजी (Political Bargaining) थी।जब तक एक पक्ष दूसरे पक्ष की शर्तें मानता रहा, तब तक शांति का ढोंग बना रहा।जैसे ही बहुसंख्यक समाज ने अपने अधिकारों की बात की, वह नकली भाईचारा ताश के पत्तों की तरह ढह गया।4. कानून और सुधार सबके लिए एक समान होंबाबासाहेब का विजन एक आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भारत का था। यही कारण है कि जब वे संविधान सभा के प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष बने, तो उन्होंने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) की पुरजोर वकालत की।उनका मानना था कि शादी, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे नागरिक अधिकार संविधान और कानून से तय होने चाहिए, न कि किसी धर्म की पर्सनल लॉ बुक से।उनका स्पष्ट मत था कि यदि देश को आगे बढ़ना है, तो सुधार की कैंची केवल हिंदू समाज पर नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक और हर समाज पर समान रूप से चलनी चाहिए।निष्कर्ष (Conclusion)डॉ. आंबेडकर के विचार आपके इस तर्क को पूरी तरह प्रमाणित करते हैं कि "बुराई चाहे जहाँ भी हो, उसे खत्म किया जाना चाहिए।" उनके अनुसार, किसी समाज को सिर्फ इसलिए सुधारों से दूर रखना कि वह 'अल्पसंख्यक' है, उस समाज के आम लोगों (विशेषकर महिलाओं) के साथ सबसे बड़ा अन्याय है।

23/08/2026

🌽 आया सावन, महका भुट्टा!रिमझिम-रिमझिम बरसे पानी,शुरू हुई भुट्टे की कहानी!ठेले वाले भैया ने कोयला सुलगाया,उड़ते धुएं ने सबका मन ललचाया।चटचट-चटचट दानें भुनते,हम सब खड़े हैं रास्ता तकते।हाथ में लेकर गरमा-गरम,दबाया जो दांतों से, मूड हुआ नरम!नींबू, नमक और मिर्ची का वार,जीभ बोली- अहा! मज़ा आ गया यार!पेट का पाचन, आँखों की शान,बरसात का राजा, भुट्टा महान!खाइए, खिलाइए और सावन मनाइए,चटखारे लेकर बस झूम जाइए!

19/08/2026

हो सकता है, खासकर जब इसका कोई समय-सीमा या नियंत्रण न हो। इससे बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर बुरा असर पड़ता है।ज्यादा टीवी देखने के नुकसानशारीरिक स्वास्थ्य: लगातार बैठे रहने से शारीरिक गतिविधि कम होती है, जिससे मोटापा और कम उम्र में कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।आंखों पर असर: पास से और देर तक स्क्रीन देखने से बच्चों की नजर कमजोर हो सकती है और आंखों में थकान या दर्द रहता है।नींद में बाधा: सोने से ठीक पहले टीवी देखने से नींद के हॉर्मोन पर असर पड़ता है, जिससे नींद की गुणवत्ता बिगड़ती है।व्यवहार में बदलाव: violent या गलत कंटेंट देखने से बच्चे जिद्दी, आक्रामक या संवेदनशील हो सकते हैं।पढ़ाई पर असर: ज्यादा समय स्क्रीन के आगे बिताने से बच्चों का ध्यान पढ़ाई और रचनात्मक कार्यों से भटक जाता है।

20/06/2026

I got over 10 reactions on one of my posts last week! Thanks everyone for your support! 🎉

06/06/2026

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06/06/2026

मुंसियारी उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित एक बेहद खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है, जो पंचाचूली पर्वत श्रृंखला के शानदार नजारों के लिए जाना जाता है। लगभग 2,298 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह स्थान जोहार घाटी का प्रवेश द्वार है और मिलम, रालम व नामिक जैसे प्रसिद्ध ग्लेशियर ट्रेक का मुख्य बेस कैंप भी है।मुख्य आकर्षणखलिया टॉप (Khaliya Top): यह शुरुआती ट्रैकर्स के लिए एक बेहतरीन और थोड़ा चढ़ाई वाला ट्रेकिंग रूट है, जहां से हिमालय की बर्फीली चोटियों का 360-डिग्री नजारा दिखता है।बिरथी फॉल्स (Birthi Falls): मुंसियारी के रास्ते में पड़ने वाला यह एक विशाल और खूबसूरत झरना है, जहां एक छोटा हाइकिंग ट्रैक और ग्लास (कांच) व्यूइंग ब्रिज बना हुआ है।नंदा देवी मंदिर (Nanda Devi Temple): यह एक पवित्र और शांत धार्मिक स्थल है, जिसके पीछे पहाड़ों की चोटियां एक बेहद खूबसूरत बैकग्राउंड बनाती हैं।थामरी कुंड (Thamri Kund): घने देवदार के जंगलों के बीच स्थित यह एक शांत और प्राकृतिक झील है, जो शांति से समय बिताने और वन्यजीवों को देखने के लिए बेहतरीन जगह है।दरकोट गांव (Darkot Village): यह एक छोटा और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गांव है, जो लकड़ी की पारंपरिक नक्काशी और स्थानीय स्तर पर हाथ से बनाई जाने वाली पश्मीना शॉल के लिए मशहूर है।

05/06/2026

30/05/2026

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