लोकनीति उत्तराखंड

लोकनीति उत्तराखंड News Story From Highland

07/09/2026

उत्तराखंड में अब 03 अक्टूबर को जारी होगी अंतिम वोटर लिस्ट।
निर्वाचन आयोग ने बढ़ाई समय सीमा। पहले 15 सितम्बर को जारी होनी थी वोटर लिस्ट।।

07/09/2026

ऋषिकेश: 15 सितम्बर से शुरू होगी राफ्टिंग

07/09/2026

दिल्ली PG हादसा

06/09/2026

रुद्रपुर में स्थानीय लोगों और सिंचाई विभाग के अधिकारियों में झड़प, अधिकारी के मुंह पर कालिक पोती ।।

ये शिक्षक दिवस कैसा शिक्षक दिवस।ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के मास्साब शिक्षक दिवस पर भी स्कूल नहीं आए। वहीं शिक्षकों ...
06/09/2026

ये शिक्षक दिवस कैसा शिक्षक दिवस।

ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के मास्साब शिक्षक दिवस पर भी स्कूल नहीं आए। वहीं शिक्षकों का कहना है कि एक शिक्षक की तबीयत खराब थी, जबकि दूसरे की ड्यूटी दूसरे सरकारी काम में लगी थी। पर जो भी हो स्कूल के शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का न पहुंचना अखर तो रहा है।।

05/09/2026

Disha बैठक में अधिकारियों पर भड़की मंडी से #बीजेपी सांसद #कंगना रनौत।।

05/09/2026

माँ का दूध।।

04/09/2026

ये तेरे महल ये चौबारे,
यहीं रह जाएंगे प्यारे।।

#नेपालीसमाचार #बाढ़ #आपदा

04/09/2026

पहाड़ में जन्माष्टमी की धूम।।

#श्रीकृष्ण #जनमाष्टमी

अगर बदकिस्मती इंसान होती,तो उसका नाम श्रीकृष्ण होता।जन्म हुआ एक कारागार में।ज़ंजीरों के बीच।ठंडी दीवारों के बीच।और भय के...
04/09/2026

अगर बदकिस्मती इंसान होती,
तो उसका नाम श्रीकृष्ण होता।

जन्म हुआ एक कारागार में।

ज़ंजीरों के बीच।
ठंडी दीवारों के बीच।
और भय के साए में।

पश्चिम की दुनिया एक ब्रेकअप और थोड़ी उदासी के बाद
सेल्फ-हेल्प किताबें लिखने लगती है।

लेकिन कृष्ण का जन्म ही मृत्यु के आदेश के साथ हुआ था।

उनका अपना मामा उन्हें मारना चाहता था।

उन्होंने कभी अपनी माँ का दूध तक नहीं पिया।

जन्म के कुछ घंटों बाद ही,
उनके पिता उन्हें आधी रात को उफनती नदी पार कराकर ले गए।

ऊपर बरसता तूफ़ान।
पीछे मौत।
आगे अंधेरा।

न कोई जलती हुई झाड़ी।
न कोई समुद्र का रास्ता खुलना।
न कोई चमत्कार जो मुक्ति की घोषणा करे।
न कोई सुगंधित मोमबत्तियों वाला थेरेपिस्ट।

बस जीवित रहने की जद्दोजहद।

जन्म से राजकुमार।
पालन-पोषण एक ग्वाले की तरह।

बोलना सीखने से पहले ही
पूतना भेजी गई।

फिर शकटासुर।
तृणावर्त।
कालिया नाग।

एक के बाद एक।

मानो किस्मत को उनसे व्यक्तिगत दुश्मनी हो।

और फिर भी…
वो मुस्कुराते रहे।

आज लोग एक “अनफॉलो” से टूट जाते हैं।

कृष्ण ने बचपन में ही सब खो दिया था।

अपने माता-पिता।
अपना बचपन।
अपना घर।

और राधा।

आह… राधा।

वो रिश्ता जिसे बॉलीवुड कभी समझ ही नहीं पाया।

उनका सबसे प्रिय मित्र सुदामा गरीबी में जीता रहा।
कृष्ण अपने हर प्रियजन को बचा नहीं सके।

शिशुपाल ने सबके सामने बार-बार उनका अपमान किया।

राजाओं की सभा में।

कृष्ण शांत रहे।

फिर आया जरासंध।

17 आक्रमण।
मथुरा बार-बार जली।

और फिर आया सबसे बड़ा दुःख।

महाभारत।

कृष्ण ने उसे रोकने की पूरी कोशिश की।

वे स्वयं दुर्योधन के पास गए।

शांति की भीख माँगी।
सिर्फ 5 गाँव।

दुर्योधन ने मना कर दिया।

और मानवता मुस्कुराते हुए नरक में उतर गई।

18 दिन बाद,
नदियाँ रक्त से भर गईं।

पूरा सभ्यता-काल धूल में बदल गया।

और कृष्ण उस मौन का भार उठाते रहे।

न कोई शिकायत।
न कोई प्रश्न कि ईश्वर ने ऐसा क्यों होने दिया।

बस मौन।

फिर गांधारी ने उन्हें श्राप दिया।

एक दुखी माँ ने हर विनाश का दोष कृष्ण पर लगाया।

और कृष्ण ने वह श्राप भी स्वीकार कर लिया।

यही आध्यात्मिक शक्ति है।

फिर आया अंतिम पतन।

उनका अपना वंश स्वयं नष्ट हो गया।

मदिरा।
हिंसा।
पागलपन।

यादव आपस में ही एक-दूसरे को मारने लगे।

उनका अपना पुत्र भी उस विनाश में मारा गया।

कृष्ण बस देखते रहे।

क्योंकि कुछ अंत रोके नहीं जा सकते।

फिर द्वारका डूब गई।

उनका शहर।
उनका सपना।
उनके जीवन का निर्माण।

समुद्र में समा गया।

और अंत में…

वो व्यक्ति जो सबसे महान रणनीतिकार था।
जिससे राजा डरते थे।
जिसे ऋषि पूजते थे।

एक जंगल में अकेला मरा।

एक शिकारी का तीर।
एक भूल।

न सिंहासन।
न सेना।
न कोई भव्य विदाई।
न पुनर्जन्म का प्रदर्शन।

बस पेड़ों के नीचे पसरा मौन।

और फिर भी…
उन्हें “पूर्ण पुरुष” कहा जाता है।

इसलिए नहीं कि जीवन उनके प्रति दयालु था।

बल्कि इसलिए कि दुःख कभी उनके भीतर ज़हर नहीं बन पाया।

यही कृष्ण की महानता है।

न चमत्कार।
न दिव्य शक्तियाँ।
न केवल कथाएँ।

जीवन ने उन्हें पीड़ा दी।
उन्होंने जीवन को ज्ञान दिया।

जीवन ने उन्हें विश्वासघात दिया।
उन्होंने मानवता को गीता दी।

जीवन ने उन्हें युद्ध दिया।
उन्होंने संसार को वैराग्य दिया।

और इस अराजकता के बीच,
उन्होंने हमें एक भयावह सत्य दिया—

“तुम्हारा अधिकार केवल कर्म पर है,
फल पर कभी नहीं।”

कृष्ण ने पलायन नहीं सिखाया।

उन्होंने सहन करना सिखाया।

उन्होंने झूठी सकारात्मकता नहीं सिखाई।

उन्होंने जिम्मेदारी सिखाई।

उन्होंने सिखाया कि
नरक के बीच खड़े रहकर भी
स्वयं नरक कैसे न बना जाए।

शायद इसलिए कृष्ण आज भी मुस्कुराते हैं।

और शायद…

इसीलिए भारत आज भी जीवित है।

Address

Dehradun
Dehra Dun

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when लोकनीति उत्तराखंड posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share