04/11/2025
आजु निकुंज मंजु में खेलत, नवल किशोर नवीन किशोरी ।
अति अनुपम अनुराग परस्पर, सुनि अभूत भूतल पर जोरी ॥
विद्रुम फटिक विविध निर्मित धर, नव कर्पूर पराग न थोरी।
कोमल किसलय सयन सुपेसल, तापर श्याम निवेसित गोरी ॥
मिथुन हास-परिहास परायन, पीक कपोल कमल पर झोरी।
गौर-श्याम भुज कलह मनोहर, नीवी-बंधन मोचत डोरी ॥
हरि-उर-मुकुर विलोकि अपनपौ, विभ्रम विकल मान-जुत भोरी ।
चिबुक सुचारु प्रलोइ प्रबोधत, पिय प्रतिबिंब जनाय निहोरी ॥
नेति नेति बचनामृत सुनि-सुनि, ललितादिक देखत दुरि चोरी ।
जै श्रीहित हरिवंश करत कर धूनन, प्रणयकोप मालावलि तोरी ॥
🙏श्री राधिका हृदय विहारी 🙏