10/06/2026
महबूबा तेरी तस्वीर
किस तरह मैं बनाऊ
तेरी जुल्फों की दास्ताँ
किस तरह मैं सुनाऊ
महबूबा
महबूबा तेरी तस्वीर किस तरह मैं बनाऊ
तेरे लिए कहूं कोई बात
तेरे लिए सोचो कोई नाम
मैं तो बस दीवाना हो गया
नहीं मेरे बस का यह काम
तेरे जैसा कोई कहीं
देखा न सुना है
महबूबा
महबूबा तेरी तस्वीर किस तरह मैं बनाऊ
धरे मौजें रुत और जाम
नगमे पैमाने बूत और फूल
सब तेरी राहों की खाक
सब तेरे कदमों की धूल
तेरे जैसा कोई कहीं
देखा न सुना है
महबूबा
महबूबा तेरी तस्वीर किस तरह मैं बनाऊ
नज़रो ने देखा है तुझे
आता नहीं फिर भी यकीन
क्योंकि मेरी दुनिया के लोग
होते नहीं इतने हसीं
तेरे जैसा कोई कहीं
देखा न सुना है
महबूबा
महबूबा तेरी तस्वीर
किस तरह मैं बनाऊ
तेरी जुल्फों की दास्ताँ
किस तरह मैं सुनाऊ
महबूबा?????????