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**वंदे भारत में पानी टपकता भारत: देश की प्रीमियम ट्रेन का असली चेहरा**दिल्ली जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को...
24/06/2025

**वंदे भारत में पानी टपकता भारत: देश की प्रीमियम ट्रेन का असली चेहरा**

दिल्ली जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को उस वक्त हैरानी का सामना करना पड़ा, जब ट्रेन की छत से पानी टपकने लगा। वायरल हो चुके इस वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह ट्रेन के अंदर छत से भारी मात्रा में पानी गिर रहा है, और यात्री अपने सामान व खुद को भीगने से बचा रहे हैं।

यह घटना सिर्फ एक तकनीकी खामी नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे की *'प्रतीकात्मक प्रीमियम'* सोच पर एक बड़ा सवाल है। क्या सिर्फ चमचमाते डिब्बे और हाईस्पीड नाम दे देने से कोई ट्रेन वाकई “प्रीमियम” बन जाती है?

❗ क्या कहती है ये घटना?

* यह घटना उस समय हुई जब ट्रेन तेज बारिश के दौरान चल रही थी।
* पानी सीधे इलेक्ट्रॉनिक पैनल, सीटों और यात्रियों के ऊपर गिर रहा था।
* यात्रियों ने वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिससे यह तेजी से वायरल हो गया।

🔍 मुद्दा सिर्फ पानी का नहीं है...

यह सिर्फ पानी का रिसाव नहीं है, यह *देखभाल की लापरवाही*, *गुणवत्ता की अनदेखी* और *शोबाज़ी की पोल खोलने वाली* तस्वीर है। करोड़ों रुपए खर्च कर बुलेट ट्रेन जैसी कल्पनाएं करने वाले सिस्टम को ये तस्वीर आईना दिखाती है।

💬 लोग कह रहे हैं:

* *"बुलेट ट्रेन छोड़ो, पहले जो है उसे दुरुस्त करो..."*
* *"ये प्रीमियम है या फिर दिल्ली की लोकल ट्रेन?"*

🔧 सवाल उठते हैं:

1. जब वंदे भारत जैसी हाई-एंड ट्रेनों में ऐसी घटनाएं होंगी तो आम यात्री क्या उम्मीद करे?
2. क्या मेंटेनेंस सिर्फ उद्घाटन समारोह तक सीमित है?
3. क्या रेलवे का ध्यान सिर्फ प्रचार पर है, सेवा पर नहीं?

🤔 निष्कर्ष:

वंदे भारत एक्सप्रेस को भारत की "शान" बताने वालों को अब जवाब देना होगा — *शान पानी में क्यों बह रही है?* अगर इतनी बड़ी लापरवाही प्रीमियम ट्रेन में हो सकती है, तो बाकी ट्रेनों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।

🚨 हमारा संदेश:
हम किसी सरकार के विरोधी नहीं, लेकिन *'अंधभक्तों के खिलाफ ज़रूर हैं'*। अगर देश की जनता को वाकई बेहतर सेवा चाहिए, तो सिर्फ प्रचार नहीं, *जवाबदेही* भी जरूरी है।

के साथ जुड़िए — जहाँ हम सच को सामने लाते हैं, बिना डर के।

📌 "OBC पत्रकार" या "राजनीतिक हथियार"? एक और प्रोपेगेंडा की पोल खुली!जब तर्क खत्म हो जाएं, तब जाति को हथियार बना लो — यही...
24/06/2025

📌 "OBC पत्रकार" या "राजनीतिक हथियार"? एक और प्रोपेगेंडा की पोल खुली!

जब तर्क खत्म हो जाएं, तब जाति को हथियार बना लो — यही हो रहा है आज मीडिया और राजनीति में।
हाल ही में एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें दावा किया गया कि 2004 में कांग्रेस और राहुल गांधी ने एक OBC पत्रकार को दूरदर्शन से धक्के मारकर निकाल दिया! और यह दावा कर रहे हैं खुद वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया!

पर सवाल ये है —
क्या 2004 में राहुल गांधी के पास इतनी ताकत थी?
क्या कोई प्रूफ है कि कांग्रेस ने किसी पत्रकार को जाति के आधार पर बाहर किया?
क्या दीपक चौरसिया तब दूरदर्शन में थे?
उत्तर है – नहीं। बिल्कुल नहीं।

👉 यह सिर्फ एक भावनात्मक हथकंडा*
है — OBC कार्ड खेलो, जनता को भटकाओ, और खुद को शहीद दिखाओ।

क्योंकि सच्चाई ये है:
✔ 2004 में राहुल गांधी पहली बार सांसद बने थे।
✔ दूरदर्शन में नियुक्ति या निकासी सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन होती है, किसी सांसद के कहने पर नहीं।
✔ दीपक चौरसिया हमेशा निजी चैनलों से जुड़े रहे हैं – दूरदर्शन से नहीं।

तो अब जब राहुल गांधी ने मीडिया में OBC प्रतिनिधित्व की बात की, तभी कुछ लोग अचानक “OBC पत्रकार” बनकर सामने आने लगे। सवाल पूछना चाहिए —
17 साल से आप कहाँ थे?
अब क्यों याद आया कि आप OBC थे और कांग्रेस ने आपको हटाया?

🔴 जातिवाद से ज्यादा ज़रूरी है तथ्यवाद।
हम किसी नेता, पार्टी या जाति के साथ नहीं — हम केवल **सच्चाई** के साथ हैं।

To Bat saaf hai

1. ✅ **दीपक चौरसिया** 2004 में दूरदर्शन में कार्यरत नहीं थे।
वह उस समय **आज तक** जैसे निजी चैनलों से जुड़े हुए थे।
दूरदर्शन एक सरकारी चैनल है, और पत्रकारों की भर्ती सरकार के अधीन होती है, किसी राजनीतिक पार्टी के निर्देश पर नहीं।

2. ❌ अब तक दीपक चौरसिया ने **किसी आधिकारिक इंटरव्यू** या **पत्रकारीय रिकॉर्ड** में ऐसा दावा नहीं किया है कि **उन्हें राहुल गांधी या कांग्रेस** के कहने पर हटाया गया था।

3. ❌ राहुल गांधी उस समय (2004 में) **सिर्फ एक सांसद बने थे**, न कि किसी सरकारी चैनल के लिए निर्णय लेने वाले।

4. 🔍 वायरल हो रही ये पोस्ट **किसी वीडियो क्लिप** पर आधारित नहीं है, ना ही इसका कोई **प्रामाणिक स्रोत** है। यह एक **राजनीतिक आरोप** जैसा दिख रहा है जिसे **पार्टी विशेष के समर्थन** में प्रचारित किया जा रहा है।

✅ निष्कर्ष:

यह दावा **झूठा, भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित** है। इसका कोई तथ्यात्मक या दस्तावेज़ी आधार नहीं है। ऐसे पोस्ट केवल जनता की भावनाएं भड़काकर **एकतरफा नैरेटिव** फैलाने का प्रयास हैं।

#जातिवाद_की_राजनीति

🛢️ “ईरान ने दुनिया की नब्ज पर हाथ रख दिया है...”❌ या फिर, सोशल मीडिया वालों ने अफवाहों की नब्ज पकड़ ली है?📌 सच क्या है? ...
23/06/2025

🛢️ “ईरान ने दुनिया की नब्ज पर हाथ रख दिया है...”
❌ या फिर, सोशल मीडिया वालों ने अफवाहों की नब्ज पकड़ ली है?

📌 सच क्या है? पढ़ो और समझो:

🌍 1. क्या होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है?

❌ नहीं, बिल्कुल नहीं।

ईरान ने अभी तक जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया है।
सिर्फ एक राजनीतिक बयान आया है – पर टैंकर आज भी वहाँ से निकल रहे हैं।

🌊 2. बाब अल-मंडेब पर ईरान का कंट्रोल?

❌ फिर से झूठ।

हूथियों ने हमले ज़रूर किए हैं, लेकिन पूरा कंट्रोल नहीं लिया।
तेल सप्लाई अब भी जारी है।

🇮🇳 3. भारत की तैयारी कैसी है?

✅ सबसे आगे।

जब बाकी देश शोर मचा रहे थे, भारत पहले ही शांति से तैयारी कर चुका था।

🔄 लेकिन श्रेय किसे? सिर्फ एक सरकार को? नहीं...

📌 यूपीए सरकार (2004–2014):

* **स्ट्रैटेजिक ऑयल रिज़र्व** की नींव रखी गई।
* ONGC Videsh जैसी कंपनियों के जरिए विदेशी तेल ब्लॉक्स में निवेश हुआ।

📌 एनडीए / मोदी सरकार (2014–अब):

* रूस से सस्ते तेल की खरीद के लिए पश्चिमी दबाव को ठुकराया।
* अमेरिका, ब्राज़ील, UAE जैसे 40+ देशों से तेल के विकल्प बनाए।
* रणनीतिक भंडारण को और मज़बूत किया।

> 💬 जहां एक सरकार ने खंभा गाड़ा, वहीं दूसरी ने उस पर LED लाइट लगा दी।
> अब रोशनी किसने दी — ये फैसला जनता का है।

🔥 **The A-Factor कहता है:**

>हम सरकारों के साथ नहीं, काम करने वालों के साथ हैं।
>ना फेक न्यूज़ चाहिए, ना अंधभक्ति।
>सवाल पूछना गुनाह नहीं, ज़रूरत है।

📢 **शेयर करो — ताकि डर नहीं, सच्चाई फैले।**

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि पहली बार इजरायल के खिलाफ जंग में मुस्लि...
23/06/2025

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि पहली बार इजरायल के खिलाफ जंग में मुस्लिम देश ईरान के साथ नहीं खड़े हुए। लेकिन हकीकत में यह "पहली बार" नहीं है — बल्कि यह मध्य पूर्व की **पुरानी और जटिल सच्चाई** है!
"ईरान की बढ़ती ताकत ही बन गई दुश्मन? पहली बार इजरायल के खिलाफ जंग में नहीं उतरे मुस्लिम देश" — आइए पहले इसे **तथ्यों के आधार पर जांचते हैं**,

✅ फैक्ट चेक:

1. क्या मुस्लिम देश पहली बार ईरान के साथ नहीं खड़े हुए?

➡️ सच:यह दावा पूरी तरह से भ्रामक है।

* **सऊदी अरब, UAE, मिस्र, जॉर्डन, बहरीन** जैसे कई अरब देश पहले से ही ईरान के साथ वैचारिक और रणनीतिक दूरी बनाए हुए हैं।
* कई मुस्लिम देश **ईरान को शिया विस्तारवाद का प्रतिनिधि** मानते हैं, जबकि अधिकांश अरब देश **सुन्नी बहुल** हैं।

2. क्या मुस्लिम देश इजरायल के खिलाफ पहले भी एकजुट थे?

➡️ सच: नहीं, अब तक के इतिहास में **पूरे मुस्लिम जगत ने कभी सामूहिक रूप से इजरायल के खिलाफ युद्ध नहीं लड़ा।**

* **1948, 1967 और 1973** के युद्धों में कुछ अरब देशों ने इजरायल से युद्ध लड़ा, लेकिन **हर बार ईरान उस समय तटस्थ या अलग रुख में रहा।**
* हालिया वर्षों में **अब्राहम अकॉर्ड्स** के तहत UAE, बहरीन, मोरक्को और सूडान ने **इजरायल से रिश्ते सामान्य किए** हैं।

3. ईरान की ताकत से मुस्लिम देश डरते हैं?

➡️ आंशिक सत्य:
ईरान की **मिलिशिया नीति**, जैसे हिज़्बुल्लाह (लेबनान), हूथी (यमन), और सीरिया में हस्तक्षेप, कई मुस्लिम देशों को असहज करता है।
**सऊदी अरब और UAE जैसे देश ईरान को एक खतरे के रूप में देखते हैं**, इसलिए उनके लिए ईरान का समर्थन करना जोखिमपूर्ण है।

📰 "ईरान बनाम इजरायल नहीं, असली लड़ाई है ईरान बनाम अरब विश्व?"

"क्या ईरान की बढ़ती ताकत ही उसकी तन्हाई की वजह बन रही है?
क्या मुस्लिम दुनिया सच में इजरायल के खिलाफ एकजुट है या यह सिर्फ एक भावनात्मक भ्रम है?"

ईरान एक शिया बहुल राष्ट्र है और उसका राजनीतिक व धार्मिक दृष्टिकोण अधिकतर सुन्नी अरब देशों से भिन्न है। यही कारण है कि ईरान की नीतियों से सऊदी अरब, UAE जैसे बड़े मुस्लिम देश हमेशा दूरी बनाकर रखते आए हैं। ईरान की मदद से चल रही मिलिशिया और 'पॉवर प्रॉक्सी' रणनीति भी इन देशों के लिए चिंता का विषय है।

💥 अरब देशों का मौन समर्थन:
आज जब ईरान इजरायल के खिलाफ कुछ बोलता है, तो अरब देश चुप्पी साध लेते हैं। क्या ये तटस्थता है या रणनीतिक चुप्पी? असल में इन देशों ने पिछले कुछ सालों में इजरायल के साथ कूटनीतिक रिश्ते भी मजबूत किए हैं — ताकि अमेरिका और पश्चिमी देशों से सहयोग मिलता रहे।

💡 हम भारत में क्यों भावुक होते हैं?
यह भी सोचने का विषय है कि भारत में कुछ लोग बिना पूरे तथ्य समझे ईरान को ‘वीरता’ का प्रतीक मानने लगते हैं। क्या हम ये भूल जाते हैं कि भारत खुद एक **सेकुलर और संतुलित नीति वाला देश** है, जो युद्ध नहीं शांति की बात करता है?

📢 निष्कर्ष:
ईरान की बढ़ती ताकत उसके लिए शान भी है और मुसिबत भी। मुस्लिम देश उसके साथ नहीं हैं, क्योंकि उनके हित और विचारधारा अलग हैं। और भारत में लोगों को यह समझने की जरूरत है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोस्ती धर्म या इमोशन से नहीं, **हित और रणनीति से तय होती है।**

🔴 संदेश:
सोच समझकर राय बनाइए। अफवाहों में ना बहिए।
ईरान या इजरायल की नहीं — हमें भारत की स्थिरता, कूटनीति और शांति की चिंता करनी चाहिए।



#सोच_बदलनी_होगी #तथ्य_के_साथ

जश्न के बीच मौत: किसकी ज़िम्मेदारी?चारों ओर फूल बरस रहे थे...नारे लग रहे थे, “ज़िंदाबाद!”और फिर, अचानक एक चीख ने माहौल क...
22/06/2025

जश्न के बीच मौत: किसकी ज़िम्मेदारी?

चारों ओर फूल बरस रहे थे...
नारे लग रहे थे, “ज़िंदाबाद!”
और फिर, अचानक एक चीख ने माहौल को चीर डाला।

ये तस्वीरें हैं आंध्र प्रदेश के एक चुनावी रैली की, जहाँ Jagan Mohan Reddy के काफिले में शामिल एक गाड़ी ने भीड़ में खड़े एक शख्स को कुचल दिया। जी हां, ये हादसा नहीं — लापरवाही की इंतेहा थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, काफिला जैसे ही भीड़ के बीच से निकला, लोगों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। बेशुमार जोश में सुरक्षा व्यवस्था तार-तार हो गई और तभी एक गाड़ी सीधे उस आदमी पर चढ़ गई जो शायद अपने नेता को एक बार नजदीक से देखने आया था। लेकिन देख क्या पाया? मौत।

वो कौन था?
उस व्यक्ति की पहचान अभी सामने नहीं आई, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उसके घरवाले, जो शायद टीवी पर फूलों की बारिश देख रहे होंगे, अब एक चुपचाप पड़े शव का इंतज़ार कर रहे होंगे।

अब सवाल ये उठता है —

* क्या VIP नेताओं के काफिलों में सुरक्षा केवल नेता की होती है, जनता की नहीं?
* क्या इतना बड़ा जनसंपर्क कार्यक्रम बिना crowd control के किया जा सकता है?
* अगर किसी नेता के स्वागत में कोई मर जाए, तो क्या ये ‘लोकतंत्र’ की जीत है या उसकी शर्मनाक हार?

इस पूरे मामले पर अभी तक न तो CM ऑफिस की कोई संवेदनात्मक प्रतिक्रिया आई है, न किसी जिम्मेदार अधिकारी ने ज़िम्मेदारी ली है।

फूलों की बारिश के बीच कोई जान गवां बैठे — और नेता आगे बढ़ जाए, ये कैसा जश्न है?

The A-Factor पूछता है:
क्या नेता का चेहरा ज़रूरी है या आम आदमी की जान?

#जनताVsVIP

"रेप, हिंसा, आतंकवाद" – ये तीन शब्द अब सिर्फ किसी डिबेट शो की हेडलाइन नहीं, बल्कि अमेरिका की भारत को दी गई लेटेस्ट *ट्रै...
22/06/2025

"रेप, हिंसा, आतंकवाद" – ये तीन शब्द अब सिर्फ किसी डिबेट शो की हेडलाइन नहीं, बल्कि अमेरिका की भारत को दी गई लेटेस्ट *ट्रैवल एडवाइजरी* का सार हैं।

🧨 **"यात्रा नहीं, यथार्थ देखिए!"**
🔦 *The A-Factor की खुली बात*

📍**US State Department ने 16 जून को भारत को लेवल-2 ट्रैवल एडवाइजरी** में डाल दिया।
👉 मतलब: *“भारत जा रहे हो? तो सावधान रहो। महिलाएं अकेली न जाएं। अपराध और आतंकवाद का ख़तरा है।”*
🔗 [US Travel Advisory for India - June 2025 (Source)](https://travel.state.gov/content/travel/en/traveladvisories/traveladvisories/india-travel-advisory.html)

🔴 अब थोड़ा Fact Check कर लें:

📌 NCRB (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) की रिपोर्ट के अनुसार:

* **हर दिन औसतन 88 रेप के केस** दर्ज होते हैं (2022 डेटा)।
* इनमें से 90% मामलों में आरोपी पीड़िता का जानकार होता है।
* अकेले **दिल्ली** को "रेप कैपिटल" कहा गया, जहां 2023 में 1,300+ रेप केस रिपोर्ट हुए।

📌 2024 में देश के 5 बड़े नेताओं पर रेप, महिला उत्पीड़न या POCSO के केस पेंडिंग हैं।
(सूत्र: ADR रिपोर्ट – [Association for Democratic Reforms](https://adrindia.org))

अब बताओ भाई, **जब नेता ही आरोपी हों, तो कानून किसके लिए चलेगा?**

😡 जनता का Blind Mode: ON

जैसे ही ये खबर आई, सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा:

> “ये पश्चिमी प्रोपेगेंडा है, भारत को बदनाम करने की साजिश है।”

अरे भाई,
जब कोई विदेशी महिला भारत आती है और कहती है “मुझे हर गली में stared किया गया”,
तो वो प्रोपेगेंडा नहीं, तुम्हारे समाज का आईना है।

🕯️ मोमबत्ती गैंग की सच्चाई

जब कोई कांड हो जाए —

* “हम शर्मिंदा हैं बेटी, तेरा कातिल ज़िंदा है” की तख्तियां निकलती हैं,
* इंडिया गेट पर इंस्टाग्राम स्टोरीज़ बनती हैं,
* फिर सब अगले दिन IPL, Bigg Boss और Meme Pages में खो जाते हैं।

क्योंकि हमारे यहां दंग रह जाने वाली घटनाएं नहीं, सिर्फ “Breaking News Opportunity” होती हैं।

🎭 व्यंग्य की गोली:

भारत में औरत की इज्ज़त की कीमत इतनी है कि –

“अगर उसने चुपचाप सह लिया तो 'संस्कारी',
और आवाज़ उठाई तो 'राजनीतिक साजिश'।”

💬 The A-Factor का दो टूक सवाल:

अगर कोई विदेशी सरकार हमें चेता रही है,
तो क्या हमें शर्मिंदा होकर सुधार की कोशिश करनी चाहिए या राष्ट्रवाद का झंडा उठाकर चिल्लाना?

क्योंकि झंडे से रेप नहीं रुकते, कानून से रुकते हैं।

🧠 अंत में, The A-Factor की आवाज़:

"सवाल पूछना शुरू करो,
वरना अगली एडवाइजरी में शायद लिखा होगा —
'भारत: Unsafe even for its own daughters.'"

🔗 | | | | **e

📌 Delhi की Venice वाली Truth: बाढ़ में बहती ज़िम्मेदारी और बदलते बyan जब भी बारिश होती है, Delhi डूब जाती है। और हर बार,...
21/06/2025

📌 Delhi की Venice वाली Truth: बाढ़ में बहती ज़िम्मेदारी और बदलते बyan

जब भी बारिश होती है, Delhi डूब जाती है। और हर बार, सिर्फ सड़कें ही नहीं, बल्कि सरकार की credibility भी बह जाती है।

अब फिर वही हालात हैं। Instagram पर एक वायरल पोस्ट में लिखा गया –
**"केजरीवाल Delhi को Venice नहीं बना पाया, देखो अब FEEL आने लगा होगा"**
और इस बार लोग सिर्फ पानी में नहीं, मज़ाक में भी डूब रहे हैं।

लेकिन ये हँसी का मामला नहीं है। दो वायरल क्लिप्स अब सबके सामने हैं –

1. पहला बयान – जब वो CM नहीं थे: *“हम सरकार में आए तो पानी की निकासी और ड्रेनेज सिस्टम सुधार देंगे। हर गली में पाइपलाइन बिछेगी, लोग तैरते नहीं फिरेंगे।”*
2. दूसरा बयान– जब अब वो CM हैं: *“बारिश इतनी तेज़ थी कि कुछ नहीं किया जा सका, ये तो कुदरत का कहर है।”*

❓अब सवाल ये है –

कोई इंसान अपने शब्दों से इतना कैसे पलट सकता है?
क्या कुर्सी मिलने के बाद जनता के मुद्दे अपनी अहमियत खो देते हैं?

🤔 और इससे बड़ा सवाल –

लोग इतने अंधभक्त कैसे हो सकते हैं कि अब सवाल ही नहीं पूछते?
हर साल बारिश में डूबती दिल्ली देख लेते हैं, और फिर भी आंखें बंद कर सरकार के नाम की माला जपते हैं।

📉 जिम्मेदारी किसकी?

* ये शहर अब **administrative failure** का प्रतीक बनता जा रहा है।
* हर साल करोड़ों का बजट निकासी और सफाई के नाम पर उड़ जाता है, लेकिन सड़कें उसी तरह उफनती हैं।
* Drainage सिस्टम सिर्फ कागज़ों में ही रहता है।

💥 जनता कब जागेगी?

हर साल वही हाल, वही बयान, और वही चुप्पी।
अगर जनता सवाल नहीं पूछेगी, तो जवाब कौन देगा?

📌 Note:ये पोस्ट किसी दल विरोध में नहीं, सोच के समर्थन में है।
नेता कोई भी हो, सवाल पूछना जनता का हक और कर्तव्य दोनों है।
**The A-Factor** सवाल पूछेगा, क्यूंकि जब तक सवाल नहीं पूछे जाएंगे, जवाब भी नहीं मिलेगा।

🛫✈️ Plane Hadson ke Baad Sudhar ya Sudhar ke Baad Plane Hadse? – The A-Factor**“हर हादसा एक चेतावनी होता है, लेकिन हम कब...
21/06/2025

🛫✈️ Plane Hadson ke Baad Sudhar ya Sudhar ke Baad Plane Hadse? – The A-Factor

**“हर हादसा एक चेतावनी होता है, लेकिन हम कब सीखते हैं?”**

पिछले कुछ हफ्तों में आपने भी नोट किया होगा — जैसे ही एक बड़ा प्लेन हादसा हुआ, उसके अगले ही दिन से लगातार देश-विदेश से उड़ानों में तकनीकी खराबी, आपात लैंडिंग या इंजन फेल जैसी खबरें आने लगीं।

ये क्या इत्तेफाक है? या फिर हमारी एविएशन व्यवस्था में छिपी लापरवाहियों की परतें अब सामने आने लगी हैं?

✈️ तथ्य जो चिंता पैदा करते हैं:

* भारत में 2024-25 में औसतन हर हफ्ते 1 से 2 उड़ानों को तकनीकी कारणों से डायवर्ट या कैंसल किया गया।
* अमेरिका और यूरोप में बड़े हादसों के बाद FAA (Federal Aviation Authority) और EASA (European Aviation Safety Agency) तुरंत **mass inspection** और audits शुरू करते हैं।
* भारत में 2024 में DGCA ने लगभग **40+ फ्लाइट्स की जांचें** केवल तब शुरू कीं जब मीडिया ने शोर मचाया।

🔍 सवाल ये है कि क्या हम हादसे का इंतज़ार करते हैं?

भारत जैसे देश में, जहां करोड़ों लोग पहली बार हवाई यात्रा कर रहे हैं, वहां भरोसे का मतलब सिर्फ टिकट नहीं, जान की गारंटी है। लेकिन क्या हमारी व्यवस्था उतनी गंभीर है?

हमारे पास DGCA है, हमारे पास SOPs हैं, लेकिन क्या उसका *ज़मीन पर क्रियान्वयन* उतना ही मजबूत है?

अगर एक घटना के बाद अचानक इतनी गड़बड़ियाँ सामने आने लगें, तो इसका मतलब है कि वो खराबियाँ पहले से थीं — बस देखा नहीं गया, रोका नहीं गया, या फिर नजरअंदाज किया गया।

🧪 Maintenance और Safety Checks – हकीकत क्या है?

* कई एयरलाइंस cost-cutting के चलते **Scheduled Maintenance** में देरी करती हैं।
* पुराने प्लेन्स (जिनका उड़ान लाइफ 20-25 साल का होता है) आज भी उड़ रहे हैं, जिनके पार्ट्स की supply भी पुरानी हो चुकी है।
* **Crew training** पर कम ध्यान, **ground inspections** में लापरवाही, और **shortage of skilled engineers** — ये भी वजहें हैं।

🚨तो सवाल सीधा है:

क्या हमें हर बार किसी बड़ी त्रासदी का इंतज़ार करना पड़ेगा ताकि सरकार या एजेंसी जागे?

क्या फ्लाइट टिकट बेचने से पहले जान की गारंटी नहीं होनी चाहिए?

कहीं ऐसा तो नहीं कि हम टेक्नोलॉजी से तेज़ हो गए, लेकिन जिम्मेदारी से अभी भी पीछे हैं?

✊ **The A-Factor की राय:**

जो भी सिस्टम हादसे के बाद जागता है, वो सिस्टम नहीं – सिर्फ तमाशा है।

हमें चाहिए:

* प्री-इंसिडेंट कार्रवाई की आदत
* Third-party neutral audits
* ट्रांसपेरेंट रिपोर्टिंग — हर छोटी खराबी भी पब्लिक डोमेन में हो
* यात्रियों को अधिकार — किसी भी तकनीकी fault के बारे में जानकारी पाने का हक

⛔ अब वक्त है कि हर एजेंसी, एयरलाइन और हम सब मिलकर ये तय करें
हवाई सफर सिर्फ तेज़ और सस्ता नहीं, बल्कि सबसे सुरक्षित हो।

🧠 आप क्या सोचते हैं? क्या हादसे के बाद हरकत में आना हमारी आदत बन गई है?
**अपने विचार कमेंट में ज़रूर बताएं।**

🧠 "बुद्धि का बुरादा और सस्ते तर्क: श्री सम्पंगी श्रीनिवास राव का ज्ञानवापी अभियान"कुछ लोग होते हैं जो तथ्य नहीं पढ़ते, ब...
19/06/2025

🧠 "बुद्धि का बुरादा और सस्ते तर्क: श्री सम्पंगी श्रीनिवास राव का ज्ञानवापी अभियान"

कुछ लोग होते हैं जो तथ्य नहीं पढ़ते, बस **comment box** में जन्म लेते हैं।

ऐसे ही हैं हमारे *ज्ञानदीप*, *विवेचनाचार्य*, और *फैक्ट गुरु* — श्री सम्पंगी श्रीनिवास राव जी।

इनका हाल ये है कि:

🗣️ **"बालक बुद्धि"** बोलते हुए ये खुद *बालक बकवास* का प्रमाण बन चुके हैं।
📣 और जब आप इनसे पूछिए — "PIB, EC या MEA ने क्या कहा?"
तो इनका जवाब आता है — *"पूनावाला ने बोला है ग्रुप में, देख लो..."

वाह साहब,
अब देश में नीति नहीं, WhatsApp ग्रुप डिस्कशन से संविधान तय होगा?
और प्रवक्ताओं की राय अब PIB से ऊपर मानी जाएगी?

🧾 तथ्यों की तलाश या तानों की तलाश?

जब हमने सवाल उठाया कि वीडियो में दिखाया गया नक़्शा असल में **Pakistan की स्टॉक फुटेज** है,
तो श्रीमान ने कहा —
"स्क्रीनशॉट गलत है, तुम साबित करो!"

अरे भाई,
सवाल हमने उठाया, तथ्य भी रखे, लिंक भी दिए —
आप क्या लेकर आए? सिर्फ ताना, और 'बड़े ज्ञानी' का तमगा?**

🔍 आलोचना ठीक है, लेकिन आधार भी हो!

Fact Check की बातें करने वाले साहब खुद किसी एक official link का नाम तक नहीं ले पाए,
लेकिन ego इतना भारी कि *The A-Factor* को 'बालक बुद्धि' कहते नहीं थके।

हमारे हिसाब से इस देश में हर तर्क का जवाब “बालक बुद्धि” और “group में डाला है” बन जाए —
तो फिर लोकतंत्र की ज़रूरत ही क्या है?

🤷 एक छोटा सवाल श्री सम्पंगी जी से:

आपके पास इतने 'हीरो' sources हैं,
तो कभी PIB की site खोली?
MEA का बयान पढ़ा?
या बस ट्रोलिंग ही ultimate logic है?

🔚 निष्कर्ष:

*The A-Factor* का मक़सद कभी किसी विचारधारा को गाली देना नहीं —
लेकिन जब कोई **जनता को गुमराह करने वाले भ्रामक पोस्ट्स को सच की तरह पेश करता है, और तथ्य मांगने वालों को 'बुद्धिहीन' कहता है,**
तो जवाब देना ज़रूरी हो जाता है।

🙏 श्री सम्पंगी जी,
हम *विमर्श* में विश्वास रखते हैं —
आप चाहें तो ज्ञानवापी की बजाय ज्ञानवर्धन की दिशा में बढ़ें।

बाकी, Group wali पोस्ट से लोकतंत्र नहीं चलता —
तथ्य दिखाइए, भाषा नहीं।

💬 अगर आपको भी ऐसे ज्ञानगुरुओं से मुठभेड़ हुई हो, तो कमेंट में "ज्ञान की जय हो 🙏" ज़रूर लिखिए।

📌 नोट:

यह लेख सिर्फ एक **व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया** है, किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाना हमारा उद्देश्य नहीं है।

*The A-Factor* का मकसद सिर्फ यही है —
कि लोग आंख मूंदकर किसी पार्टी, विचार या व्यक्ति का समर्थन न करें,
बल्कि **सवाल करें, सोचें, और सच को खोजें।**

> हमारा मत है:
कोई भी पार्टी, चाहे वो कांग्रेस हो या भाजपा — सवाल सब से होने चाहिए।

हम चाहते हैं कि **सोचने की आदत, तथ्यों की तलाश और लोकतांत्रिक चर्चा** आगे बढ़े —
ताकि आने वाली पीढ़ियाँ सिर्फ नारों और ट्रोल्स से नहीं,
बल्कि **ज्ञान और विवेक** से देश का भविष्य तय करें।

🙏 तर्क करें, द्वेष नहीं।
सोचें, समझें, और सवाल करना न छोड़ें।

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**🎉 Happy Birthday Rahul Gandhi ! 🇮🇳**"जनता का नेता हो या विपक्ष का चेहरा – एक इंसान सबसे पहले इंसान होता है।"आज श्री रा...
19/06/2025

**🎉 Happy Birthday Rahul Gandhi ! 🇮🇳**

"जनता का नेता हो या विपक्ष का चेहरा – एक इंसान सबसे पहले इंसान होता है।"
आज श्री राहुल गांधी जी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं। हम उम्मीद करते हैं कि वे स्वस्थ रहें, सक्रिय रहें और देश की लोकतांत्रिक आवाज़ को मजबूती से उठाते रहें।

**Note:**
इसे राजनीति से न जोड़ें – ये एक व्यक्तिगत शुभकामना है, न कि पक्ष-विपक्ष की चर्चा। इंसानियत सबसे ऊपर होती है।

🟥 फर्जी नारों और नक्शों का बाज़ार – आज नहीं तो कल ये जहर सबको डसेगा🔍 *“सोचिए, अगर कोई गलती जानबूझ कर की जाए, तो वो गलती ...
18/06/2025

🟥 फर्जी नारों और नक्शों का बाज़ार – आज नहीं तो कल ये जहर सबको डसेगा
🔍 *“सोचिए, अगर कोई गलती जानबूझ कर की जाए, तो वो गलती नहीं, मंशा बन जाती है।”*

हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट ने फिर से देश को दो धड़ों में बाँटने की कोशिश की — *जिसमें दावा किया गया कि कांग्रेस ने अपने आधिकारिक X (Twitter) हैंडल से पाकिस्तान का नक्शा शेयर किया और उसमें भारत के POK को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया।*

👁‍🗨 लेकिन जब हमने सच्चाई की परतें खंगालीं, तो कुछ और ही सामने आया:

✅ फैक्ट चेक क्या कहता है?

1. वायरल हो रही पोस्ट एक वीडियो क्लिप का स्क्रीनशॉट है, जिसे **कांग्रेस के नाम पर एडिट** करके फैलाया गया है।
2. वीडियो में **नक्शा किसी पाकिस्तानी मीडिया चैनल** से लिया गया प्रतीत होता है, जिसका इस्तेमाल **आलोचना के तौर पर किया गया हो सकता है**, न कि समर्थन के रूप में।
3. जिस अकाउंट को टैग किया गया है, उसका **ऐसा कोई वीडियो फिलहाल X पर मौजूद नहीं है**, और ना ही कोई आधिकारिक पुष्टि है कि ये पोस्ट वाकई कांग्रेस द्वारा की गई थी।
4. BJP के प्रवक्ता अमित मालवीय द्वारा शेयर की गई पोस्ट भी **कंटेक्स्ट से काटकर** शेयर की गई है — जिससे भ्रम फैलाना आसान हो जाए।

🚫 सोचिए, ये गलती नहीं – साज़िश भी हो सकती है!

आज सोशल मीडिया के ज़रिए किसी भी व्यक्ति या पार्टी की छवि को *पल भर में तबाह* किया जा सकता है। और अफ़सोस की बात ये है कि **लाखों लोग बिना सत्यापन के ऐसी बातों को शेयर कर देते हैं**, जिससे देश में नफरत और भ्रम का माहौल बनता है।

🔥 हम क्यों कहें – “ये सब कल के लिए खतरा है”?

🔹 क्योंकि जब आज आप दूसरों को गलत साबित करने के लिए झूठ फैलाते हैं, तो कल कोई यही झूठ आपके खिलाफ इस्तेमाल करेगा।
🔹 क्योंकि ये देश सिर्फ BJP या Congress का नहीं – ये **आपका और हमारा भी है।**
🔹 और अगर हम सच से ज़्यादा अफवाहों पर यकीन करने लगे, तो **सिस्टम नहीं, हम खुद बर्बादी की ओर जा रहे हैं।**

✋अब वक्त है सोचने का, झूठ फैलाने का नहीं।

**जाँच करें, समझें, फिर साझा करें।**
क्योंकि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत *सत्य और विवेक* है, न कि *वायरल हेडलाइन*।

🔖 आपकी राय क्या है? क्या ऐसी झूठी खबरों के खिलाफ कोई सख्त कानून होना चाहिए?
कमेंट करें, शेयर करें — ताकि सच ज़िंदा रहे।

\ #सोच\_बदलो\_देश\_बदलेगा

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