Travrist Madhur

Website Contact the business

Travrist Madhur Follow us for these 3 super things :
- Low cost travel in India & abroad
- Travel tips and stories
- Funny couple videos & Travel videos

11/10/2026

कभी तो इशारे समझ जाओ😭

Mnemonic: क्या आप इस शब्द को पढ़ पाए? 🤪🤪बोले तो इसका मतलब होता है एक बड़े से वाक्य या कॉन्सेप्ट या बहुत सारे नामों को शर...
04/10/2026

Mnemonic: क्या आप इस शब्द को पढ़ पाए? 🤪🤪
बोले तो इसका मतलब होता है एक बड़े से वाक्य या कॉन्सेप्ट या बहुत सारे नामों को शर्ट फॉर्म में लिखना या किसी भी चीज़ के नामों को एक वाक्य में बदल देना।

जैसे मेरे विद्यार्थियों को पृथ्वी की सातों मुख्य प्लेट्स बोले तो कांटिनेंटल और ओशियनिक प्लेट के नाम याद करने होते हैं , तो उसका आसान तरीका है -

Antarctic Plate
South American Plate
Indo- Australian Plate
African Plate
North American Plate
Pacific Plate
Europian Plate

इनका शॉर्ट फॉर्म बनता है: ASIAN PE
जैसे गूगल पे, फोन पे, वैसे यह आराम से याद रखने के लिए एशियन पे,
अब बच्चा जीवन में कभी इन सातों प्लेट्स के नाम नहीं भूलेगा।

इसी साल मई में एक ट्रेनिंग के लिए में चंडीगढ़ गया था। वहां हमने काफी सारे सामाजिक अध्ययन के Mnemonic बनाये और उनको कम्प्लाइल किया। यह शॉर्ट कट बच्चों और बड़ो सब के लिए बहुत काम के होते है।

जैसे बचपन में हमे हमारे ग्रहो के नाम एक लाइन से याद करने के लिए एक सेंटेंस याद करवाया जाता था,, शायद आपने भी इसे पढ़ा हो-

My Very Educated Mother Just Served Us Nine pizza:

Mercury
Venus
Earth
Mars
Jupiter
Saturn
Uranus
Neptune
Pluto

हालाँकि अब आठ ही प्लेनेट माने जाते है। मुझे आज भी यह लाइन याद है और इसके द्वारा मुझे सभी नौ प्लेनेट का सीक्वेंस भी याद रहता है।
45 बच्चों के answer sheet में से केवल एक बच्चे ने ही यह एशियन पे वाला कॉन्सेप्ट लिखा है। हालांकि इसकी जरूरत आंसर में नहीं थी परंतु उसने अपने आंसर को थोड़ा और स्ट्रांग करने के लिए इसका सहारा लिया है।

क्या आपको भी कुछ ऐसे Mnemonic याद है, और यदि हाँ तो ज़रा कमेंट में लिख दीजिए, मेरे विद्यार्थियों की मदद हो जाएगी🙏 मैं उन्हें कुछ और आपके बताए हुए Mnemonic लिखवा दूँगा।

29/09/2026

जीवन से सुकून ग़ायब है😩

22/09/2026

क्या ही कहूँ अब😖

अभी कुछ दिन पहले मै और नेहा पुष्कर गए थे। वहाँ से हम गोरम घाट चले गए और  वहाँ से वापिस आते समय हम एक रात जयपुर रुक गए। ज...
18/09/2026

अभी कुछ दिन पहले मै और नेहा पुष्कर गए थे। वहाँ से हम गोरम घाट चले गए और वहाँ से वापिस आते समय हम एक रात जयपुर रुक गए। जयपुर से दिल्ली के रस्ते में भानगढ़ भी आ जाता है,, यदि आप दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस से वापिस आते हो,, थोड़ा ऑफ रूट जाना होता है..तो हम लोग भानगढ़ का किला देखने भी चले गए।

हम जब भी किसी ऐसी क़िले विले टाइप की जगह पर जाते है तो गाइड अवश्य लेते है तो एक भाई जी को हमने साथ ले लिया। अगस्त की दोपहर में बारिश के बाद का खुला मौसम यानी आँखे चमका देने वाली धूप और भयंकर ह्यूमिडिटी।🤪

गाइड भाई ने एक बरगद के पेड़ के नीचे खड़ा करके पूरी कहानी सुनानी शुरू कर दी। अब आगे की कहानी गाइड की ज़ुबानी है-

“आप लोगो ने भानगढ़ के किले की कहानियाँ सुनी होंगी। जब से यह किला भूतिया हुआ है तब से यहाँ का पर्यटन सातवें आसमान पर पहुँच गया है। वरना एक लम्बे समय तक यहाँ कोई नहीं आया करता था।
लोकल लोग किसी ऊपरी हवा की बात कई दशकों से करते आ रहे है इसलिए कोई भी रात को अंदर नहीं जाता। लेकिन आपको डरने की जरूरत नहीं है। यहाँ ऐसा कुछ नहीं है। सब मन का खेल है। आप मानोगे तो यहाँ आपको भूत मिल जाएगा और नहीं मानोगे तो आपको कुछ नहीं महसूस होगा।
बहुत साल पहले यहाँ सलमान और शाहरुख की प्रसिद्ध फिल्म करण अर्जुन की शूटिंग हुई थी तब ममता कुलकर्णी पर भी किसी ऊपरी हवा का साया आ गया था। वो मूवी क्रू और डायरेक्टर से लड़ने लगी थीं।( गाइड के अनुसार)
गाइड भाई आगे बताते है- “आपको बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। यहाँ कोई भूत बाधा नहीं है। अब देखिए आपकी मैडम ने बाल खोले हुए है,, उनको कुछ नहीं हो रहा। वो मानती है यहाँ कुछ नहीं है। वहीं यदि यहाँ की कोई लोकल महिला या लड़की दिनभर अपने बाल खुले रखे तो शाम तक उसपे ऊपरी हवा का असर होने लगता है। क्योंकि वो ऐसा मानती है, उनका मनोविज्ञान ऐसा हो गया है।।”😳

इसके अलावा उन्होंने एक बात और बताई।
गौरव तिवारी भारत के एक प्रसिद्ध पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर और 'इंडियन पैरानॉर्मल सोसाइटी' के संस्थापक थे। वो और शायद उनकी टीम भानगढ़ के किले में अपनी इनवेस्टिगेशन करने आई थी। यहाँ से जाने के बाद जुलाई 2016 में, दिल्ली (जनकपुरी) स्थित अपने घर के बाथरूम में वह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए थे। हालाँकि इन दोनों घटनाओं के बीच 4 साल का अंतर था। गाइड भाई बोले इस केस ने भानगढ़ को और लाइम लाइट में लाकर खड़ा कर दिया।

भाई ने बहुत सारी कहानियाँ बताई जो इस भानगढ़ के किले से जुड़ी हुई थीं ।। उनके अनुसार वहाँ कुछ नहीं है। सब मन का खेल है। उनकी यहीं बात मानकर मैं किले के बाहर अंदर तक घूम आया। मुझे कुछ महसूस नहीं हुआ। खूब फोटो भी लिए।
उन्होंने बताया - लोगो को यहाँ रात को बहुत सारी आवाजें सुनाई देती है। वो सब आवाज किले के पीछे वाले जंगल से आती हैं । कई तरह के जानवर यहाँ है।

अगले दिन जब स्कूल वापिस आया तो जयपुर एक साथी अध्यापक से बात होने लगी। उन्होंने बोला कल आपका भानगढ़ का स्टेटस देखा था ।।
फिर उन्होंने बताया कि जब वो कॉलेज में थे तब उनका एक कैंप भानगढ़ के किले में लगा था। सभी लड़के थे और पूरे दिन भानगढ़ के किले में ही रहते थे। लेकिन रात को मुख्य द्वार पर बने हनुमान मंदिर के प्रांगण में ही सोते थे। रात को अंदर जाने के अनुमति नहीं थी। यह वो दौर था जब नोकिया का 6600 कैमरा वाला मोबाइल आया था। उनके साथ के एक जयपुर के लड़के ने एक बेवकूफी कर दी। वो रात को मोबाइल लेकर अंदर शूट करने चला गया। अगली सुबह वो लड़का किले के मैदान में बेहोश मिला और उसके बाद वो अपनी मानसिक अवस्था खो बैठा। सर के अनुसार वो पढ़ाई में अच्छा लड़का था परंतु उस रात के बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।

मैंने जब यह कहानी सुनी तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैंने उनसे पूछा भी ये सब आपने अपनी आंखों से देख था ???
उन्होंने कहा - हाँ भाई, मैं भी था उस कैम्प में ।।
उसी पल मुझे वो गाइड याद आया जो ऐसे बात कर रहा था जैसे हम किसी सामान्य पार्क में घूम रहे हो।🥶

खैर,, एक तथ्य यह भी है कि आजतक भानगढ़ के बारे में बोली गई किसी भी अप्रिय घटना का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है।। परंतु लोग दोनों ही पहलुओं पर यकीन करते हैं ।

लेकिन मुझे एक ही बात पर यकीन है-
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपिस तिहुं लोक उजागर।। 🙏🙏😊

16/09/2026

आज तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं है😂

अयोध्या जी में दर्शन करने के बाद बनारस के लिए निकल गए थे। सुबह 8 बजे अयोध्या जी से निकले और साढ़े बारह बजे बनारस के होटल...
16/09/2026

अयोध्या जी में दर्शन करने के बाद बनारस के लिए निकल गए थे।
सुबह 8 बजे अयोध्या जी से निकले और साढ़े बारह बजे बनारस के होटल में चेक इन कर लिया था। होटल मैने थोड़ा बाहर लिया था ताकि कार को आराम से होटल तक लेकर जाया जा सके। शनिवार और इतवार को काशी में मंदिर के आस पास सब नो एंट्री हो जाता है इसलिए होटल तक पहुँचने में काफ़ी बार इधर उधर घूमना पड़ा।
खैर,, थोड़ा रेस्ट किया और हम बाबा विश्वनाथ जी के दर्शन के लिए निकल गए। उम्मीद थी हमेशा की तरह लंबी लाइन मिलेगी कई घंटे इंतजार करना पड़ेगा लेकिन आज कहानी कुछ अलग थी। कोई लाइन नहीं, कोई भीड़ नहीं, दोपहर के खाने का समय था, शायद सभी तीर्थ यात्री खाना का रहे होंगे। मंदिर में भी कोई भीड़ नहीं थी। हम सीधे गेट नंबर 4 से मंदिर प्रांगण में घुसे और 25 मिनट बाद दर्शन करके बाहर भी आ गए।
मैंने मम्मी पापा को बोला भी “आप दोनों बहुत लकी हो जो इतनी जल्दी कल अयोध्या जी में भी दर्शन हो गए थे और आज यहाँ भी इतनी जल्दी दर्शन हो गए।।”
अयोध्या जी मंदिर हम रात 8 बजे गए थे और सीधे राम लला के सामने जाकर रुके, क्योंकि वहाँ भी कोई भीड़ नहीं थी।
पापा को चलने में थोड़ी दिक्कत हो जाती है इस कारण उनको इधर उधर खाने नहीं ले जा सकता था। ठीक दोपहर का समय था इसलिए हम होटल चले गए।
अच्छा यहाँ एक समस्या है। काशी में ई रिक्शा की भरमार है लेकिन ये मंदिर तक नहीं जाते। इसलिए आपको काफी पैदल चलना पड़ सकता है। ऐसे में यहाँ काम आती है बाइक, मंदिर के आस पास आपको कई बाइक वाले मिल जायेंगे जो आपको बिल्कुल मंदिर के गेट पर उतार देते हैं । मंदिर आते समय इस बात का ज्ञान नहीं था लेकिन वापिसी में मंदिर के सामने से बाइक हायर की और हम सब होटल पहुँच गए।
उन्हीं बाइक वालों को शाम को आरती के समय आने को बोल दिया।
मम्मी पापा ने होटल में रेस्ट किया और मैं छोटे भाई को लेकर BHU का समोसा और चाय का आनंद लेने चला गया। मंदिर दर्शन के बाद उसको राम भंडार की कचौड़ी खिलानी थी परंतु गर्मी की वजह से हम वापिस आ गए। मैंने उसे बोला भी कि लंका के पास वाली कचौड़ी खिला दूँगा लेकिन BHU में देरी हो गई और हम जल्दी होटल वापिस आ गए क्योंकि आरती के लिए जाना था।
होटल पर बाइक वाले समय पर आ गए और हम चारों दशश्वमेध घाट पर पहुँच गए, खूब भीड़ थी। बाढ़ के कारण गंगा मैया का स्तर ऊपर तक आया हुआ था, इसलिए आरती ऊपर छत पर हो रही थी। बाइक वाले ने पहले ही बताया था लेकिन मैंने कहा एक बार इस मुख्य घाट पर तो जाया ही जाए। घरवाले भी देख लें कि यहाँ की आरती कैसी होती है।
जब यहाँ बात नहीं बनी तो हम लोग नमो घाट की आरती देखने चले गए। आधी आरती के समय तक वहाँ पहुँच गए और वहाँ अच्छे से आरती देखी । भीड़ यहाँ भी बहुत थी परंतु यह घाट बिल्कुल साफ सुथरा है और सब अच्छे से मैनेज कर रखा है ।।
आरती के बाद हम लोग बाइक से भैरव बाबा के दर्शन करने आ गए। शाम की आरती का समय हो गया था इस कारण से यहाँ भीड़ हो गई थी। दर्शन में थोड़ी दिक्कत हुई, इसके साथ ही कुछ तीर्थ यात्रियों के मंदिर के पंडों से हाथापाई भी हो गई। ऐसा लगा जैसे भगदड़ सी मच जाएगी परंतु कुछ समय बाद सब शांत हो गया।
मंदिर प्रांगण में इतनी हिंसा देख लगा कि
-लोग क्या ही तो दर्शन करने आए हैं??
-और क्या ही मंदिर प्रशासन के लोगो का व्यवहार लोगों के साथ है?
खैर,, उस दौरान मैंने मम्मी पापा को अपने पीछे दीवार के साथ कर लिया था ताकि उनको कोई परेशानी ना हो। एक यहाँ का अनुभव हटा दे तो सभी जगह बहुत सुगम दर्शन हुए।
इसके बाद कुछ जगह का खाना, खाना बच गया था…वो खाया ।

पापा का इस यात्रा पर आने से पहले ही कॉन्सेप्ट क्लियर था। मुझे केवल राम मंदिर, हनुमान गढ़ी, बाबा विश्वनाथ और गंगा घाट के दर्शन करने है। इसके अलावा मेरी कोई इच्छा नहीं है। हुआ भी यही। हमने और कहीं कुछ एक्सप्लोर नहीं किया।

मैं तीसरी बार काशी गया था, और दूसरी बार अयोध्या जी। मेरे पास और बहुत ऑप्शंस थे परंतु पापा इतने में ही संतुष्ट थे।
अगले दिन सुबह 6 बजे कार बनारस से चली और शाम को साढ़े 5 बजे गाजियाबाद घर पर आकर रुकी।

बेहतरीन सड़क व्यवस्था के लिए जो लोग भी जिम्मेदार है उनका तहेदिल से धन्यवाद क्योंकि बनारस से साढ़े ग्यारह घंटे में ग़ाज़ियाबाद आने के लिए आपको जबरदस्त सड़क की जरूरत तो होगी ही।।

कुल मिलाकर एक अच्छी तीर्थयात्रा रही। उम्मीद के विपरीत दोनों मुख्य मंदिरों में भीड़ नहीं मिली।

12/09/2026

Try at your own risk ⛔️😝

गाजियाबाद से अयोध्या जी के रस्ते में सीतापुर के पास भाई सूरज मिश्रा  जी के साथ एक बहुत छोटी परंतु यादगार मुलाकात.....
11/09/2026

गाजियाबाद से अयोध्या जी के रस्ते में सीतापुर के पास भाई सूरज मिश्रा जी के साथ एक बहुत छोटी परंतु यादगार मुलाकात.....

हिमालय का एक ट्रेक आपके जीवन में कितना बदलाव ला सकता है???इसका अंदाजा आपको उस एक ट्रेक के बाद ही पता चलता है और यदि ट्रे...
08/09/2026

हिमालय का एक ट्रेक आपके जीवन में कितना बदलाव ला सकता है???
इसका अंदाजा आपको उस एक ट्रेक के बाद ही पता चलता है और यदि ट्रेक एवरेस्ट बेस कैंप का हो तो बात ही अलग है। हालाँकि मेरा फोकस यहां एवरेस्ट बेस कैंप नहीं है।

मुझे केवल हिमालय के ट्रेक की बात करनी है।

नीचे जो फोटो आप देख रहे है इन दोनों फोटों में केवल 14 दिनों का अंतर है।
-पहला फोटो 15 मई का है ट्रेक की शुरुवात में
-दूसरा फोटो 26 मई का है ट्रेक के अंतिम दिन
दोनों फोटो के समय और स्थान एक ही है। लुकला एयरपोर्ट, सोलुखूंबु, नेपाल।

हिमालय के सुदूर हिस्सों में किए जाने वाले ट्रेक अक्सर दो अलग लोगों की कहानी कहते हैं । एक वो इंसान जो उस ट्रेक को शुरू करता है और दूसरा वो इंसान जो उस ट्रेक को पूरा करके वापिस लौटता है। ये दोनों इंसान एक दूसरे से बिल्कुल अलग होते है और जिन लोगों ने हिमालय के 10 दिन से ऊपर के ट्रेक किए है शायद वो इस बात को मानेंगे भी।

सुदूर हिमालय के ट्रेक आपको एक ऐसी आध्यात्मिक यात्रा पर लेकर जाते है जहां आपका अपने आप से मिलन होता है। यह ट्रेक आपको कुछ ऐसे पल देते है जहां केवल आप और केवल आप ही होते हो। वहां आप अपने अंदर की आवाज को बहुत आराम से सुन सकते हो।

ऐसे ट्रेक के दौरान हिमालय की ऊंची ऊंची चोटियां आपको एहसास दिलाती है कि आप कितने छोटे हो? लेकिन जब आप अपने ट्रेक को पूरा करके वापिस लौट रहे होते हो तब वही गगनचुंबी चोटियाँ आपके सामने नतमस्तक होकर आपको रास्ता दे रही होती है। उस पल आपको एहसास होता है कि आप कितने बड़े इंसान बनकर वापिस जा रहे हो।

हालांकि मैने बहुत ज्यादा हिमालयन ट्रेक तो नहीं किए है लेकिन मेरी शुरुआत ही गौमुख और तपोवन के ट्रेक से हुई थी।
उस ट्रेक ने भी मेरे अंदर बहुत बदलाव किए थे।

शारीरिक बदलाव तो बाहरी है, वो सबको दिखते है जैसा कि नीचे वाले फोटो में आपको दिख रहे होंगे, परंतु मानसिक, आध्यात्मिक परिवर्तनों के साक्षी केवल आप ही बन पाते हो।

चलो फिर निकल जाओ किसी ऐसे ही ट्रेक पर और मिलकर आओ अपने आप से।।।।

क्या आपकी भी कोई ऐसी कहानी है?


नीचे दी गई फोटो में 3 अंतर पहचानने हैं🤪🤪

Address

DELHI
Tezpur

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Travrist Madhur posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Travrist Madhur:

Shortcuts

Share