16/09/2026
अयोध्या जी में दर्शन करने के बाद बनारस के लिए निकल गए थे।
सुबह 8 बजे अयोध्या जी से निकले और साढ़े बारह बजे बनारस के होटल में चेक इन कर लिया था। होटल मैने थोड़ा बाहर लिया था ताकि कार को आराम से होटल तक लेकर जाया जा सके। शनिवार और इतवार को काशी में मंदिर के आस पास सब नो एंट्री हो जाता है इसलिए होटल तक पहुँचने में काफ़ी बार इधर उधर घूमना पड़ा।
खैर,, थोड़ा रेस्ट किया और हम बाबा विश्वनाथ जी के दर्शन के लिए निकल गए। उम्मीद थी हमेशा की तरह लंबी लाइन मिलेगी कई घंटे इंतजार करना पड़ेगा लेकिन आज कहानी कुछ अलग थी। कोई लाइन नहीं, कोई भीड़ नहीं, दोपहर के खाने का समय था, शायद सभी तीर्थ यात्री खाना का रहे होंगे। मंदिर में भी कोई भीड़ नहीं थी। हम सीधे गेट नंबर 4 से मंदिर प्रांगण में घुसे और 25 मिनट बाद दर्शन करके बाहर भी आ गए।
मैंने मम्मी पापा को बोला भी “आप दोनों बहुत लकी हो जो इतनी जल्दी कल अयोध्या जी में भी दर्शन हो गए थे और आज यहाँ भी इतनी जल्दी दर्शन हो गए।।”
अयोध्या जी मंदिर हम रात 8 बजे गए थे और सीधे राम लला के सामने जाकर रुके, क्योंकि वहाँ भी कोई भीड़ नहीं थी।
पापा को चलने में थोड़ी दिक्कत हो जाती है इस कारण उनको इधर उधर खाने नहीं ले जा सकता था। ठीक दोपहर का समय था इसलिए हम होटल चले गए।
अच्छा यहाँ एक समस्या है। काशी में ई रिक्शा की भरमार है लेकिन ये मंदिर तक नहीं जाते। इसलिए आपको काफी पैदल चलना पड़ सकता है। ऐसे में यहाँ काम आती है बाइक, मंदिर के आस पास आपको कई बाइक वाले मिल जायेंगे जो आपको बिल्कुल मंदिर के गेट पर उतार देते हैं । मंदिर आते समय इस बात का ज्ञान नहीं था लेकिन वापिसी में मंदिर के सामने से बाइक हायर की और हम सब होटल पहुँच गए।
उन्हीं बाइक वालों को शाम को आरती के समय आने को बोल दिया।
मम्मी पापा ने होटल में रेस्ट किया और मैं छोटे भाई को लेकर BHU का समोसा और चाय का आनंद लेने चला गया। मंदिर दर्शन के बाद उसको राम भंडार की कचौड़ी खिलानी थी परंतु गर्मी की वजह से हम वापिस आ गए। मैंने उसे बोला भी कि लंका के पास वाली कचौड़ी खिला दूँगा लेकिन BHU में देरी हो गई और हम जल्दी होटल वापिस आ गए क्योंकि आरती के लिए जाना था।
होटल पर बाइक वाले समय पर आ गए और हम चारों दशश्वमेध घाट पर पहुँच गए, खूब भीड़ थी। बाढ़ के कारण गंगा मैया का स्तर ऊपर तक आया हुआ था, इसलिए आरती ऊपर छत पर हो रही थी। बाइक वाले ने पहले ही बताया था लेकिन मैंने कहा एक बार इस मुख्य घाट पर तो जाया ही जाए। घरवाले भी देख लें कि यहाँ की आरती कैसी होती है।
जब यहाँ बात नहीं बनी तो हम लोग नमो घाट की आरती देखने चले गए। आधी आरती के समय तक वहाँ पहुँच गए और वहाँ अच्छे से आरती देखी । भीड़ यहाँ भी बहुत थी परंतु यह घाट बिल्कुल साफ सुथरा है और सब अच्छे से मैनेज कर रखा है ।।
आरती के बाद हम लोग बाइक से भैरव बाबा के दर्शन करने आ गए। शाम की आरती का समय हो गया था इस कारण से यहाँ भीड़ हो गई थी। दर्शन में थोड़ी दिक्कत हुई, इसके साथ ही कुछ तीर्थ यात्रियों के मंदिर के पंडों से हाथापाई भी हो गई। ऐसा लगा जैसे भगदड़ सी मच जाएगी परंतु कुछ समय बाद सब शांत हो गया।
मंदिर प्रांगण में इतनी हिंसा देख लगा कि
-लोग क्या ही तो दर्शन करने आए हैं??
-और क्या ही मंदिर प्रशासन के लोगो का व्यवहार लोगों के साथ है?
खैर,, उस दौरान मैंने मम्मी पापा को अपने पीछे दीवार के साथ कर लिया था ताकि उनको कोई परेशानी ना हो। एक यहाँ का अनुभव हटा दे तो सभी जगह बहुत सुगम दर्शन हुए।
इसके बाद कुछ जगह का खाना, खाना बच गया था…वो खाया ।
पापा का इस यात्रा पर आने से पहले ही कॉन्सेप्ट क्लियर था। मुझे केवल राम मंदिर, हनुमान गढ़ी, बाबा विश्वनाथ और गंगा घाट के दर्शन करने है। इसके अलावा मेरी कोई इच्छा नहीं है। हुआ भी यही। हमने और कहीं कुछ एक्सप्लोर नहीं किया।
मैं तीसरी बार काशी गया था, और दूसरी बार अयोध्या जी। मेरे पास और बहुत ऑप्शंस थे परंतु पापा इतने में ही संतुष्ट थे।
अगले दिन सुबह 6 बजे कार बनारस से चली और शाम को साढ़े 5 बजे गाजियाबाद घर पर आकर रुकी।
बेहतरीन सड़क व्यवस्था के लिए जो लोग भी जिम्मेदार है उनका तहेदिल से धन्यवाद क्योंकि बनारस से साढ़े ग्यारह घंटे में ग़ाज़ियाबाद आने के लिए आपको जबरदस्त सड़क की जरूरत तो होगी ही।।
कुल मिलाकर एक अच्छी तीर्थयात्रा रही। उम्मीद के विपरीत दोनों मुख्य मंदिरों में भीड़ नहीं मिली।