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एक चीनी महिला ने इस्लाम क़बूल कर लिया,लेकिन उसके शौहर ने उसे क़बूल करने से इनकार कर दिया। अल्लाह ने उन्हें एक बेटा और एक ब...
29/08/2026

एक चीनी महिला ने इस्लाम क़बूल कर लिया,

लेकिन उसके शौहर ने उसे क़बूल करने से इनकार कर दिया। अल्लाह ने उन्हें एक बेटा और एक बेटी से नवाज़ रखा था फिर भी शौहर ने अपनी नव मुस्लिम बीवी को तलाक दे दिया, और अपने दोनों बच्चों को साथ लेकर अमेरिका के ओक्लाहोमा शहर में जाकर बस गया , और माँ को उनसे मिलने या उनके पास जाने से रोक दिया।

माँ चीन में ही स़ब्र के साथ अपनी क़िस्मत को स्वीकार करते हुए इस्लाम पर अडिग रही, भले ही इसकी कीमत अपने पति और बच्चों को हमेशा के लिए खोना ही क्यों न हो।

कई साल बीत गए...फिर अचानक पंद्रह साल से अधिक समय बाद, उसकी सबसे बड़ी बेटी (जो अब बीस वर्ष की हो चुकी थी) ने उसे फोन किया और कहा :-

"माँ, ओक्लाहोमा में हमसे मिलने आ जाओ। पिता जी आखिरकार मान गए हैं।"

माँ तुरंत रवाना हो गई। ओक्लाहोमा हवाई अड्डे पर पहुँचते ही उसने अपना फोन खोला, अपनी बेटी के पते के पास के किसी इस्लामी केंद्र या मस्जिद का पता लगाया, एक कागज़ पर नंबर और पता लिखा, उसे अपनी बेटी को दिया और कहा :-

"अगर मुझे कुछ हो जाए, तो तुरंत इस नंबर पर फोन करना।"

बेटी हैरान रह गई: "ये कौन हैं?"

माँ ने शांत और आत्मविश्वास से कहा: "ये मेरे भाई हैं।"

बेटी ने इस बात पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।

मां चीनी मूल की थीं अमेरिका में किसी को नहीं जानती थीं, न ही मस्जिद को, न ही उसके संचालक को, और न ही वहां नमाज़ पढ़ने वालों की राष्ट्रीयता को…

लेकिन एक मुसलमान होने के नाते, वह जानती थीं कि इस्लाम में “भाई” और “बहन” शब्द सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि एक वास्तविकता और सच्चाई हैं।

इस तरह ओक्लाहोमा पहुंचने के ठीक तीन दिन बाद…मां का देहांत हो गया (अल्लाह उन पर रहम करे)।

अचानक ! बिना किसी पूर्व बीमारी के।

बेटी को तुरंत अपनी मां के शब्द याद आ गए, इसलिए उसने मां द्वारा दिए गए नंबर पर कॉल किया। आगे जो हुआ वह चौंकाने वाला था।

पता चला कि मां ने इंटरनेट से जिस मस्जिद को चुना था, वह ओक्लाहोमा के बाहरी इलाके में एक छोटी सी मस्जिद थी, जिसके पास एक ज़मीन का टुकड़ा था जिसे मुस्लिम समाज ने वर्षों पहले एक इस्लामी क़ब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल करने के लिए खरीदा था…

लेकिन उन्होंने दफनाने की अनुमति पाने के लिए अदालतों में पूरे पांच साल तक लड़ाई लड़ी थी, और इस दौरान किसी भी मुसलमान को वहां दफनाने की इजाज़त नहीं मिली थी।

और अभी हाल ही में—चीनी बहन के देहांत से कुछ ही दिन पहले—आखिरकार आधिकारिक मंज़ूरी जारी हो गई थी, और अब वे कानूनी रूप से कब्रिस्तान का उपयोग करने में सक्षम थे।

परमिट जारी होने के ठीक अगले दिन बेटी का फोन आया! मस्जिद के इमाम खुद परिवार से मिलने गए और बेटी से कहा:-

"इस नए कब्रिस्तान में खोदी जाने वाली पहली कब्र तुम्हारी मां के लिए होगी, उनके और हमारे सम्मान में।"

फिर जुमा को मस्जिद इतनी भीड़ से भर गई जितनी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी, और एक यादगार जनाज़ा निकला जो अविश्वसनीय था:

सैकड़ों लोग जनाज़े के पीछे चल रहे थे, हर जाति के पुरुष और महिलाएं, गोरे और काले, अरब और भारतीय, अफ्रीकी और एशियाई...

ऐसा यादगार लम्हा बेटी ने कभी नहीं देखा था, न ही उसके भाई ने, और न ही उनके पिता ने अपने जीवन में कभी देखा था। परिवार स्तब्ध रह गया,

और वे रोते हुए बोले:“ये लोग कौन हैं?! और इनका हमारी माँ से क्या रिश्ता है?”

इमाम साहब ने उन्हें जवाब दिया: ये इस्लाम में उनके भाई हैं।

इस्लाम में मुसलमान, मुसलमान का भाई होता है। दफ़नाने के बाद, बेटी ने अपनी माँ के थैले से एक छोटा सा कागज़ का टुकड़ा निकाला, जो अरबी में उनकी अपनी लिखावट में लिखा था।

उसने शेख से उसे पढ़कर सुनाने को कहा, फिर इमाम ने बताया कि उसमें लिखा है:-

उस काग़ज़ में लिखा था...

“ऐ मेरे परवरदिगार ! मेरे बच्चों को हिदायत नस़ीब फ़रमा…ऐ मेरे रब ! मेरे बच्चों को सिरात़-ए-मुस्तक़ीम अत़ा फ़रमा…”

जब शेख ने उनके लिए दुआ का अनुवाद किया, तो उनके पूर्व शौहर ने कहा:-

“मैं उनकी क़ब्र के बगल में अपने लिए क़ब्र की जगह चाहता हूँ।”

शेख ने उनसे कहा: “इसके बदले में आपको गवाही देनी होगी कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं है और मुहम्मदﷺ अल्लाह के रसूल हैं।”

तो उन्होंने उसी वक़्त, उसी जगह पर उसके पूर्व शौहर ने ईमान की गवाही दी और इस्लाम कबूल कर लिया। और उसी रात, उनके बेटे ने भी इस्लाम कबूल कर लिया और ईमान की गवाही दी।

हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह उन्हें माफ़ कर दे और उन पर रहम करे, और उन्हें जन्नत के विशाल बागों में जगह अत़ा फरमाए।

#आमीन। ابو فارس الانصاری

ताजदार-ए-अंबिया, नबी-ए-आख़िरुज़्ज़मा, सय्यद-उल-अंबिया, दोनों आलम के रहमत, इमाम-उल-अंबिया अलैहिस्सलाम की विलादत के मौक़े ...
26/08/2026

ताजदार-ए-अंबिया, नबी-ए-आख़िरुज़्ज़मा, सय्यद-उल-अंबिया, दोनों आलम के रहमत, इमाम-उल-अंबिया अलैहिस्सलाम की विलादत के मौक़े पर ओमान के सुल्तान हैसम बिन तारिक़ अल सईद ने 459 क़ैदियों की सज़ा मआफ़ कर उन्हें बरी करने का शाही फ़रमान जारी किया है। इन 459 क़ैदियों में ओमान के शहरी और ग़ैर-अरबी शामिल हैं।

याद है वो नेपाली नौजवान, जिसका वीडियो करीब एक साल पहले पूरी दुनिया में वायरल हुआ था? वह एक पैर से महरूम होने के बावजूद, ...
14/08/2026

याद है वो नेपाली नौजवान, जिसका वीडियो करीब एक साल पहले पूरी दुनिया में वायरल हुआ था? वह एक पैर से महरूम होने के बावजूद, हाथ में सिर्फ एक सहारे के साथ मस्जिद की हिफाज़त के लिए एक उग्र भीड़ के सामने डटकर खड़ा हो गया था।
उस वक्त कुछ अरबी दोस्तों ने उसे तलाश करने के लिए एक मुहिम शुरू की थी, और आखिरकार वो उसे ढूंढने में कामयाब हो गए। आज अल्लाह का शुक्र है कि वही भाई मक्का मुकर्रमा पहुंचे हैं।

लेकिन सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि उन अरबी दोस्तों से एसोसिएशन ने राब्ता किया और ऐलान किया कि वो इस माज़ूर भाई के लिए आधुनिक आर्टिफिशियल पैर का पूरा खर्च उठाएंगे।
इतना ही नहीं, वह भाई सऊदी अरब से तब तक वापस नहीं जाएंगे, जब तक उन्हें नया पैर लगाकर पूरी तरह तैयार नहीं कर दिया जाता।

फिर वो एक ऐसे खास सेंटर गए, जहां आर्टिफिशियल पैर तैयार किए जाते हैं। वहां उनके पैर की नाप और जरूरी माप लिए गए, ताकि उनके लिए बिल्कुल मुनासिब पैर तैयार किया जा सके। 🦿❤️

अल्हम्दुलिल्लाह, इसका पहला मरहला शुरू हो चुका है। इंशाअल्लाह आने वाले दिनों में बाकी तमाम कार्रवाइयां भी मुकम्मल हो जाएंगी और फिर वह भाई, इंशाअल्लाह, अपने वतन नेपाल अपने दोनों पैरों पर खड़े होकर लौटेंगे। 🤲❤️

हम अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि वह इस नेक और इंसानी काम को अपने करम से मुकम्मल फरमाए और इसमें हिस्सा लेने वाले हर शख्स को बेहतरीन अज्र अता करे।

Jamiya world ✍️

इस शख़्स ने सच में कमाल कर दिया है। ❤️हुसैन मंसूरी शाहब असम में आई बाढ़ के पहले दिन से लेकर आज तक लगातार बाढ़ पीड़ितों क...
06/08/2026

इस शख़्स ने सच में कमाल कर दिया है। ❤️
हुसैन मंसूरी शाहब असम में आई बाढ़ के पहले दिन से लेकर आज तक लगातार बाढ़ पीड़ितों की ख़िदमत में लगे हुए हैं। बहुत से लोग कभी-कभार मदद करके आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन ये भाई दिन-रात (24/7) ज़रूरतमंदों तक खाना, राहत का सामान और हर मुमकिन मदद पहुँचाने में जुटे हुए हैं।

सोचने वाली बात ये भी है कि इस मुल्क में करोड़पति, अरबपति, बड़ी-बड़ी शादियों और दिखावे पर करोड़ों रुपये ख़र्च करने वाले लोग, और ज़िम्मेदार ओहदों पर बैठे लोग आखिर ऐसे मुश्किल वक़्त में आख़िर कहाँ गायब हो आते हैं?

Alhamdulillah for the privilege of performing Umrah once again. May Allah accept our prayers and deeds. 🕋✨"
02/08/2026

Alhamdulillah for the privilege of performing Umrah once again. May Allah accept our prayers and deeds. 🕋✨"

स्पेनिश फुटबॉलर "लामीन यमाल" ने मन्नत मानी थी कि अगर मेरा देश वर्ल्डकप जीत गया तो अपने गांव में एक शानदार मस्जिद बनवाऊंग...
31/07/2026

स्पेनिश फुटबॉलर "लामीन यमाल" ने मन्नत मानी थी कि अगर मेरा देश वर्ल्डकप जीत गया तो अपने गांव में एक शानदार मस्जिद बनवाऊंगा , मन्नत पूरी हो गई , अब मस्जिद की बुनियाद रखी जा रही है।
फोटो AI से बनाई गई हैं
यासिर पोस्ट

उत्तर प्रदेश बस्ती की रहने वालीआईमा अंसारी ने बिना कोचिंग के घर पर पढ़ाई करके NEET में शानदार सफलता हासिल की।  आईमा अंसा...
30/07/2026

उत्तर प्रदेश बस्ती की रहने वाली

आईमा अंसारी ने बिना कोचिंग के घर पर पढ़ाई करके NEET में शानदार सफलता हासिल की।

आईमा अंसारी ने ऑल इंडिया रैंक 10,552 और ओबीसी रैंक 5,235 प्राप्त की।

दो कमरों के छोटे से घर में रहने वाला बेहद गरीब परिवार,आर्थिक तंगी

लेकिन इन सबके बावजूद गरीबी को हराने का हौसला और मेहनत ने आईमा को इस मुकाम तक पहुँचा दिया। congratulations

🥰🥰

NEET में 661 अंक प्राप्त करने वाली तुबा काज़मी का किया सम्मानअमरोहा। शहर की होनहार छात्रा तुबा काज़मी ने NEET-2026 परीक्...
25/07/2026

NEET में 661 अंक प्राप्त करने वाली तुबा काज़मी का किया सम्मान

अमरोहा। शहर की होनहार छात्रा तुबा काज़मी ने NEET-2026 परीक्षा में 661 अंक प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उल्लेखनीय सफलता पर विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक हस्तियों ने उन्हें बधाई देकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर नगर पालिका परिषद अमरोहा की अध्यक्ष शशि जैन, समाजसेवी फहीम शाहनवाज तथा डॉ. सुहैल मिर्ज़ा ने तुबा काज़मी को फूलमाला पहनाकर एवं मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। सभी ने उनकी कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण की सराहना करते हुए इसे अमरोहा के लिए गर्व का क्षण बताया।

डॉ. सुहैल मिर्ज़ा ने कहा कि तुबा काज़मी की सफलता क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास जताया कि तुबा भविष्य में एक सफल चिकित्सक बनकर समाज की सेवा करेंगी। वहीं, शशि जैन और फहीम शाहनवाज ने भी तुबा को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों को भी कठिन परिश्रम के लिए प्रेरित करेगी।

तुबा काज़मी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और निरंतर मेहनत को दिया। उनकी इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

फुटबॉल विश्व कप चैंपियन यामल का आबाई वतन मोरक्को है। यामल की दादी एक महाजिर हैं वो वर्षों पहले मोरक्को से स्पेन आई थीं। ...
22/07/2026

फुटबॉल विश्व कप चैंपियन यामल का आबाई वतन मोरक्को है। यामल की दादी एक महाजिर हैं वो वर्षों पहले मोरक्को से स्पेन आई थीं। उनके पास कोई दस्तावेज़ नहीं था वो एक बस में छुपकर मोरक्को से स्पेन पहुंची और वहीं रहने लगी। आज फ़ातिमा रोमानी को विश्व कप चैंपियन यामल की दादी से नाम से पूरी दुनिया में पहचान मिली है।

अर्जेंटीना और स्पेन में हुए फ़ीफ़ा फ़ाइनल मुक़ाबले से पहले यामल की दादी ने अपने एक इंटरव्यू में कहा।
"मैं चाहती हूँ कि स्पेन यह वर्ल्ड कप जीते और मेरा पोता (यामल) गोल करे, जब वो गोल करेगा तो मैं ख़ुशी से चिल्लाऊँगी और न जाने क्या-क्या करूँगी"

यामल की दादी की बात सच हुई और स्पेन ने फ़ाइनल जीतकर इतिहास रच दिया है आज स्पेन दुनिया में पहले स्थान पर ख़ुद को क़ाबिज़ कर लिया है।

कल तक जो दादी मोरक्को से आकर स्पेन की तंग गलियों में दिन-रात काम करके अपने परिवार को पाल रही थीं, आज उनके उसी पाले हुए 19 वर्षीय पोते, लामिन यामल ने पूरी दुनिया में अपनी दादी का नाम रोशन कर दिया है।
स्पेन की यह जीत सिर्फ़ स्पेनिश फुटबॉल टीम की जीत नहीं, बल्कि एक निस्वार्थ दादी की क़ुर्बानी, मज़बूत यक़ीन और दुआओं की भी जीत है।

अब्दुल पंचर ही नहीं फीफा कप भी जीतता हैं
20/07/2026

अब्दुल पंचर ही नहीं
फीफा कप भी जीतता हैं

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