24/01/2026
भगवान विषणु के 24 अवतार हैं, और हर रूप का अपना अलग महत्व है। ऐस कहा जाता है अगर कोई व्यक्ति किसी तरह की भीषण व भयंकर परेशानी या समस्या से जूझ रहा हो तो उसे इनकी शरण में आ जाना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार श्रद्धा पूर्वक इनकी शरण में जाता है और सच्चे व शुद्ध मन से इनकी आराधना करता है तो वराह भगवान उस पर अपनी कृपा दृषटि हमेशा बनाए रखते हैं।
वराह मंत्र जप
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ज्योतिषशास्त्र के अनुसार वराह जयंती के दिन व्रत आदि करने वाले व्यक्ति को हर धार्मिक कार्य को करने से पहले संकल्प लेना चाहिए। फिर चाहे वो मंत्र जाप का संकल्प ही क्यों न हो। ऐसा माना जाता है इससे जातक द्वारा की गई पूजा सफल होती है।
ऐसे लें संकल्प
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संकल्प लेने से पहले एक कलश में भगवान वराह की प्रतिमा स्थापित कर विधि विधान सहित षोडषोपचार से भगवान वराह की पूजा करें। पूरे दिन व्रत रखकर रात्रि में जगारण करके भगवान विष्णु के अवतारों की कथा का श्रवण करना चाहिए।
वराह मंत्र
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ॐ वराहाय नमः
ॐ सूकराय नमः
ॐ धृतसूकररूपकेशवाय नमः
वराह देव गायत्री मंत्र
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ॐ नमो भगवते वराह रूपाय भूभुर्वः स्वः।
स्यात्पते भूपति त्यं देहयते ददापय स्वाहा॥
उपरोक्त मंत्रों का जाप करने से आपकी समस्या का समाधान निकल जाता है। मंत्र जाप के दौरान इस बात का खास ध्यान रखें कि आपका मन केवल भगवान की तरफ़ ही एकाग्र हो।