17/09/2023
29 अप्रेल, 1945 की शाम, बंकर में उदास सन्नाटा था।
बर्लिन खंडहर में बदल चुका था। रशियन सेनाएं, चांसलरी बिल्डिंग से महज एक किलोमीटर दूर थी।
चांसलरी गार्डन में जमीन के कई मीटर नीचे बंकर की 9 फुट मोटी, कंक्रीट की दीवारों के पीछे बैठा हिटलर, हैवी शेलिंग के विस्फोट सुन रहा था।
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आगंतुक ने हिम्मत करके हिटलर के हाथ को छुआ। थपथपाकर सांत्वना दी।
हिटलर चेतन हुआ -"मेरे दोस्त। मेरे आग्रह पर, तुम इतनी दूर से, इतना खतरा उठाकर, मिलने आये। मैं आभारी हूँ"
- ये मेरा फर्ज था फ़्यूरर। आदेश दें..
हिटलर ने कहना शुरू किया- "मैंने तय किया है मुसोलिनी तरह कि जिंदा नही पकड़ा जाऊंगा। कल शायद मेरा आखरी दिन हो।
मगर मेरे बाद नाजीवाद समाप्त नही होना चाहिए। यह जिम्मेदारी तुम्हें सौपता हूँ"
हिटलर ने कोट के भीतर हाथ डाला। एक छोटी सी टयूब निकाली। उसे आगंतुक की ओर बढा दिया।
हाथ बढ़ाकर उसे लेते हुए, आगंतुक ने हिटलर को प्रश्नवाचक निगाह से देखा।
"फ्रोजन स्पर्म्स"
हिटलर ने फुसफुसाहट भरी आवाज में कहा। उम्मीद है कि तुम और तुम्हारा संघ, नाजीवाद को यूरोप से दूर किसी सुरक्षित ठिकाने में जिंदा रखोगे।
पर तुम्हे वक्त आने पर एक लीडर की जरूरत होगी। इसका उपयोग करना।
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पांच साल बाद बर्लिन से बेहद दूर, गुजरात के देहात में, आज के ही दिन एक स्वस्थ बच्चा पैदा हुआ।
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