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इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों पर प्रमाणिक शोध | भारत की ऐतिहासिक चेतना को डिजिटल युग में पुनर्जीवित करना | राष्ट्रगौरव, सांस्कृतिक जागरूकता और भारतीयता का लक्ष्य
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सन् 1959 में जब दलाई लामा वेश बदलकर तिब्बत से निकले, तब उन्हें नहीं पता था कि हिमालय की यह कठिन यात्रा इतिहास बन जाएगी। ...
31/05/2026

सन् 1959 में जब दलाई लामा वेश बदलकर तिब्बत से निकले, तब उन्हें नहीं पता था कि हिमालय की यह कठिन यात्रा इतिहास बन जाएगी। बर्फीले पहाड़ों, चीनी सैनिकों और अनिश्चितताओं के बीच तवांग वह पहला भारतीय नगर बना, जिसने उन्हें शरण और सम्मान दिया। यही यात्रा तिब्बती निर्वासन की शुरुआत और भारत-तिब्बत संबंधों के एक नए अध्याय का प्रतीक बन गई।

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31/05/2026

चीन जब दलाई लामा की जान के पीछे पड़ा था तब उन्हें भारत ने शरण दी थी

1950 में People’s Republic of China की सेना तिब्बत में घुस चुकी थी और धीरे-धीरे वहां का नियंत्रण अपने हाथ में ले रही थी। तिब्बतियों के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन पर खतरा बढ़ता जा रहा था। लेकिन दलाई लामा किन खतरनाक परिस्थितियों में चीन से बचकर निकले थे ये कहानी आपको चौंका देगी।

30/05/2026

जब 1024 में महमूद गजनवी आया और गुजरात के सोमनाथ मंदिर को तोड़ दिया। जो लाखों- करोड़ों लोगों की आस्था पर हमला था। ऐसा लगने लगा था कि भारत की पहचान ही मिटा दी जाएगी। लेकिन 1767 से लेकर 1795 तक एक ऐसी महारानी उठ खड़ी हुई जिन्होंने ना सिर्फ इन मंदिरों का फिर से निर्माण कराया बल्कि और नए मंदिर भी स्थापित किए। नाम था उनका अहिल्याबाई होलकर।

1919 में जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश ‘नाइटहुड’ लौटाकर अंग्रेजी साम्राज्य को सीधी चुनौती दी...
30/05/2026

1919 में जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश ‘नाइटहुड’ लौटाकर अंग्रेजी साम्राज्य को सीधी चुनौती दी। उनका ऐतिहासिक पत्र केवल विरोध नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान की आवाज था। यह वही साहित्यिक तलवार थी, जिसने दुनिया के सामने ब्रिटिश क्रूरता का नकाब उतार दिया।

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29/05/2026

अंग्रजों ने रवींद्रनाथ टैगोर को सर का टाइटल दिया था लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि उन्होंने वो टाइटल लौटा दिया था क्योंकि उस समय अंग्रेजों ने अपनी करतूत छिपाने के लिए पूरे पंजाब में ‘मार्शल लॉ’ लगा दिया था और सभी खबरों पर सेंसरशिप कर दी थी ताकि सच्चाई बाहर ना सके।
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1953 में जब तेनजिंग नोर्गे और एडमंड हिलेरी ने पहली बार माउंट एवरेस्ट फतह किया, तब इस ऐतिहासिक मिशन के पीछे भारत की बड़ी ...
29/05/2026

1953 में जब तेनजिंग नोर्गे और एडमंड हिलेरी ने पहली बार माउंट एवरेस्ट फतह किया, तब इस ऐतिहासिक मिशन के पीछे भारत की बड़ी भूमिका थी। बंबई से नेपाल तक 7.5 टन सामान पहुंचाने, भारतीय वायु सेना द्वारा ऑक्सीजन सप्लाई भेजने, आईएमडी की मौसम जानकारी और भारतीय वायरलेस स्टेशन की मदद ने इस असंभव अभियान को सफल बनाया। एवरेस्ट की जीत सिर्फ शिखर पर नहीं, बल्कि भारत की लॉजिस्टिक ताकत पर भी टिकी थी।

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28/05/2026

कहानी है 105 भारतीय महिलाओं की जिन्होंने युद्ध से बुरी तरह से जूझ रहे एक देश को बर्बादी की गहराईयों से निकाला। 1989 से 2003 के बीच, यह पश्चिमी अफ्रीकी देश लाइबेरिया दो भयानक गृहयुद्धों से बुरी तरह टूट चुका था। बुनियादी ढांचा ढह गया, बच्चों का अपहरण कर उन्हें नशे में धकेलकर लड़ने के लिए मजबूर किया, और करीब 2,50,000 लोगों की जान चली गई। वहां भारत ने सुरक्षा व्यवस्था को फिर से खड़ा किया और वहां की लाचार प्रजा को उम्मीद की एक किरण दी।

युद्ध से तबाह लाइबेरिया में जब भरोसा टूट चुका था, तब भारत की 103 महिला UN शांतिरक्षकों ने केवल सुरक्षा ही नहीं दी, बल्कि...
28/05/2026

युद्ध से तबाह लाइबेरिया में जब भरोसा टूट चुका था, तब भारत की 103 महिला UN शांतिरक्षकों ने केवल सुरक्षा ही नहीं दी, बल्कि लोगों का विश्वास भी लौटाया। बिना गोली चलाए हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने वाली इन “भारतीय बहनों” ने महिलाओं को आत्मरक्षा सिखाई, मेडिकल कैंप लगाए और शांति की नई मिसाल कायम की। यही भारत की असली शक्ति है, मानवता, साहस और सेवा।

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27/05/2026

वीर सावरकर जब सेलुलर जेल में थे, तब वहां मुस्लिम वार्डर हिंदू कैदियों को डरा-धमकाकर इस्लाम में धर्मांतरण करा रहे थे। इसके लिए वीर सावरकर ने जेल के भीतर ही 'शुद्धि' अभियान शुरू किया और कैदियों को वापस हिंदू धर्म में लाए। इसके लिए सावरकर धर्मांतरित हुए लोगों को तुलसी का पत्ता खिलाकर और गीता के श्लोक पढ़कर हिंदु धर्म में वापसी कराते थे।

क्या आप जानते हैं कि स्वतंत्र भारत का पहला आधिकारिक ISI मानक किसी मशीन, इस्पात या बिजली उपकरण के लिए नहीं, बल्कि हमारे र...
27/05/2026

क्या आप जानते हैं कि स्वतंत्र भारत का पहला आधिकारिक ISI मानक किसी मशीन, इस्पात या बिजली उपकरण के लिए नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के लिए बना था? 🇮🇳
1951 में जारी IS 1:1951 ने तिरंगे के रंग, आकार, खादी की बुनाई और अशोक चक्र तक को वैज्ञानिक मानकों में बांध दिया। यह सिर्फ झंडा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की “इंजीनियरिंग क्रांति” थी।

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