17/08/2026
बिहार में डस्टबिन की कथित महंगी खरीद को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं। 🗑️💰
वायरल दावों के मुताबिक, करीब ₹1,500 कीमत वाले डस्टबिन को ₹15,000 तक में खरीदे जाने और पूरे राज्य में लगभग ₹300 करोड़ की खरीदारी का दावा किया जा रहा है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर इसे “डस्टबिन घोटाला” कहा जा रहा है।
हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक बिहार स्वास्थ्य विभाग के ऑनलाइन रिकॉर्ड में हमें इस डस्टबिन खरीद के ₹300 करोड़ वाले दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली। विभाग की वेबसाइट पर 2026-27 की कई अन्य स्वीकृतियां दर्ज हैं, इसलिए वायरल आंकड़ों को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक खरीद दस्तावेज, टेंडर और भुगतान रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है।
लेकिन सवाल फिर भी बड़ा है—
👉 अगर सरकारी खरीद में किसी वस्तु की कीमत बाजार दर से कई गुना ज्यादा है, तो इसकी जांच कौन करेगा?
👉 टेंडर किस कीमत पर हुआ?
👉 कितनी संख्या में डस्टबिन खरीदे गए?
👉 सप्लायर कौन था और भुगतान कितना हुआ?
आखिर यह जनता का पैसा है। सरकारी खरीद में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। 🇮🇳
आपको क्या लगता है—ऐसे मामलों में खरीद प्रक्रिया और कीमतों की सार्वजनिक जांच होनी चाहिए?