20/09/2025
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इकबालिया बयान नहीं होगा सबूत: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला!
दोस्तों, सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसी आरोपी का प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के सामने दिया गया इकबालिया बयान (confession) सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत है जिन पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मुकदमा चल रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिया यह फैसला?
जस्टिस बी.आर. गावई और जस्टिस के. विश्वनाथन की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने ही खिलाफ गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20(3) में दिए गए मौलिक अधिकार का हिस्सा है. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई आरोपी पूछताछ के दौरान सहयोग नहीं कर रहा है या मनचाहा बयान नहीं दे रहा है, तो सिर्फ इस आधार पर उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.
अदालत ने कहा कि ED यह उम्मीद नहीं कर सकती कि हर आरोपी अपना गुनाह कबूल कर लेगा.
'जमानत नियम है और जेल अपवाद'
इस फैसले के साथ, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि "जमानत नियम है और जेल अपवाद" का सिद्धांत PMLA मामलों में भी लागू होता है. यह एक बहुत बड़ा बदलाव है, क्योंकि पहले PMLA के तहत जमानत मिलना बहुत मुश्किल होता था. कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता को इतनी आसानी से छीना नहीं जा सकता और आरोपी को बिना ठोस सबूतों के लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जाना चाहिए.
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