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बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक ...
03/08/2026

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 19324 मतों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि भारतीय जनता पार्टी के नीरज कुमार दूसरे और राष्ट्रीय जनता दल की रेखा कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं। यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।

यह जीत केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीतिक प्राथमिकताओं के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में मतदाता विकास, सुशासन, रोजगार, शिक्षा और स्थानीय मुद्दों पर अधिक मुखर हुए हैं। ऐसे में किसी भी नए राजनीतिक विकल्प को मिलने वाला समर्थन यह दर्शाता है कि मतदाता पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से आगे बढ़कर प्रदर्शन और विश्वसनीयता के आधार पर भी निर्णय लेने लगे हैं।

लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति मतदाता के विवेकपूर्ण निर्णय में निहित है। बांकीपुर का जनादेश भी यही संदेश देता है कि जनता अपने मत के माध्यम से समय-समय पर राजनीतिक दलों को नई दिशा और नई जिम्मेदारियों का एहसास कराती रहती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सभी राजनीतिक दल इस जनादेश से क्या सीख लेते हैं और बिहार के विकास एवं जनहित के मुद्दों को किस प्रकार प्राथमिकता देते हैं।

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हिमाचल की कांगड़ा घाटी में 800 साल से अधिक समय से आस्था, इतिहास और अद्भुत स्थापत्य का प्रतीक है बैजनाथ मंदिर।बारह ज्योति...
02/08/2026

हिमाचल की कांगड़ा घाटी में 800 साल से अधिक समय से आस्था, इतिहास और अद्भुत स्थापत्य का प्रतीक है बैजनाथ मंदिर।

बारह ज्योतिर्लिंग में से एक प्रसिद्ध एवं पवित्र बैजनाथ ज्योतिर्लिंग हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में अत्यन्त ख़ूबसूरत वादियों में स्थित है।यह अत्यंत प्राचीन शिव मन्दिर है जिसकी देख रेख भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा की जाती है। कांगड़ा जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर छोटे से कस्बे बैजनाथ में यह ज्योतिर्लिंग मन्दिर है । मान्यता है कि प्राचीनकाल-द्वापर युग में पाण्डवों द्वारा इसका निर्माण करवाया गया था और बाद में दो शिव भक्तों ने 1204 ई में इसका पुनर्निर्माण करवाया था। बैजनाथ मंदिर केवल एक प्राचीन शिव मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और आस्था का जीवंत प्रतीक है।

बैजनाथ मंदिर शिखर शैली की उत्कृष्ट वास्तुकला का उदाहरण माना जाता है। इसके पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी आज भी उस समय के शिल्पकारों की अद्भुत कला का परिचय देती है।

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही विशाल पत्थर के द्वार, प्राचीन मूर्तियां और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं।इसकी दीवारों और स्तंभों पर देवी-देवताओं, अप्सराओं और पौराणिक कथाओं की सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है।

बैजनाथ मंदिर की सबसे प्रसिद्ध कथा रावण सेजुड़ी है। मान्यता है कि रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहीं कठोर तपस्या की थी और भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया और अपने साथ ले जाने के लिए शिवलिंग भी सौंपा।

मान्यताओं के अनुसार, देवताओं की योजना के चलते रावण शिवलिंग को लंका तक नहीं ले जा सका और वह यहीं स्थापित हो गया। तभी से भगवान शिव यहां वैद्यनाथ के रूप में पूजे जाते हैं।

भारत के अधिकांश हिस्सों में जहां दशहरे के दिन रावण का पुतला दहन किया जाता है, तो वहीं बैजनाथ में स्थानीय लोगों का मानना है कि रावण भगवान शिव का महान भक्त था। इसी श्रद्धा के कारण यहां दशहरे पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता और यही परंपरा बैजनाथ को देश के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है।

गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग के दर्शन के लिए पूरे वर्ष श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।मंदिर परिसर में नंदी की विशाल प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। वही महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से पहुंचते हैं। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। बैजनाथ मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। पालमपुर, बीड़-बिलिंग, आंद्रेटा और धौलाधार की पर्वत श्रृंखलाओं के निकट होने के कारण यहां आने वाले पर्यटक मंदिर दर्शन के साथ हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद लेते हैं।

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