Abhishek Dass

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05/04/2026

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हिसार मार्च 28, 2017

सतलोक आश्रम के हत्या के मुकदमे में पुलिस को लगा झटका, मुद्दई बोला- 'पत्नी की मौत के लिए रामपाल नहीं जिम्मेवार'

अमर उजाला ब्यूरो / हिसार।

बरवाला के सतलोक आश्रम प्रकरण में हत्या के मुकदमा नंबर 430 में पुलिस को झटका लगा है।

सेंट्रल जेल वन में लगी एडीजे अजय पराशर की कोर्ट में यूपी के ललितपुर का शिकायतकर्ता सुरेश कुमार बयान से पलट गया है। उसने साफ कहा कि पत्नी रजनी देवी की मौत के लिए आश्रम संचालक रामपाल और भक्त जिम्मेवार नहीं। उसने कहा कि पुलिस ने उसके खाली कागजों पर साइन कराए थे और फिर केस दर्ज कर लिया। शिकायतकर्ता के इस बयान से दो पुलिस वालों ने दी रामपाल के खिलाफ गवाही बुलाए थे 8, आए 5 गवाह आरोपी रामपाल कुछ राहत महसूस कर रहा है। वहीं दो पुलिस कर्मचारियों ने रामपाल के खिलाफ गवाही दी है। अदालत ने इस तारीख पर आठ गवाह बुलाए थे। पांच गवाह आए थे, जिनमें से तीन की गवाही हो सकी।

बरवाला के सतलोक आश्रम प्रकरण में हत्या के मुकदमा नंबर 430 में आश्रम संचालक रामपाल समेत 13 आरोपी हैं। दो आरोपी जमानत पर बाहर हैं। बाकी

पुलिस ने टाउन पार्क में नहीं घुसने दिए समर्थक
पुलिस ने रामपाल जी के समर्थकों को सोमवार को टाउन पार्क में नहीं घुसने दिया। समर्थक काफी संख्या में यहां आए हुए थे। टाउन पार्क और जेल के मेन गेट के आस-पास काफी संख्या में पुलिस कर्मी तैनात थे। पुलिस कर्मियों ने वहां से समर्थकों को खदेड़ दिया।

आरोपी जेल में बंद हैं। कोर्ट ने पेशी के बाद मुकदमे की अगली तारीख 24 अप्रैल लगा दी। मुख्य आरोपी रामपाल जी गंगवा रोड की जेल में बंद है।

सतलोक आश्रम में हुई 6 मौतों के लिए हरियाणा सरकार जिम्मेदार'सतलोक आश्रम में बरवाला में हुई 6 मौतों के लिए हरियाणा सरकार व...
05/04/2026

सतलोक आश्रम में हुई 6 मौतों के लिए हरियाणा सरकार जिम्मेदार'

सतलोक आश्रम में बरवाला में हुई 6 मौतों के लिए हरियाणा सरकार व पुलिस जिम्मेदार है, न कि संत रामपाल व उनके शिष्य उक्त आरोप शिवपाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाई। उन्होंने बताया कि पुलिस ने 14-11-2014 को सतलोक आश्रम को चारों तरफ से घेरकर बिजली व पानी की सप्लाई काट दी। 14-11-2014 से आश्रम में किसी को भी आने जाने नहीं दिया गया तथा खाद्य सामग्री, दूध, सब्जियां व दवाई नहीं आने दी। 18-11-2014 तक आश्रम को बंधक बनाए रखा तथा मीडिया को सच्चाई से दूर रखा और झूठी खबरों को प्रसारित कराकर लोगों को भ्रमित किया।

18 नवंबर 2014 को दिन के 12 बजे पर आश्रम एक्पायरड आंसू गैस के गोले बहुत अधिक मात्रा में छोड़कर से लबालब भर जब आश्रम को धुंऐ दिया। आश्रम में धुंए से परेशान होकर लोग बाहर निकलने लगे तो पुलिस ने उन पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज किया और रॉकेट बंब छोड़े गए जिससे हजारों की संख्या में स्त्री-पुरूष घायल हुए तथा धुंए के कारण मेरी पत्नी व अन्य की मौत हो गई। जब वे बेहोशी की हालत में थी तो हमने आश्रम के

सेवकों की मदद से इलाज के लिए बाहर ले जाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने हमे बाहर नहीं जाने दिया और ना ही हमे इलाज करवाने दिया। पुलिस अगर समय पर इलाज करवाने देती तो मेरी पत्नी और अन्यों की मौत ना होती। 19-11-14 को जब हम उनकी डैड बॉडी अस्पताल में लेकर गए तो पुलिस ने हमसे 4 5 खाली कागजों पर यह कहकर साइन करवाए कि डैड बॉडी देने
की कार्यवाही के लिए साइन करवा रहे हैं।

मुझे 10-15 दिन के बाद अखबार के माध्यम से पता चला कि मेरे खाली पेपरों पर साईन के आधार पर पुलिस ने संत रामपाल व अन्य सेवकों के खिलाफ 302 का झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।

मैंने पहने हाईकोर्ट व बाद में हिसार कोर्ट में उपरोक्त सच्चाई के बारे में पीटीशन डाली थी कि मेरी पत्नी व अन्य मौतों के लिए जिम्मेवार पुलिस प्रशासन व सरकार है ना कि संत रामपाल व उनके सेवक। लेकिन कोर्ट ने कोई सुनवाई नहीं की। फिर मैने और अन्य मृतकों के रिश्तेदारों ने बतौर गवाह कोर्ट में यही सच्चाई बयान की है।

एक्शन इंडिया
Thu, 19 July 2018
actionindia.epapr. in/c/30457299

देशद्रोह की धाराओं को रामपाल ने अदालत में दी चुनौतीराब्यू, चंडीगढ़ : कथित संत रामपाल ने अपने खिलाफ दर्ज एफआइआर में देशद्...
05/04/2026

देशद्रोह की धाराओं को रामपाल ने अदालत में दी चुनौती

राब्यू, चंडीगढ़ : कथित संत रामपाल ने अपने खिलाफ दर्ज एफआइआर में देशद्रोह और गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने की धाराओं को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। रामपाल की इस याचिका पर हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

रामपाल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि हरियाणा पुलिस ने बरवाला पुलिस स्टेशन में 18 नवंबर 2014 में उसके खिलाफ जो एफआइआर दर्ज की, उसमें जानबूझकर दर्जनों धाराएं गलत जोड़ी गई। रामपाल के अनुसार पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या और देशद्रोह की धाराओं के साथ ही समाज विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने की धारा भी लगाई है। इन धाराओं के मुताबिक पुलिस ने रामपाल को आतंकवादी संगठन का सदस्य एवं आतंकी गतिविधियों में शामिल होना बताया है। रामपाल का कहना है कि उस पर सिर्फ अदालत की आपराधिक अवमानना का मामला है। गलती या किसी अन्य कारण से वह अदालत के आदेश को नहीं मान पाया। इसका अर्थ यह नहीं हो जाता कि उसे देशद्रोही करार दे दिया जाए। रामपाल ने याचिका में इन सभी एफआइआर को रद कर इस मामले की सीबीआइ से जांच कराने की मांग की है।

अमर उजाला ब्यूरोहिसार।बरवाला के सतलोक आश्रम प्रकरण में हत्या के मुकदमा नंबर 430 में पुलिस को झटका लगा है।सेंट्रल जेल वन ...
05/04/2026

अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।

बरवाला के सतलोक आश्रम प्रकरण में हत्या के मुकदमा नंबर 430 में पुलिस को झटका लगा है।

सेंट्रल जेल वन में लग एडीजे अजय पराशर की कोर्ट में यूपी के ललितपुर का शिकायतकर्ता सुरेश कुमार बयान से पलट गया है। उसने साफ कहा कि पत्नी रजनी देवी की मौत के लिए आश्रम संचालक रामपाल और भक्त जिम्मेवार नहीं। उसने कहा कि पुलिस ने उसके खाली कागजों पर साइन कराए थे और फिर केस दर्ज कर लिया। शिकायतकर्ता के इस बयान से

दैनिक भास्कर कुल पृष्ठ 16+4-20 (यूगल आज)राजस्थान मृत्य ₹4.50 वर्ष 20, अंक 54, महानगर कोटा, शनिवार, 28 अप्रैल, 2018वैशाख ...
05/04/2026

दैनिक भास्कर कुल पृष्ठ 16+4-20 (यूगल आज)
राजस्थान मृत्य ₹4.50 वर्ष 20, अंक 54, महानगर

कोटा, शनिवार, 28 अप्रैल, 2018
वैशाख शुक्ल पक्ष-13, 2075
न्यूज ब्रीफ

👍 रामपाल महाराज पर दुराचार के आरोप नहीं
कोटा | रामपाल महाराज के अनुयायियों का कहना है कि महाराज पर दुष्कर्म का कोई केस नहीं है। उन पर लगाए गए आरोपों को पुलिस साबित नहीं कर पा रही है। दो मामलों में वे बरी हो चुके हैं और जो मामले चल रहे हैं, उनमें भी पुलिस के पास ठोस सबूत नहीं हैं। दुष्कर्म के अन्य आरोपी बाबाओं के साथ उनका नाम जोड़ा जाना गलत है। गुरुवार को रामपाल के बारे में छापी गई खबर पर उन्हें आपत्ति है। उनके शिष्यों का कहना है कि महाराज के खिलाफ भ्रामक प्रचार व खबरों से उनके अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।

33 महीने और 69 पेशी में पुलिस साबित नहीं कर सकी अपराध ~ सुरेंद्र दलालहिसार। ~ रामपाल के बरी होने के कारण पुलिस की बेहद क...
05/04/2026

33 महीने और 69 पेशी में पुलिस साबित नहीं कर सकी अपराध ~ सुरेंद्र दलाल

हिसार। ~ रामपाल के बरी होने के कारण पुलिस की बेहद कमजोर पटकथा रही। पुलिस की ओर से तैयार की गई चार्जशीट में लचर रही। इंस्पेक्टर लेवल से कम स्तर के अधिकारी ही गवाह बने। आला अधिकारी इस मामले से दूरी बनाए रहे। रामपाल पर 2006 में दो तथा 2014 में 7 केस दर्ज हुए हैं। पहले फैसले में रामपाल को बरी किया गया है।

रामपाल के इन दो केस में 33 महीने में 69 बार पेशी होने के बाद फैसला आया। इस मामले में पुलिस की चार्जशीट भी रामपाल को बरी कराने में सहायक साबित

पुलिस की चार्जशीट भी रामपाल को बरी साबित कराने में सहायक बनी

चार्जशीट में पहले देशद्रोह की धारा जोडी फिर पेन से काटी रामपाल पर रोहतक में दो हिसार में पांच केस पर फैसला आनी बाकी

हो गई। पुलिस की ओर से इन केस में ही पहले देशद्रोह की धारा भी जोड कर दी गई थी। जिसे चार्जशीट में पेश कर दिया गया। बाद में पुलिस ने 17 को इस

मामले में कुछ भी होने से पहले ही 121 जोड़ दी। बाद में चार्जशीट में पेन से इस धारा को काट दिया। रामपाल के वकीलों ने कहा कि इस तरह से देशद्रोह क्यों लगाया।

आपकी मंशा पहले से ही ठीक नहीं रही। टकराव का घटनाक्रम होने से पहले ही पुलिस ने देशद्रोह की धारा कैसे लगा दी। सुखदेव ने कंट्रोल रूम में फोन किया उसकी काल डिटेल भी पुलिस पेश नहीं कर सकी।

9 केस में पहला फैसला

रामपाल पर सबसे 2006 में करौथा आश्रम में दो केस दर्ज हुए थे। जिसमें मर्डर व धोखाधड़ी के केस हैं। रामपाल पर रोहतक में दो तथा हिसार में सात केस सहित कुल 9 केस दर्ज हैं। जिसमें यह मंगलवार को पहला फैसला आया है। पहले फैसले में रामपाल दो मामलों में बरी हुए हैं। अब तक किसी भी केस में रामपाल को सजा नहीं हुई है।

इन कारण बरी हुए रामपाल......

1-रामपाल की ओर से इस मामले में 38 वकीलों की फौज थी।

2-सरकारी पक्ष की ओर से महज एक या दो वकील ही पेशी पर आए।

3- पुलिस की ओर से बनाए गए गवाह अपने बयान से पलटे

4-मीडियाकर्मी को गवाह बनाया जिसने पुलिस के खिलाफ गवाही दी।

5- रतिया के निवासी शिकायतकर्ता ने भी रामपाल के खिलाफ गवाही नहीं दी 6- रामपाल के वकीलों की ओर से बनाए गए डॉ. अनंतराम बराला ने पक्ष में गवाही दी

7- रामपाल समर्थक अपने बयान को लेकर डटे रहे।

8- इस केस में कुल 16 गवाह थे जिसमें इंस्पेक्टर लेवल से नीचे के रैंक के ही गवाह बनाए

9- चार्जशीट में पहले देशद्रोह की धारा लगाई फिर से उसे काट दिया

9- पुलिस कोई भी सबूत पेश नहीं कर सकी

पुलिस की चार्जशीट में बड़ी खामी रही। चार्जशीट में देशद्रोह की धारा जोड़ी फिर से उसे पैन से काट दिया। हमने इससे अदालत में साबित किया कि पुलिस की मंशा गलत थी। इसके अलावा पुलिस के दोनों गवाहों ने पुलिस की थ्योरी को नकार दिया। एपी सिंह, रामपाल के वकील, हिसार।

समाचार नामा 1.6M फॉलोवर्स+ फॉलो करें 15 अक्तू॰ 2018 7:05 PMसमाचारनामा वेबसाइट पर 14-10-2018 को प्रकाशित खबर में एक गंभीर...
05/04/2026

समाचार नामा 1.6M फॉलोवर्स+ फॉलो करें 15 अक्तू॰ 2018 7:05 PM

समाचारनामा वेबसाइट पर 14-10-2018 को प्रकाशित खबर में एक गंभीर चूक हो गई है जिसमे रामपाल का नाम छप गया है। जो एक प्रमुख समाचार वेबसाइट से ली गई है। यह सब काल्पनिक क्रियाए है। जबकि संत रामपाल पर इस तरह का कोई आरोप साबित नहीं हुआ है। इस खबर से अनुयायियों की जो भावनाएं आहत हुई है उसके लिए हम क्षमा प्राथी हैं।

राजेंद्र जांगिड़ (लेखक)

दुष्कर्मी बाबाओं की फेहरिस्त में संत रामपाल का नाम क्यों?बीकानेर (कास)। राष्ट्रीय समाज सेवा समिति सर्व भक्त जन ने बीकाने...
05/04/2026

दुष्कर्मी बाबाओं की फेहरिस्त में संत रामपाल का नाम क्यों?

बीकानेर (कास)। राष्ट्रीय समाज सेवा समिति सर्व भक्त जन ने बीकानेर से प्रकाशित एक दैनिक समाचार पत्र (युगपक्ष नहीं) के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन कर विरोध जताया। जिला संयोजक पवन सिडाना ने बताया कि इस अखबार में 26 अप्रैल के अंक में आसाराम को सजा सुनाये जाने की खबर में संत रामपाल को भी रेपिस्ट बाबाओं की लिस्ट में छापे जाने का विरोध जताया गया है। सिडाना ने कहा कि संत रामपाल पर पिछले साढ़े तीन वर्ष से जांच चल रही है मगर उन पर दुष्कर्म या रेप जैसा कोई आरोप नहीं लगा है ऐसे में उनका नाम रेपिस्ट बाबाओं की कतार में छाप कर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है।

भूल सुधार : मंगलवार 29अगस्त के संपादकीय में भूलवश बाबा रामपाल के नाम के साथ यौन शोषण का आरोप छप गया। इसका हमें खेद है।रा...
05/04/2026

भूल सुधार : मंगलवार 29
अगस्त के संपादकीय में भूलवश बाबा रामपाल के नाम के साथ यौन शोषण का आरोप छप गया। इसका हमें खेद है।

राजस्थान पत्रिका 30/08/2017
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माफीनामा'पंजाब केसरी' समाचार पत्र समूह और 'नवोदय टाइम्स' के संपादकीय पृष्ठ पर 20 जून 2018 को प्रकाशित मेरे आलेख 'बाबाओं ...
05/04/2026

माफीनामा

'पंजाब केसरी' समाचार पत्र समूह और 'नवोदय टाइम्स' के संपादकीय पृष्ठ पर 20 जून 2018 को प्रकाशित मेरे आलेख 'बाबाओं की गिरफ्त में क्यों है समाज' में संत रामपाल पर कहीं भी बलात्कार का आरोप नहीं लगाया गया है। यह आलेख बाबाओं के संदिग्ध क्रिया-कलापों पर आधारित है। अन्य बाबाओं के नाम भी न्यायालय द्वारा दी गई सजा के आधार पर ही लिखे गए हैं। फिर भी संत रामपाल या अन्य बाबाओं के अनुयायियों की भावनाएं आहत हुई हों तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं।

- रोहित कौशिक (लेखक)


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