09/05/2026
कहते हैं मां-बाप का दिल कभी नहीं दुखाना चाहिए।
एक मां जब हमें दुनिया में लाती है, तब वह 9 महीनों तक अनगिनत तकलीफ सहती है। कितनी रातें जागकर बिताती है, कितने दर्द से गुजरती है। वह यह सोचकर सब सहती है कि मेरा बच्चा मेरी दुनिया होगा, उसे हर खुशी दूंगी और जब मैं बूढ़ी हो जाऊंगी तो वही मेरा सहारा बनेगा।
एक पिता भी अपने हिस्से का त्याग करता है। घर को संभालना, बच्चों की पढ़ाई, उनकी जरूरतें, उनका भविष्य । इन सबके बीच वह अपनी कई इच्छाएं छोड़ देता है ताकि बच्चे आगे बढ़ सकें।
जब बच्चे बड़े होते हैं, स्कूल-कॉलेज जाते हैं, अपने फैसले लेने लगते हैं, तब मां-बाप एक तरफ खुश होते हैं और दूसरी तरफ डरते भी हैं। दुनिया में कितने छल-कपट हैं, कहीं मेरा बच्चा गलत रास्ते या गलत लोगों का शिकार न बन जाए।
दोस्त बनाना गलत नहीं है, लेकिन कभी यह मत भूलिए कि आपके पीछे मां-बाप का त्याग और विश्वास खड़ा है।
किसी के साथ चार दिन की दोस्ती क्या उन मां-बाप के वर्षों के त्याग से बड़ी हो सकती है?
बच्चों को एक बार जरूर सोचना चाहिए कि उनका एक गलत फैसला मां-बाप को कितनी पीड़ा दे सकता है।
मां-बाप को पैसों का लालच नहीं होता, उन्हें सिर्फ सम्मान, अपनापन और अपने बच्चों का साथ चाहिए।
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