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चुनाव आयोग (ईसीआई) ने जून 2025 में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) के तहत वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया को शुरू कि...
23/09/2026

चुनाव आयोग (ईसीआई) ने जून 2025 में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) के तहत वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया को शुरू किया था। यह प्रक्रिया बिहार से शुरू हुई थी। एसआईआर के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटा दिए गए हैं। इसे लेकर चुनाव आयोग की आलोचना भी हुई और सवाल उठा कि यह कैसे तय किया जा रहा है कि कौन वोट देगा और कौन नहीं।‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की जांच-पड़ताल में इसे लेकर अहम जानकारियां सामने आई हैं।चुनाव आयोग में तीन सदस्य होते हैं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी शामिल हैं।

जांच-पड़ताल में पता चला है कि इस प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के भीतर ही इसे लेकर सवाल उठाए गए। ये सवाल तीन में से दो चुनाव आयुक्तों- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने उठाए थे।एसआईआर को पूरे देश में लागू करने का काम तीनों चुनाव आयुक्तों की देखरेख में हुआ लेकिन संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार इसे लेकर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई। इसमें एक ही दिन में चार बार इन फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी।

संधू और जोशी के मुताबिक, ये फैसले या आदेश उनकी जानकारी के बिना लिए या जारी किए गए थे।चुनाव आयुक्तों की क्या आपत्तियां थीं? चुनाव आयुक्तों की ये आपत्तियां चुनाव आयोग के मुख्य काम से जुड़ी थीं। जैसे- नए वोटर का रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाना और फिर से जोड़ना, एसआईआर प्रक्रिया में वोटर का नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील करना और पूरी वोटर लिस्ट की सुरक्षा।

इन सभी आपत्तियों की कॉपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार को भी भेजी गई थीं। कुछ आपत्तियां डिप्टी चुनाव आयुक्तों को भी भेजी गई थीं।
ऐसी ही एक लिखित आपत्ति में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने शिकायत की कि चुनाव आयोग ने दो आयुक्तों की लिखित सलाह के खिलाफ काम किया और दावा किया कि यह कदम ‘अनाधिकृत और गैर-कानूनी’ था।इसके बाद भी जोशी और संधू ने कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखकर काम के बंटवारे में किए गए बदलावों की शिकायत की। इन बदलावों से असल में वोटर लिस्ट के लिए आईटी सिस्टम की निगरानी का एक स्तर खत्म हो गया था।
दोनों चुनाव आयुक्तों ने साफ कहा- ये बदलाव उनकी जानकारी के बिना किए गए थे और उन्होंने इन्हें रद्द कर दिया।इसके बाद, 9 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की बैठक हुई। चार महीनों में यह उनकी पहली बैठक थी।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने इस मामले की पड़ताल के दौरान सभी आपत्तियों को देखा और नई दिल्ली, कोलकाता, गोवा और मुंबई में कई अफसरों से बात की। इसका मकसद यह समझना था कि देश में निष्पक्ष चुनाव कराने की संवैधानिक जिम्मेदारी संभालने वाले इस संस्थान के भीतर क्या चल रहा था? यह बात और भी अहम इसलिए है क्योंकि इन तीनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एनडीए सरकार ने ही की थी। इनकी नियुक्ति 2023 के कानून के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता वाले एक सलेक्शन पैनल ने की थी।राहुल गांधी, अधीर रंजन चौधरी ने दर्ज कराई थी असहमतिमार्च, 2024 में जब सुखबीर सिंह संधू और ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयुक्त बनाया गया था, तब कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने नियुक्ति प्रक्रिया पर अपनी असहमति दर्ज कराई थी।

फरवरी, 2025 में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाए जाने और विवेक जोशी की चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति पर असहमति दर्ज कराई थी।

21 सितंबर को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने चुनाव आयोग को कुछ सवाल भेजे और पूछा कि दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए मुद्दों और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए क्या किया गया? लेकिन अखबार को कोई जवाब नहीं मिला। 21 सितंबर को दोनों चुनाव आयुक्तों को ई-मेल भी भेजा गया, जिसमें पूछा गया कि क्या उनकी चिंताओं को हल किया गया?ई-मेल में यह भी पूछा गया था कि क्या 9 सितंबर की बैठक में इन मुद्दों को उठाया गया था? ई-मेल के बाद सोमवार और मंगलवार को फोन भी किए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज कराई गई ये आपत्तियां किसी संवैधानिक संस्था के भीतर चल रहे मतभेदों को दिखाती हैं और इसमें चार बड़े सवाल सामने आए हैं।

इस साल जुलाई में, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने सबसे पहले बताया था कि वोटर बनने के लिए हर बालिग नागरिक को जो फॉर्म भरना होता है, उसमें एक ऐसा सवाल पूछा जाने लगा जो पहले कभी नहीं पूछा गया था।सवाल यह था कि क्या नया वोटर या उसके माता-पिता/दादा-दादी इससे पहले हुए एसआईआर की मतदाता सूची में मौजूद थे। इस सवाल का जवाब देना जरूरी था लेकिन इस साल मई में चुनाव आयुक्त जोशी ने फाइल पर लिखकर इस बात की चेतावनी दी थी कि सरकार द्वारा नियमों में बदलाव किए बिना फॉर्म-6 को इस तरह नहीं बदला जा सकता और संधू ने भी इस बात पर सहमति जताई थी। फिर भी यह बदलाव किया गया।जुलाई में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की ओर से इस बदलाव की खबर दिए जाने के बाद सुखबीर सिंह संधू ने 13 अगस्त को रिकॉर्ड पर कहा कि यह “अनधिकृत और गैरकानूनी” था और कहा कि इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। सोमवार सुबह तक, वह सवाल वहीं मौजूद था।

गिरिराज सिंह पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘हलाल पर भाषण, झटका पर प्रवचन और अब KFC का उद्घ...
23/09/2026

गिरिराज सिंह पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘हलाल पर भाषण, झटका पर प्रवचन और अब KFC का उद्घाटन!’

जमुई मामले को लेकर RJD नेता तेजस्वी यादव ने सीएम सम्राट चौधरी पर हमला करते हुए कहा कि 'CM सम्राट चौधरी ने कहा था कि कोई ...
22/09/2026

जमुई मामले को लेकर RJD नेता तेजस्वी यादव ने सीएम सम्राट चौधरी पर हमला करते हुए कहा कि 'CM सम्राट चौधरी ने कहा था कि कोई किसी को हाथ लगा दे तो वो इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं. अब अगर सम्राट चौधरी अपने जुबान के पक्के हैं तो इस्तीफा दें'.

बिहार के जमुई में छात्रा के साथ हुई दरिंदगी की गूंज अब महाराष्ट्र की सियासत में भी सुनाई दे रही है। इस शर्मनाक घटना और ध...
22/09/2026

बिहार के जमुई में छात्रा के साथ हुई दरिंदगी की गूंज अब महाराष्ट्र की सियासत में भी सुनाई दे रही है। इस शर्मनाक घटना और ध्वस्त कानून-व्यवस्था को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने एनडीए सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा प्रहार किया है।

संजय राउत ने गृहमंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह से बिहार में जोड़ों के साथ छेड़छाड़ हुई है, उसके बाद राज्य सरकार को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में गुंडों की सरकार चल रही है और गुंडों को सत्ता सौंपना अमित शाह का एक नशा बन चुका है। राउत के मुताबिक, प्रदेश में गुंडों की फौज तैयार करके उन्हें सत्ता की ताकत देना एक सोची-समझी साजिश है और देश को जाकर बिहार के असली हालात देखने चाहिए। इस बयान के बाद सियासी घमासान और तेज हो गया है।

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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा हुआ है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि मंदिर के CCTV फुटेज में ...
22/09/2026

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा हुआ है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि मंदिर के CCTV फुटेज में चढ़ावा चोरी की 70 नहीं, 105 घटनाएं कैद हुई हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट को जांच की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि-SIT की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। SIT ने CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य सबूतों की जांच कर आरोपियों की पहचान की है। चढ़ावे और कीमती सामान की रसीदें सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार होती हैं और सामान SBI के लॉकर में रखा जाता है। कोर्ट ने SIT की स्टेटस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर ले लिया है।
इससे पहले 23 जून को पहली SIT ने अपनी प्राइमरी जांच रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अप्रैल से 5 जून के बीच CCTV में लगभग 70 संदिग्ध घटनाएं कैद हुईं थीं।
फुटेज में पुलिस की गिरफ्त में आए 8 आरोपी नोटों की गड्डियां जेब और जूतों में छिपाते हुए दिखे थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दूसरी SIT बनाई गई है, जो जांच कर रही है।

पत्रकार और यूट्यूबर अजित भारती ने उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण और IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाखोड़े की मौत ...
22/09/2026

पत्रकार और यूट्यूबर अजित भारती ने उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण और IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाखोड़े की मौत से जुड़े घटनाक्रम को लेकर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने यूथ फॉर इक्वालिटी के साथ उत्तर प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों में 91% आरक्षण के मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में उठाने का दावा किया। उनके मुताबिक, हाई कोर्ट की आपत्ति के बाद काउंसलिंग नए सिरे से कराने का निर्देश दिया गया, जिसके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है।

इसके बाद उन्होंने IIT बॉम्बे के 19 वर्षीय छात्र साहिल वाखोड़े की मौत का मुद्दा उठाया। परीक्षा में मोबाइल और ChatGPT के कथित इस्तेमाल को लेकर छात्र से पूछताछ हुई थी। IIT बॉम्बे के अनुसार, उसके खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।

अजित भारती ने प्रोफेसर पर SC/ST Act के तहत कार्रवाई और छात्र के परिवार द्वारा लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोपों का जिक्र करते हुए शिक्षा व्यवस्था में छात्रों और शिक्षकों के भरोसे पर सवाल उठाए।

1947 से 2026 तक डॉलर के मुकाबले रुपया: कितनी बदली भारतीय मुद्रा की कीमत?1947 में भारत की आजादी के समय से लेकर 2026 तक अम...
21/09/2026

1947 से 2026 तक डॉलर के मुकाबले रुपया: कितनी बदली भारतीय मुद्रा की कीमत?

1947 में भारत की आजादी के समय से लेकर 2026 तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की विनिमय दर में बड़ा बदलाव आया है। RBI के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में डॉलर की कीमत लगभग ₹3.3 के आसपास थी, जबकि हाल के वर्षों में यह ₹90 से ऊपर पहुंच चुकी है।

सितंबर 2026 में रुपया लगभग ₹95–96 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है। 21 सितंबर को यह लगभग ₹95.79 प्रति डॉलर था।

हालांकि, रुपये की गिरावट को केवल किसी एक सरकार या प्रधानमंत्री के खाते में डालना आर्थिक रूप से सही निष्कर्ष नहीं होगा, क्योंकि विनिमय दर पर तेल की कीमत, वैश्विक डॉलर की मांग, पूंजी प्रवाह, महंगाई, ब्याज दरें और RBI की नीतियों समेत कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। RBI के अनुसार भारत की विनिमय-दर व्यवस्था भी समय के साथ स्थिर/पेग व्यवस्था से प्रबंधित फ्लोट व्यवस्था में बदली है।

ये खूब खाते हैं, खूब खिलाते हैं।भ्रष्टाचार को बढ़ाते हैं।
20/09/2026

ये खूब खाते हैं, खूब खिलाते हैं।

भ्रष्टाचार को बढ़ाते हैं।

20 लाख की फिरौती के लिए अपहरण की खबर मिली, पुलिस ने जांच शुरू की तो करोड़ों की ठगी का मामला सामने आ गया। उत्तर प्रदेश के...
20/09/2026

20 लाख की फिरौती के लिए अपहरण की खबर मिली, पुलिस ने जांच शुरू की तो करोड़ों की ठगी का मामला सामने आ गया। उत्तर प्रदेश के एटा में पुलिस ने फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नाम पर छात्रों से कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

मामला मारहरा थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, 16 सितंबर को रामसेवक नाम के व्यक्ति ने डायल 112 पर सूचना दी कि उसके भाई सतेंद्र कुमार का अपहरण कर लिया गया है और रिहाई के बदले 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी जा रही है। पुलिस ने तलाश शुरू की और सतेंद्र को आगरा से सकुशल बरामद कर लिया।

इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के मुताबिक अपहरण की पूरी कहानी फर्जी निकली। आरोप है कि सतेंद्र ने छात्रों और उनके परिजनों से ली गई रकम वापस करने से बचने के लिए अपने ही अपहरण की साजिश रची थी।

पुलिस का दावा है कि आरोपी मेडिकल से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रमों में एडमिशन कराने और डिग्री-मार्कशीट देने के नाम पर छात्रों से पैसे लेते थे। अब पुलिस पूरे नेटवर्क और ठगी की रकम की जांच कर रही है।

वरिष्ठ पत्रकार अरफा खानम ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ‘किसने सोचा था कि एक दिन मोदी का इस तरह मज़ाक उड़ाया जाएगा। जनता को...
20/09/2026

वरिष्ठ पत्रकार अरफा खानम ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ‘किसने सोचा था कि एक दिन मोदी का इस तरह मज़ाक उड़ाया जाएगा। जनता को अब मोदी जी से कोई डर नहीं है।’

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