Vijay Ki Yatra

Vijay Ki Yatra भगवदगीता अर्थ एवं लघु भावार्थ

07/05/2026
02/05/2026

एकले ईश्वर कृष्ण, आर सब भृत्य।
तारे यैछे नाचाय, से तैछे करें नृत्य।।
अर्थात
केवल श्री कृष्ण सर्वोच्च प्रभु हैं, शेष सभी लोग उनके दास हैं। श्री कृष्ण जैसा चाहते हैं, उसी के अनुसार हर व्यक्ति नाचता है।

Bhagwatam 10.10.10
19/04/2026

Bhagwatam 10.10.10

31/03/2026

BG/18.78
जहां योगेश्वर कृष्ण हैं और जहां परम धनुर्धर अर्जुन है, वहीं ऐश्वर्य, विजय, आलौकिक शक्ति तथा नीति भी निश्चित रूप से रहती है। ऐसा मेरा मत है।
संजय ने रणभूमि में जो हुआ वो सब देखा और सब सुनाया अब उसने निष्कर्ष भी बता दिया कि जिस ओर श्री कृष्ण होंगे वही जीत होगी।
आज श्रीमद्भगवद्गीता यह भावार्थ एवं लघु व्याख्या सम्पूर्ण हो गई है।
। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे 🙏।

30/03/2026

BG/18.77
हे राजन! भगवान् कृष्ण के अद्भुत रूप का स्मरण करते ही मैं अधिकाधिक आश्चर्यचकित होता हूं और पुनः पुनः हर्षित होता हूं।
ऐसा प्रतीत होता है कि व्यास की कृपा से संजय ने भी अर्जुन को दिखाए गए श्री कृष्ण के विराट रूप को देखा था। निसंदेह यह कहा जाता है कि इसके पूर्व भगवान् कृष्ण ने कभी ऐसा रूप प्रकट नहीं किया था। इसको देखने के पश्चात संजय उसे स्मरण करके बार बार आनंदित हो रहे हैं।
।हरे कृष्ण 🙏।

28/03/2026

BG/18.76
हे राजन! जब में कृष्ण और अर्जुन के मध्य हुई इस आश्चर्यजनक तथा पवित्र वार्ता का बारंबार स्मरण करता हूं, तो प्रति क्षण आह्लाद से गदगद हो उठता हूं।
भगवद्गीता का ज्ञान इतना दिव्य है कि जो भी अर्जुन तथा कृष्ण के संवाद को जान लेता है, वह पुण्यात्मा बन जाता है और इस वार्तालाप को भूल नहीं सकता। आध्यात्मिक जीवन की यह दिव्य स्थिति है।
। हरे कृष्ण 🙏।

27/03/2026

BG/18.75
व्यास जी की कृपा से मैंने ये परम गुह्य बातें साक्षात योगेश्वर कृष्ण के मुख से अर्जुन के प्रति कही जाती हुई सुनी।
व्यास जी संजय के गुरु थे और संजय स्वीकार करते हैं कि व्यास जी की कृपा से ही वे भगवान को समझ सके। इसका अर्थ यह हुआ कि गुरु के माध्यम से ही कृष्ण को समझना चाहिए, गुरु स्वच्छ माध्यम है, गुरु प्रमाणिक होना चाहिए।
। हरे कृष्ण 🙏।

26/03/2026

BG.18.74
संजय ने कहा इस प्रकार मैंने कृष्ण तथा अर्जुन इन दोनों महा पुरुषों की वार्ता सुनी। और यह संदेश इतना अद्भुत है कि मेरे शरीर में रोमांच हो रहा है।
प्रारंभ में धृतराष्ट्र ने अपने मंत्री संजय से पूछा था कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में क्या हुआ, गुरु व्यासदेव जी की कृपा से संजय के हृदय में सारी घटना स्फूरित हुई। इस प्रकार उसने युद्धस्थल की समस्त घटनाएं कह सुनाई।
। हरे कृष्ण 🙏।

25/03/2026

BG/18.73
अर्जुन ने कहा हे कृष्ण, हे अच्युत! अब मेरा मोह दूर हो गया। आपके अनुग्रह से मुझे मेरी स्मरण शक्ति वापस मिल गई। अब मैं संशय रहित तथा दृढ़ हूं और आपके आदेशानुसार कर्म करने के लिए उद्यत हूं।
जीव जिसका प्रतिनिधित्व अर्जुन कर रहा है, उसका स्वरूप यह है कि वह परमेश्वर के आदेशानुसार कर्म करे। वह आत्मानुशासन के लिए बना है।
। हरे कृष्ण 🙏।

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