14/08/2026
फिल्म “दीदी” (Didi, 1959) गीतकार साहिर लुधियानवी का यह गीत आज भी इसलिए जीवित है क्योंकि यह सिर्फ देशभक्ति का नारा नहीं लगाता, बल्कि असुविधाजनक सवाल पूछता है और फिर आशा जगाता है। आज के भारत में जहाँ विविधता को कभी ताकत तो कभी कमजोरी बताया जाता है, यह गाना हमें याद दिलाता है – एक डाली पर फूल और पत्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन पेड़ एक ही है।