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 #पुस्तकसमीक्षा तपती धरती - पंकज चतुर्वेदी
08/09/2026

#पुस्तकसमीक्षा

तपती धरती - पंकज चतुर्वेदी

14/08/2026

किताब में महान यात्री व विद्वान राहुल सांकृत्यायन ने मध्य एशिया के इतिहास पर लेखन का मुख्य कारण स्पष्ट किया है। उनके अनुसार, भारत के इतिहास पर प्रचुर साहित्य उपलब्ध है, किंतु भारत और मध्य एशिया के अटूट ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संबंधों को समझने की आवश्यकता थी।

यह पुस्तक बताती है कि सिंधु सभ्यता की द्रविड़ जाति, आर्यों का पहला संपर्क, ग्रीक, शक-कुषाण, हूण और तुर्क-इस्लाम सभी का इतिहास मध्य एशिया से गहराई से जुड़ा है। लेखक का मानना है कि मध्य एशिया के इतिहास को जाने बिना भारतीय इतिहास का अध्ययन अधूरा रहता है, इसलिए उन्होंने इस ऐतिहासिक कड़ी को उजागर करने का प्रयास किया है।

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14/08/2026

किताब 'भगत सिंह की जेल डायरी' के पन्नों के माध्यम से सितंबर 1929 से मार्च 1931 के दौरान जेल में बिताए गए उनके गहन चिंतनशील जीवन की झलक मिलती है। इस दौरान भगत सिंह ने स्वतंत्रता, गरीबी और वर्ग संघर्ष पर अपने क्रांतिकारी विचारों को विस्तार से कलमबद्ध किया।

उनकी डायरी लेनिन, मार्क्स, रवींद्रनाथ टैगोर, बर्ट्रेंड रसेल और गालिब जैसे महान विचारकों और साहित्यकारों के विचारों व उद्धरणों से भरी है। यह पुस्तक टोपी और बंदूक की पारंपरिक छवि से इतर एक तर्कशील दिमाग, प्रखर विचारक और मजबूत समाजवादी सोच वाले वास्तविक भगत सिंह का सजीव परिचय कराती है।

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14/08/2026

'शहादतनामा' किताब का लिंक कमेंट बॉक्स में....

14/08/2026

किताब 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' महान क्रांतिकारी भगत सिंह के निर्भीक विचारों, तर्कसंगतता और स्वतंत्र सोच का एक जीवंत दस्तावेज है।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लिखी गई यह रचना उनकी बौद्धिक क्षमता, वैचारिक दृढ़ता और सत्य के प्रति अटूट निष्ठा को दर्शाती है। यह पुस्तक अंधविश्वास और रूढ़िवादिता को नकारते हुए तर्क और विवेक के आधार पर सोचने की प्रेरणा देती है। यह कृति भारतीय इतिहास, देशभक्ति और क्रांतिकारी विचारधारा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं विचारोत्तेजक पठनीय सामग्री है।

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जो हो, योगी घरबारी और गृहस्थ भी होते हैं । जो योगी कान नहीं फड़वाते वे औघड़ कहलाते हैं । योगियों की एक विशेष वेशभूषा है जि...
09/08/2026

जो हो, योगी घरबारी और गृहस्थ भी होते हैं । जो योगी कान नहीं फड़वाते वे औघड़ कहलाते हैं । योगियों की एक विशेष वेशभूषा है जिसका आगे वर्णन किया गया है । ब्रिग्स और हजारीप्रसाद ने इसपर सविस्तार लिखा है । पं– सुधाकर द्विवेदी ने जायसी की पद्मावत का सम्पादन करते समय योगी वेश का वर्णन किया है और प्रत्येक योगी वेश की विशेषता का उल्लेख किया है । नि:सन्देह यह सज्जा एक अत्यन्त रोचक और आकर्षक रूप है । अब भी कनफटे योगी देश के भिन्न–भिन्न भागों में फैले हुए हैं । अनेक जातियों पर उनका प्रभाव है । उनके अनेक स्थानों पर मठ हैं ।

 #पुस्तकप्रदर्शनीआप सब सादर आमंत्रित हैं।
08/08/2026

#पुस्तकप्रदर्शनी

आप सब सादर आमंत्रित हैं।

कविता मित्र की पंक्तियां अंधकार को जगमग कर दे ,शत्रु की नैया डगमग कर दे । चिलचिलाती धूप में ,जो छाया बनकर राहत देने आएगा...
06/08/2026

कविता मित्र की पंक्तियां

अंधकार को जगमग कर दे ,
शत्रु की नैया डगमग कर दे ।
चिलचिलाती धूप में ,
जो छाया बनकर राहत देने आएगा ।
बंधन वही है मित्रता का ,
और वही मित्र कहलाएगा ।

पुस्तक : मध्य एशिया का इतिहास ( 2 भागों में ) भारत के इतिहास की जगह मध्य एशिया के इतिहास पर मैंने क्यों कलम उठाई, यह प्र...
06/08/2026

पुस्तक : मध्य एशिया का इतिहास ( 2 भागों में )

भारत के इतिहास की जगह मध्य एशिया के इतिहास पर मैंने क्यों कलम उठाई, यह प्रश्न हो सकता है । उत्तर आसान है । भारत के इतिहास पर लिखनेवाले बहुत हैं । जिसका अभाव है, उसकी पूर्ति करना जरूरी था, यही विचार इस प्रयास का कारण हुआ । अपनी यात्राओं में मैं रूस और मध्य एशिया के सम्पर्क में आया, उनके ऊपर कितनी ही पुस्तकें लिखीं और अनुवादित कीं । उसी समय विचार आया, आधुनिक ऐतिहासिक घटनाओं को पिछले इतिहास की पृष्ठभूमि में देखना चाहिए । इस तरफ आगे बढ़ा, तो यह भी मालूम हुआ मध्य एशिया का इतिहास हमारे देश के इतिहास से बहुत घनिष्ठ सम्बन्ध रखता है । द्रविड़़़ (फिनो–द्रविड़़) जातिµजिसने मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के भव्य नगर और यशस्वी सिन्धु–सभ्यता प्रदान कीµका सम्बन्ध मध्य एशिया से भी था । हाल के पुरातात्त्विक अनुसन्धान बतलाते हैं कि आर्यों का सम्पर्क द्रविड़़ जाति से सबसे पहले सिन्धु–उपत्यका में नहीं, बल्कि ख्वारेज्म में हुआ था । वहाँ पराजित करके उनका स्थान ले आर्य भारत की ओर बढ़े । उनका बढ़ाव पिछली विजित भूमि को बिना छोड़े आगे की तरफ होता रहा, इसलिए भारतीय आर्यों की परम्परा में अपने पुराने छोड़े हुए स्थान का उल्लेख नहीं पाया जाता । आर्यों की अनेक लहरों के बाद ग्रीक लोगों ने भी बाख्त्रिया से आकर भारत के कुछ भाग पर शासन किया । शक–कुषाण भी वहाँ से ही होकर आये । तथाकथित हूणµहेफतालµभी मध्य एशिया से भारत की ओर बढ़े । तुर्क और इस्लाम भी वहाँ से चलकर भारत आया । इन शासकों और उनकी जातियों के इतिहास का एक भाग मध्य एशिया में पड़ा रहा, जिसे जाने बिना हम अपने इतिहास को समझने में गलती कर बैठते हैं । इस दृष्टि से भी मुझे इस पुस्तक को लिखने की प्रेरणा मिली । —राहुल सांकृत्यायन

 #नयीआमद वर्ष 2026 की कुछ चुनिंदा पुस्तकें।
06/08/2026

#नयीआमद

वर्ष 2026 की कुछ चुनिंदा पुस्तकें।

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