29/04/2026
🔱 माँ बगलामुखी – स्तंभन शक्ति की अद्भुत महाविद्या 🔱
सृष्टि के एक काल में जब प्रचंड आंधी और तूफ़ान ने तीनों लोकों को कंपा दिया, मंत्र निष्प्रभावी होने लगे और अधर्म की शक्तियाँ बढ़ने लगीं, तब देवताओं ने आदिशक्ति का आह्वान किया। उस समय हर दिशा पीत प्रकाश से भर उठी और उस दिव्य तेज से प्रकट हुईं — माँ बगलामुखी।
उनका स्वरूप शांत अपितु अत्यंत प्रभावशाली था। पीले वस्त्र, स्वर्ण आभा, और अद्वितीय तेज से वे सम्पूर्ण ब्रह्मांड को स्थिर कर देती हैं। उन्होंने अपने दिव्य संकल्प से उस प्रलयकारी तूफ़ान को थाम लिया — यही उनकी स्तंभन शक्ति का प्रथम प्रकट रूप था।
कथा में वर्णन आता है कि एक अत्यंत शक्तिशाली असुर, जिसकी वाणी में ऐसी शक्ति थी कि वह जिसे भी शाप देता, वह तत्काल नष्ट हो जाता। देवता भी उससे भयभीत हो गए। तब माँ बगलामुखी ने उसे युद्ध में पकड़कर उसकी जीभ को रोक दिया। उसी क्षण उसकी शक्ति समाप्त हो गई।
यह दृश्य केवल युद्ध नहीं था, बल्कि एक गूढ़ संकेत था —
वाणी, विचार और क्रिया को नियंत्रित कर लेना ही परम विजय है।
माँ बगलामुखी को “पीताम्बरा देवी” भी कहा जाता है, क्योंकि उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। वे दस महाविद्याओं में से एक हैं और विशेष रूप से शत्रु स्तंभन, वाक् नियंत्रण, न्याय विजय और तांत्रिक साधना के लिए पूजित होती हैं।
🕉️ स्वरूप और प्रतीक
माँ का पीत वर्ण → स्थिरता, शक्ति और तेज का प्रतीक
शत्रु की जिह्वा पकड़ना → वाणी पर पूर्ण नियंत्रण
गदा धारण करना → दुष्ट शक्ति का अंत
कमल आसन → दिव्य शांति और आध्यात्मिक संतुलन
🔱 साधना का महत्व
माँ बगलामुखी की साधना साधक को केवल बाहरी शत्रुओं से ही नहीं बचाती, अपितु भीतर के शत्रुओं — भय, भ्रम, क्रोध, नकारात्मकता — को भी शांत करती है।
जो साधक सच्चे भाव से माँ का स्मरण करता है, उसकी बाधाएँ स्वयं रुकने लगती हैं, विरोधी शक्तियाँ शांत हो जाती हैं और जीवन में विजय का मार्ग खुलता है।
🕉️ दिव्य मंत्र (स्तंभन शक्ति मंत्र)
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय।
जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥
📿 विशेष जानकारी
माँ बगलामुखी की पूजा में पीले वस्त्र, हल्दी, चना दाल, पीले फूल का विशेष महत्व है।
उनका प्रमुख तीर्थ स्थान मध्यप्रदेश के दतिया और हिमाचल के बैंकहण्डी (कांगड़ा) में प्रसिद्ध है।
मंगलवार और गुरुवार को उनकी उपासना अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
साधना में शुद्धता और गुरु मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक माना गया है।
जो भी साधक माँ बगलामुखी की शरण में जाता है, उसके जीवन के तूफ़ान शांत हो जाते हैं।
वाणी में शक्ति आती है, शत्रु स्वयं शांत हो जाते हैं और साधक के भीतर अडिग आत्मबल जागृत हो जाता है।
माँ की कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है… 🔱
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