14/05/2026
BHU से जुड़ी यात्रा
भारत के प्रसिद्ध हार्ट सर्जनों में गिने जाते हैं। लोग उन्हें प्यार से डॉ. टी.के. लाहिड़ी भी कहते हैं।
वे लंबे समय तक Banaras Hindu University के Sir Sunderlal Hospital में Cardiothoracic Surgery विभाग से जुड़े रहे। �
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उन्हें भारत सरकार द्वारा Padma Shri सम्मान भी मिला था, चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए। �
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वे हार्ट बाईपास, वाल्व सर्जरी और जटिल हृदय ऑपरेशन के विशेषज्ञ माने जाते हैं।
वाराणसी और पूर्वांचल में गरीब मरीजों की मदद और सरल जीवनशैली के कारण उनकी काफी सम्मानजनक छवि है। कई लोग उन्हें “गरीबों के डॉक्टर” भी कहते हैं। �
Tapan Kumar Lahiri भारत के उन महान डॉक्टरों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन गरीब मरीजों की सेवा में लगा दिया। लोग उन्हें “BHU के भगवान डॉक्टर” भी कहते हैं।
📚 डॉ. तपन कुमार लाहिड़ी की पढ़ाई
उनका जन्म कोलकाता (पुराना नाम कलकत्ता) में हुआ था।
उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई करके MBBS किया।
इसके बाद उन्होंने हार्ट और छाती की सर्जरी में विशेषज्ञता हासिल की।
वे आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए और वहाँ से:
FRCS (Cardiac Surgery) — 1969
M.Ch (Thoracic Surgery) — 1972
की डिग्री प्राप्त की। �
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उस समय विदेश से इतनी बड़ी डिग्री लेना बहुत कठिन माना जाता था। उनके पास विदेश में नौकरी और बहुत पैसा कमाने के अवसर थे, लेकिन उन्होंने भारत लौटकर गरीब लोगों की सेवा करना चुना। �
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🏥 BHU से जुड़ा जीवन
उन्होंने Banaras Hindu University के Institute of Medical Sciences में काम शुरू किया।
धीरे-धीरे वे:
Lecturer
Reader
Professor
और Cardiothoracic Surgery विभाग के Head बने। �
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उन्होंने हजारों हार्ट सर्जरी कीं और कई गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज किया।
💔 गरीबी और सादगी भरा जीवन
डॉ. लाहिड़ी खुद बहुत सादा जीवन जीते थे।
वे बड़ी गाड़ी, बंगला या आलीशान जीवन नहीं चाहते थे।
कई रिपोर्टों के अनुसार वे रोज पैदल अस्पताल जाते थे, हाथ में एक बैग और काला छाता रखते थे। �
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उन्होंने शादी भी नहीं की और पूरा जीवन मरीजों की सेवा में लगा दिया। �
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सबसे बड़ी बात:
1994 से उन्होंने अपनी पूरी सैलरी गरीब मरीजों की मदद के लिए दान करनी शुरू कर दी।
रिटायरमेंट के बाद भी अपनी पेंशन का बड़ा हिस्सा गरीबों के इलाज में देते रहे। �
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वे सिर्फ उतना पैसा रखते थे जिससे दो समय का साधारण खाना खा सकें।
🏅 सम्मान
भारत सरकार ने उनकी सेवा भावना के लिए उन्हें 2016 में
Padma Shri से सम्मानित किया। �
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🌟 लोग उन्हें भगवान क्यों कहते हैं?
क्योंकि:
वे गरीब मरीजों से फीस नहीं लेते थे,
जरूरत पड़ने पर अपनी जेब से दवा दिलाते थे,
और कभी पैसे को महत्व नहीं दिया।
वाराणसी में आज भी बहुत लोग उन्हें “धरती का भगवान” मानते हैं। �
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