17/08/2025
सोचिए, अगर आपके घर की बेटी, बहन या माँ अचानक लापता हो जाए तो परिवार पर क्या बीतेगी?पिछले हफ्ते संसद में पेश किए गए केंद्रीय गृह मंत्रालय के आँकड़े चौंकाने वाले हैं।
👉 सिर्फ एक साल (2023 से 2024) के बीच, 10,61,648 महिलाएँ (18 साल से ऊपर) और 2,51,430 लड़कियाँ (18 साल से कम) देशभर से लापता हो गईं।
👉 यानी हर दिन हज़ारों घरों की हँसी-खुशी मातम में बदल रही है।
👉 और यह समस्या सबसे ज़्यादा मध्य प्रदेश में है, जहाँ 2023 से 2025 के बीच 1,60,180 महिलाएँ और 38,234 लड़कियाँ लापता हो गईं।
ये आँकड़े केवल नंबर नहीं हैं, ये टूटते परिवारों की चीख़ हैं।
हर आँसू के पीछे एक सवाल है – कहाँ हैं हमारी बेटियाँ? कौन उनकी सुरक्षा की गारंटी लेगा?
आज ज़रूरत है कि हम सब मिलकर इस मुद्दे पर आवाज़ उठाएँ।
👉 सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति को आगे आना होगा।
👉 पड़ोस की बेटी को अपनी बेटी समझना होगा।
👉 गुमशुदा मामलों की रिपोर्टिंग को गंभीरता से लेना होगा।
क्योंकि जब तक हम चुप रहेंगे, तब तक आँकड़े बढ़ते रहेंगे और हमारी बेटियाँ गायब होती रहेंगी।
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यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है।
आपकी एक छोटी सी कोशिश, किसी की बेटी को उसके घर पहुँचा सकती है।