03/06/2026
70 साल में पहली बार देश का सोना बेचकर सरकार अपने खर्चे चलाने और अर्थतंत्र को मज़बूत करने की कोशिश कर रही है।परंपरागत रूप से घर का सोना बेचना कंगाली और बदहाली की तरफ़ इशारा करता है।ये तब है जब स्वयम प्रधानमंत्री जी जनता से सोना ना ख़रीदने के लिए कह चुके हैं।
दरअसल, मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी तनाव की आंच केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास रखे सोने तक पहुंच गई है। इस तनाव के कारण भारत पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों को बचाने के लिए रिजर्व बैंक ने अपने सोने के भंडार का एक हिस्सा बेच दिया है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स (BE) की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के वरिष्ठ भारत अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता के अनुसार, RBI ने 22 मई को समाप्त हुए दो हफ्तों के भीतर लगभग 12 अरब डॉलर (करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये) मूल्य का सोना बेचा है। इसी अवधि के दौरान केंद्रीय बैंक ने 7.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां खरीदीं। हालांकि इस मामले पर अभी तक रिजर्व बैंक की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
रिपोर्ट में किए ये दावे
• रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार द्वारा कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बावजूद सोने के भंडार के मूल्य में यह गिरावट देखी गई।
• सामान्य परिस्थितियों में आयात शुल्क बढ़ने से बैंक के बुलियन और डॉलर की वैल्यू बढ़नी चाहिए थी। ऐसा न होना इस बात का पुख्ता संकेत है कि RBI ने सोने की बिक्री की है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा रुपये को स्थिर करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हालिया हस्तक्षेपों के कारण 20 मई को रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरने के बाद से रुपये ने अन्य एशियाई मुद्राओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।