31/05/2026
सोलर पैनल गर्मी से नहीं बल्कि सूरज की रोशनी से बिजली पैदा करते हैं। जब सूरज की रोशनी के कण, जिन्हें फोटॉन्स कहा जाता है, सोलर पैनल के सिलिकॉन सेल्स से टकराते हैं, तो वे सेल्स में मौजूद इलेक्ट्रॉन्स को गति देते हैं और इसी प्रक्रिया से बिजली पैदा होती है, जिसे विज्ञान में फोटोवोल्टिक इफेक्ट कहा जाता है। चूंकि सोलर पैनल एक इलेक्ट्रॉनिक और सेमीकंडक्टर उपकरण हैं, इसलिए वे ठंडे, साफ और धूप वाले मौसम में सबसे ज्यादा कुशलता से काम करते हैं, क्योंकि कम तापमान में उनके अंदरूनी कंपोनेंट्स का वोल्टेज आउटपुट बढ़ जाता है। इसके विपरीत, जब तापमान 25°C से ऊपर जाने लगता है, तो अत्यधिक गर्मी के कारण पैनल के अंदर के इलेक्ट्रॉन्स बहुत ज्यादा उत्तेजित होकर अव्यवस्थित गति करने लगते हैं, जिससे पैनल का वोल्टेज गिर जाता है और उसकी बिजली बनाने की क्षमता प्रति डिग्री सेल्सियस लगभग 0.3% से 0.5% तक कम हो जाती है, जिसे तकनीकी भाषा में 'टेंपरेचर कोइफिशिएंट' कहते हैं। यही कारण है कि सर्दियों के साफ धूप वाले दिन सोलर पैनलों के लिए सबसे आदर्श होते हैं, जबकि गर्मियों की अत्यधिक तपिश उनकी कार्यक्षमता को थोड़ा घटा देती है।