Sant Marg India

Sant Marg India संत मार्ग की असली शिक्षाएँ — सरल, स्पष्ट और सत्य रूप में।
सत्य • साधना • शांति

26/03/2026

राधा नाम में कैसी शक्ति है? क्यों सब खिंचे चले आते हैं | Premanand Ji

क्या सच में कोई ऐसी शक्ति है
जो हर किसी को अपने पास खींच लेती है?

इस दिव्य और रहस्यमय प्रवचन में
Premanand Ji Maharaj
बताते हैं कि राधा कुंज में कोई बाहरी चुंबक नहीं,
बल्कि “राधा नाम की शक्ति” ही सबको आकर्षित करती है।

महाराज जी कहते हैं —
👉 “राधा” ये दो अक्षर ही ऐसे हैं
जो स्वयं भगवान को भी आकर्षित कर लेते हैं
👉 जहाँ राधा नाम का निरंतर जप और कीर्तन होता है,
वहाँ दिव्य ऊर्जा स्वतः प्रकट होती है

वे समझाते हैं —

राधा नाम से प्रेम जागृत होता है
धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष भी तुच्छ लगने लगते हैं
महापुरुषों का संग, कीर्तन और सेवा
इस आकर्षण को और बढ़ा देते हैं

👉 यही कारण है कि जो एक बार इस भाव में आता है,
वह फिर उसी में रम जाता है।

🙏 इस प्रवचन का सार:

राधा नाम में अपार आकर्षण शक्ति है
नाम-जप से भगवान का सान्निध्य मिलता है
कीर्तन और संत संग से भक्ति बढ़ती है
सच्चा आनंद केवल नाम में है

कोई चुंबक नहीं…
ये तो राधा नाम का चमत्कार है।











🌸 राधा केलि कुंज में कौन सी “चुंबक” लगी है? 🌸महाराज जी कहते हैं —लोग पूछते हैं —👉 “ऐसा क्या है वहाँ,कि जो एक बार आता है…...
26/03/2026

🌸 राधा केलि कुंज में कौन सी “चुंबक” लगी है? 🌸

महाराज जी कहते हैं —

लोग पूछते हैं —
👉 “ऐसा क्या है वहाँ,
कि जो एक बार आता है…
वहीं का हो जाता है?”

उत्तर बहुत सरल है…

💫 वहाँ कोई भौतिक चुंबक नहीं…
वहाँ “राधा नाम” की शक्ति है।

🔥 राधा नाम की महिमा

महाराज जी कहते हैं —

🌸 “राधा… राधा…”
ये केवल दो अक्षर हैं…

लेकिन —
👉 ये परमात्मा को भी आकर्षित कर लेते हैं।

कहा गया है —

👉 जहाँ “राधा” नाम का उच्चारण होता है,
वहाँ श्री कृष्ण स्वयं आकर्षित होकर आ जाते हैं।

💖 क्यों खिंचता है मन वहाँ?

क्योंकि वहाँ —

✨ 24 घंटे राधा नाम की गूंज होती है
✨ निरंतर कीर्तन और भजन होता है
✨ संतों का संग और वाणी होती है
✨ महापुरुषों का चरित्र सुनाया जाता है
✨ हर क्षण भगवत भाव जीवित रहता है

ये सब मिलकर
एक ऐसा वातावरण बनाते हैं —

👉 जो आत्मा को अपनी ओर खींच लेता है

🧠 सबसे गहरी बात

जब राधा नाम में प्रेम जागता है —

👉 धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष
ये चारों पुरुषार्थ भी छोटे लगने लगते हैं

क्योंकि उससे भी बड़ा आनंद
भगवत प्रेम में है।

❤️ अंतिम सत्य

कोई जादू नहीं है…
कोई रहस्य नहीं है…

🌸 यह सब “राधा नाम” का चमत्कार है।

👉 जो इसे पकड़ लेता है —
वह वहीं का हो जाता है।

✨ इसलिए…
अगर खिंचना है —

बस एक काम करो —

🌺 “राधा… राधा…” 🌺

— परम पूज्य प्रेमानंद जी महाराज 🙏✨











25/03/2026

ऐसा अपराध जिसे भगवान भी माफ नहीं करते! वैष्णव अपराध का सच | Premanand Ji

क्या सच में कोई ऐसा अपराध है
जिसे भगवान भी क्षमा नहीं करते?

इस अत्यंत गंभीर और चेतावनी भरे प्रवचन में
Premanand Ji Maharaj
बताते हैं कि साधु या वैष्णव का अपमान
सबसे बड़ा और भयानक अपराध माना गया है।

महाराज जी कहते हैं —
👉 साधु का अपमान करने से वर्षों के पुण्य नष्ट हो सकते हैं
👉 वैष्णव की निंदा, अपमान या दिल दुखाना अत्यंत घातक है
👉 इस अपराध का फल बहुत कठोर होता है

वे स्पष्ट करते हैं —

अन्य पापों के प्रायश्चित हो सकते हैं
लेकिन साधु अपराध का निवारण केवल उसी संत की क्षमा से होता है

👉 यदि जिस भक्त को दुख दिया,
वह क्षमा कर दे — तभी मुक्ति संभव है

🙏 इस प्रवचन का सार:

साधु/वैष्णव का अपमान सबसे बड़ा अपराध है
यह पुण्यों को नष्ट कर सकता है
इस पाप से बचना अत्यंत आवश्यक है
हमेशा संतों का सम्मान और आदर करें

भक्ति का मार्ग आसान है…
पर साधु अपराध इसे कठिन बना देता है।











⚠️ सबसे भयानक अपराध — साधु/वैष्णव अपराध ⚠️महाराज जी कहते हैं —ऐसा एक अपराध है…जो कई जन्मों के पुण्यएक क्षण में नष्ट कर द...
25/03/2026

⚠️ सबसे भयानक अपराध — साधु/वैष्णव अपराध ⚠️

महाराज जी कहते हैं —

ऐसा एक अपराध है…
जो कई जन्मों के पुण्य
एक क्षण में नष्ट कर देता है —

👉 साधु/वैष्णव अपराध

❗ यह अपराध कैसे होता है?

अगर किसी संत या भक्त के प्रति —

❌ अपमान कर दिया
❌ निंदा कर दी
❌ दिल दुखा दिया
❌ अन्याय किया

तो यह बहुत बड़ा दोष बन जाता है।

🔥 इसका प्रभाव कितना भयानक है?

👉 पापों का तो प्रायश्चित हो सकता है…
👉 लेकिन भक्त अपराध बहुत भारी होता है

कहा गया है —

🌸 “साधु अवज्ञा तुरत भवानी…”

👉 साधु का अपमान —
सीधे पतन का कारण बनता है

👉 पुण्य नष्ट हो जाते हैं
👉 जीवन में कष्ट बढ़ जाते हैं

⚠️ सबसे महत्वपूर्ण बात

👉 इस अपराध का क्षमा भगवान भी सीधे नहीं करते

तो फिर कैसे होगा?

💫 जिस भक्त का दिल दुखाया है —
वही अगर क्षमा कर दे…
तभी यह अपराध मिटेगा।

🧠 इसलिए क्या करें?

👉 कभी भी
किसी संत या भक्त की निंदा न करें

👉 अगर कहीं निंदा हो रही हो —
तो वहाँ से हट जाएं

👉 सबमें भगवान का अंश समझकर
सम्मान रखें

❤️ अंतिम संदेश

🌿 भक्ति मार्ग में सबसे बड़ी सावधानी —
किसी का दिल न दुखे।

👉 विशेषकर
भगवान के भक्त का

क्योंकि —

🔥 भक्त का दिल दुखाना
सबसे भारी अपराध है।

— परम पूज्य प्रेमानंद जी महाराज 🙏✨












24/03/2026

गंभीर बीमारी में भजन नहीं हो रहा? अंतिम समय का सच्चा उपाय | Premanand Ji

जब शरीर बीमार हो जाए…
और मन बार-बार बीमारी में उलझ जाए…
तब भजन कैसे करें?

इस अत्यंत गहरे और जागरूक करने वाले प्रवचन में
Premanand Ji Maharaj
समझाते हैं कि यह शरीर नाशवान है,
और मृत्यु निश्चित है — आज नहीं तो कल।

महाराज जी कहते हैं —
👉 शरीर पर अभिमान करना सबसे बड़ी भूल है
👉 बीमारी हमें सच का एहसास कराती है
👉 हर सांस को भगवान के नाम में लगाना ही सच्ची तैयारी है

वे बताते हैं —
अगर जीवन का अंतिम क्षण भी
भगवान के नाम के साथ बीते,
तो वही मनुष्य जीवन सफल हो जाता है।

👉 “एक बार ‘राधा’ कहकर प्राण त्याग दिए…
तो भगवत प्राप्ति संभव है।”

🙏 इस प्रवचन का सार:

शरीर नाशवान है, आत्मा शाश्वत है
मृत्यु निश्चित है, इसलिए तैयारी जरूरी है
हर सांस में नाम-जप ही सबसे बड़ा साधन है
बीमारी भी भक्ति की ओर ले जाने का अवसर है

जीवन लंबा नहीं…
सार्थक होना चाहिए।











🌿 गंभीर बीमारी में भजन नहीं हो रहा? यह बात जरूर सुनो… 🌿जब शरीर बीमार होता है…तो मन बार-बार उसी की तरफ जाता है —👉 “क्या ह...
24/03/2026

🌿 गंभीर बीमारी में भजन नहीं हो रहा? यह बात जरूर सुनो… 🌿

जब शरीर बीमार होता है…
तो मन बार-बार उसी की तरफ जाता है —
👉 “क्या होगा?”
👉 “कितना समय बचा है?”

और भजन में मन नहीं लगता… 😔

💫 महाराज जी क्या कहते हैं?

👉 यह शरीर नाशवान है।

कभी भी…
किसी का भी…
कोई भी अंग फेल हो सकता है।

जो लोग शरीर पर अभिमान करते हैं —
वे बहुत बड़ी भूल करते हैं।

🧠 असली बात (बहुत गहरी)

👉 हमें लंबा जीवन नहीं चाहिए…
सार्थक जीवन चाहिए।

अगर कोई व्यक्ति —

🌸 केवल एक मिनट भी जिए…
और “राधा” नाम लेते हुए प्राण त्याग दे —

तो उसका जीवन सफल हो गया।

❤️ तो अब क्या करें?

👉 जितनी सांसें बची हैं…
उन्हें नाम जप में लगा दो।

“राधा… राधा…”
“राम… राम…”
“कृष्ण… कृष्ण…”
“हरि… हरि…”
“शिव… शिव…”

जो भी नाम गुरुदेव से मिला है —
उसी को पकड़ लो।

⚠️ एक सच्चाई

👉 जिनको कोई बीमारी नहीं होती,
उन्हें भी अचानक हार्ट अटैक आ जाता है…

👉 कोई खाते-खाते चला जाता है…
👉 कोई हँसते-हँसते चला जाता है…

यह मृत्यु लोक है…
यहाँ सबको जाना है।

🔥 सबसे जरूरी तैयारी

👉 मौत से डरना नहीं…
👉 मौत के लिए तैयार होना सीखो।

कैसे?

🌸 नाम जप करके
🌸 भगवान का स्मरण करके

🕊️ अंतिम संदेश

हम सब इस दुनिया में
कुछ ही दिनों के मेहमान हैं…

👉 रावण जैसा बलवान भी चला गया
👉 हिरण्यकश्यप जैसा वरदानी भी चला गया

तो हम क्यों भूल रहे हैं?

✨ भज लो श्री भगवान…
यही सबसे बड़ी तैयारी है।

— परम पूज्य प्रेमानंद जी महाराज 🙏✨












23/03/2026

कौन क्या कहता है, मत सोचो! अपनी राह चलो | Premanand Ji Maharaj

दुनिया क्या कहेगी…
लोग क्या सोचेंगे…
इसी में उलझकर हम अपना जीवन खो देते हैं।

इस जागरूक करने वाले प्रवचन में
Premanand Ji Maharaj
समझाते हैं कि संसार कभी किसी को एक जैसा नहीं देखता।

👉 एक व्यक्ति आपकी तारीफ करेगा
👉 दूसरा आपकी आलोचना करेगा

तो फिर किसकी सुनें?

महाराज जी कहते हैं —
👉 अपनी मस्ती में रहो, भगवान का चिंतन करो
👉 अच्छे कर्म करो, परोपकार करो
👉 किसी की बातों में उलझकर अपना मार्ग मत छोड़ो

वे चेतावनी देते हैं —

गलत करोगे तो निंदा होगी
अच्छा करोगे तो उपहास होगा

👉 इसलिए दुनिया के अनुसार नहीं,
अपने धर्म और भक्ति के अनुसार चलो।

🙏 इस प्रवचन का सार:

संसार की बातें कभी खत्म नहीं होंगी
दूसरों की सोच पर जीवन मत चलाओ
भक्ति और अच्छे कर्म पर ध्यान दो
सफाई देने में जीवन मत गंवाओ

दुनिया अपनी कहेगी…
तुम अपने मार्ग पर चलते रहो।











🌿 कौन क्या कहता है, इसमें मत उलझो! 🌿महाराज जी कहते हैं —यह दुनिया ऐसी है किकभी भी किसी को एक जैसा नहीं देखती।👉 एक व्यक्त...
23/03/2026

🌿 कौन क्या कहता है, इसमें मत उलझो! 🌿

महाराज जी कहते हैं —

यह दुनिया ऐसी है कि
कभी भी किसी को एक जैसा नहीं देखती।

👉 एक व्यक्ति आपकी तारीफ करेगा…
👉 दूसरा आपकी निंदा करेगा…

अब अगर आप हर किसी की सुनने लग गए —
तो जीवन कभी स्थिर नहीं रहेगा।

🧠 सच्चाई क्या है?

❗ अगर आप गलत काम करेंगे —
तो लोग बुरा कहेंगे

❗ अगर आप अच्छा काम करेंगे —
तो भी लोग मजाक उड़ाएंगे

👉 “अरे, बड़े भगत बन गए…”
👉 “तिलक लगा लिया, माला पहन ली…”

इसलिए —

💡 संसार को खुश करना असंभव है।

💫 तो क्या करें?

🌸 अपनी मस्ती में रहो

👉 गलत काम मत करो
👉 अच्छे कर्म करो
👉 परोपकार करो
👉 भगवान का चिंतन करो

बाकी —

🗣️ लोग क्या कहते हैं…
उन्हें कहने दो

⚠️ एक बड़ी गलती

हम बार-बार
अपनी सफाई देने लगते हैं…

👉 “मैं ऐसा नहीं हूँ…”
👉 “मैंने ये नहीं किया…”

और यहीं से
परेशानी शुरू होती है।

❤️ महाराज जी का सीधा संदेश

✨ ना सफाई दो…
ना उलझो…
बस अपने मार्ग पर चलो।

👉 जो तुम्हें अच्छा कहे — उसकी मर्जी
👉 जो तुम्हें बुरा कहे — उसकी मर्जी

तुम बस —

🌿 भगवान के मार्ग पर चलते रहो।

🔥 अंतिम बात

यह जीवन कुछ ही दिनों का है…

👉 इसे लोगों की बातों में मत गंवाओ
👉 इसे भगवान के नाम में लगाओ

🌸 अपनी मस्ती में रहो…
और भजन करते रहो।

— परम पूज्य प्रेमानंद जी महाराज 🙏✨












22/03/2026

क्या भगवान इंसानों के रूप में मदद करते हैं? सच्ची घटना | Premanand Ji

क्या सच में भगवान
किसी इंसान के रूप में हमारी मदद करते हैं?

इस अद्भुत और सच्ची घटना में
Premanand Ji Maharaj
बताते हैं कि कैसे एक अनजान व्यक्ति ने
ऐसी स्थिति में सहायता की, जहाँ कोई रास्ता नहीं दिख रहा था।

महाराज जी बताते हैं —
ट्रेन में टिकट की समस्या के बीच
एक बिल्कुल अपरिचित व्यक्ति आया,
बिना किसी पहचान, बिना किसी अपेक्षा के मदद की
और फिर चला गया।
👉 यह संकेत है कि
जब कोई बिना स्वार्थ, बिना पहचान,
अचानक सहायता करता है —
तो वह परमात्मा की भेजी हुई सहायता हो सकती है।

वे समझाते हैं —
जो व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के मदद करे
जिससे हमारा कोई परिचय न हो
और जो अचानक आकर समस्या हल कर दे

👉 वह ईश्वर का माध्यम हो सकता है।

🙏 इस प्रवचन का सार:

भगवान सीधे नहीं, माध्यम से सहायता करते हैं
सच्ची सहायता निस्वार्थ और अप्रत्याशित होती है
हर स्थिति में ईश्वर पर विश्वास रखें
हर मदद के पीछे ईश्वर की योजना हो सकती है

कभी-कभी भगवान…
इंसानों के रूप में ही आपकी मदद करने आते हैं।










🌿 क्या भगवान इंसानों के रूप में हमारी मदद करते हैं? 🌿महाराज जी एक सुंदर अनुभव बताते हैं —जब वे यात्रा में थे,महोबा से वा...
22/03/2026

🌿 क्या भगवान इंसानों के रूप में हमारी मदद करते हैं? 🌿

महाराज जी एक सुंदर अनुभव बताते हैं —

जब वे यात्रा में थे,
महोबा से वाराणसी जा रहे थे…

ट्रेन में बैठे,
लेकिन टिकट जनरल की थी
और सीट किसी और डिब्बे में मिल गई।

थोड़ी देर बाद
चेकिंग शुरू हुई… 🚨

अधिकारी ने पूछा —
👉 “जनरल टिकट है, यहाँ कैसे बैठे?”
👉 “और ये टिकट तो केवल 3 स्टेशन की है…”

स्थिति कठिन हो गई…

तभी —

एक अजनबी व्यक्ति ऊपर से उतरा…
उसने अधिकारी से बात की…
कुछ पैसे दिए…
और सही टिकट बनवाकर दे दी।

फिर बोला —
👉 “महाराज, अब आप निश्चिंत होकर जाइए…”

और वह चला गया…

💫 महाराज जी कहते हैं —

👉 वह व्यक्ति कोई साधारण नहीं था…
👉 वह परमात्मा द्वारा भेजा गया सहायक था।

🧠 पहचान कैसे करें?

महाराज जी बताते हैं —

🌸 जो व्यक्ति —
✔️ बिल्कुल अपरिचित हो
✔️ जिससे आपका कोई संबंध न हो
✔️ जिसके लिए आपने कोई योजना या इच्छा न बनाई हो

और वह अचानक आकर
आपकी मदद कर दे —

👉 समझो, वह भगवान का भेजा हुआ माध्यम है।

⚠️ और जो अपने होते हैं?

👉 जिनसे आपका परिचय है
👉 जिनसे आपने अपेक्षा रखी है

वो आपकी मदद करें —
तो वह सामान्य संबंध है।

❤️ अंतिम सत्य

💫 भगवान सीधे नहीं आते…
लेकिन वे किसी न किसी रूप में मदद जरूर करते हैं।

👉 कभी किसी इंसान के रूप में
👉 कभी किसी परिस्थिति के रूप में

इसलिए —

🌸 हर मदद के पीछे
भगवान की कृपा को पहचानो।

— परम पूज्य प्रेमानंद जी महाराज 🙏✨












21/03/2026

क्या संत भी क्रोध करते हैं? क्रोध और आवेश का सच | Premanand Ji

क्या संत भी क्रोध करते हैं?
या उनका क्रोध कुछ और ही होता है?

इस महत्वपूर्ण प्रवचन में
Premanand Ji Maharaj
समझाते हैं कि सच्चे संत के भीतर क्रोध नहीं, केवल आवेश होता है।

महाराज जी कहते हैं —
👉 संत का “क्रोध” वास्तव में सुधार के लिए होता है
👉 वह केवल बाहरी रूप से कठोर दिख सकता है
👉 लेकिन अंदर से उनके हृदय में कोई द्वेष या नफरत नहीं होती

वे स्पष्ट करते हैं —

संत का आवेश क्षणिक होता है
उसमें किसी का अहित नहीं होता
वह केवल शिष्य को सही मार्ग पर लाने के लिए होता है

इसके विपरीत —
👉 सामान्य व्यक्ति का क्रोध

अंदर से जलाता है
द्वेष, नफरत और हिंसा पैदा करता है
स्वयं को और दूसरों को नुकसान पहुंचाता है

🙏 इस प्रवचन का सार:

संत का आवेश = सुधार का माध्यम
सामान्य क्रोध = विनाश का कारण
क्रोध त्यागने योग्य है
शांति और करुणा ही सच्चा मार्ग है

संत का आवेश सुधारता है…
और हमारा क्रोध बिगाड़ता है।











🌿 क्या संत भी क्रोध करते हैं? 🌿महाराज जी कहते हैं —👉 सच्चे संत “क्रोध” नहीं करते…वे “आवेश” दिखाते हैं।जब कोई शिष्य या अन...
21/03/2026

🌿 क्या संत भी क्रोध करते हैं? 🌿

महाराज जी कहते हैं —

👉 सच्चे संत “क्रोध” नहीं करते…
वे “आवेश” दिखाते हैं।

जब कोई शिष्य या अनुयायी
धर्म के विरुद्ध आचरण करता है,
तो संत कभी-कभी कठोर बोलते हैं…

लेकिन ध्यान रखना —

❗ यह अंदर का क्रोध नहीं होता
❗ यह सुधार के लिए किया गया आवेश (नाटक) होता है

💫 संत का आवेश कैसा होता है?

✔️ बाहर से कठोर
✔️ अंदर से पूर्ण करुणा

👉 वे डांटते हैं…
👉 थोड़ा भय भी दिखाते हैं…

लेकिन —

❌ उनके हृदय में द्वेष नहीं होता
❌ वे कभी किसी का बुरा नहीं सोचते
❌ किसी का अहित नहीं चाहते

⚠️ और असली क्रोध कैसा होता है?

❌ अंदर से जलाता है
❌ दूसरे के लिए बुरा सोचता है
❌ द्वेष, नफरत और हिंसा पैदा करता है

👉 क्रोध में इंसान
खुद भी जलता है
और दूसरों को भी जलाता है।

यहाँ तक कि —
क्रोध बढ़ते-बढ़ते हिंसा तक पहुंच जाता है।

🧠 सबसे बड़ी सीख

🌸 आवेश (संतों का) — सुधार के लिए होता है
🔥 क्रोध (साधारण मनुष्य का) — विनाश के लिए होता है

❤️ अंतिम संदेश

👉 क्रोध त्यागने योग्य है
👉 यह खुद का और दूसरों का नुकसान करता है

और अगर कभी संत डांट दें —
तो समझना…

💫 वह उनके प्रेम का रूप है,
न कि द्वेष का।

— परम पूज्य प्रेमानंद जी महाराज 🙏✨












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