29/03/2026
रक्तदान के नाम पर काला खेल: क्या फ्री में दिया गया खून बन रहा है कारोबार?
देशभर में हर दिन सैकड़ों रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं।
इन शिविरों में लोग बिना किसी स्वार्थ के, इंसानियत के नाम पर अपना खून दान करते हैं ताकि जरूरतमंदों की जान बचाई जा सके।
लेकिन हाल के कुछ मामलों ने इस नेक काम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप सामने आ रहे हैं कि जो खून लोग मुफ्त में दान करते हैं, वही खून बाद में ब्लड बैंकों या अस्पतालों में हजारों रुपये में बेचा जा रहा है।
रक्तदान शिविरों का उद्देश्य हमेशा से समाज सेवा रहा है। स्कूल, कॉलेज, धार्मिक संस्थाएं और सामाजिक संगठन मिलकर ऐसे कैंप लगाते हैं,
जहां लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। दान करने वाले व्यक्ति को यह भरोसा होता है कि उसका खून किसी जरूरतमंद मरीज की जान बचाने में इस्तेमाल होगा, न कि किसी के मुनाफे का जरिया बनेगा।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ जगहों पर अलग नजर आती है। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि एक यूनिट खून, जो दानदाताओं से मुफ्त में लिया जाता है, उसे प्रोसेसिंग और अन्य खर्चों के नाम पर 4000 से 6000 रुपये तक में मरीजों को दिया जाता है।
सवाल यह नहीं है कि प्रोसेसिंग का खर्च क्यों लिया जा रहा है, बल्कि यह है कि क्या यह वाजिब है या इसके नाम पर अनावश्यक मुनाफाखोरी हो रही है?
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लड को सुरक्षित रखने, जांच करने और स्टोर करने में कुछ खर्च जरूर आता है। लेकिन यह भी सच है कि इस प्रक्रिया की एक तय सीमा होनी चाहिए।
जब यह कीमत जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो यह सेवा नहीं बल्कि व्यापार का रूप ले लेती है। सबसे ज्यादा परेशानी उन गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को होती है,
जिन्हें आपातकाल में खून की जरूरत पड़ती है और उन्हें भारी रकम चुकानी पड़ती है।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लिए यह एक गंभीर विषय है। जरूरत है कि ब्लड बैंकों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए।
हर यूनिट खून की लागत, प्रोसेसिंग फीस और वितरण की पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए ताकि कोई भी संस्था इसका गलत फायदा न उठा सके।
साथ ही, रक्तदान शिविर आयोजित करने वाले संगठनों को भी जागरूक होना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस ब्लड बैंक को वे खून दे रहे हैं, वह उसका सही और नैतिक उपयोग करे।
दानदाताओं का विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी है, क्योंकि अगर यह विश्वास टूटता है तो लोग रक्तदान से पीछे हट सकते हैं।
रक्तदान एक महान कार्य है, लेकिन अगर इसके नाम पर मुनाफाखोरी होती रही, तो यह समाज के लिए एक खतरनाक संकेत होगा।
समय रहते इस पर नियंत्रण और निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि इंसानियत का यह काम हमेशा पवित्र बना रह