20/06/2025
मध्य पूर्व की धरती पर फिर से खून की नदियाँ बह रही हैं। तेहरान की गलियों में बमों की गड़गड़ाहट, तेल अवीव के आसमान में मिसाइलों की चीख, और बीच में फँसी मासूम ज़िंदगियाँ, जो हर धमाके के साथ टूट रही हैं। 13 जून 2025 को जब ईरान ने तेल अवीव पर 100 से ज़्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, तो वो सिर्फ़ शहरों को नहीं, बल्कि माँओं के दिल, बच्चों के सपने, और परिवारों की उम्मीदों को भी निशाना बना रही थीं। इस युद्ध में मरने वाले 78 ईरानी और 70 घायल इजराइली सिर्फ़ आँकड़े नहीं—ये वो लोग हैं, जिनके घर बारूद की भेंट चढ़ गए।
ये लेख सिर्फ़ युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि उस दर्द की चीख है, जो सत्ता, तेल और हथियारों के लालच में दब रही है। हम आक्रामक और निष्पक्ष होकर उन चेहरों से नकाब उतारेंगे, जो इस आग में घी डाल रहे हैं। क्योंकि जब मासूमों का खून बहता है, तो चुप रहना गुनाह है।
मध्य पूर्व की धरती पर फिर से खून की नदियाँ बह रही हैं। तेहरान की गलियों में बमों की गड़गड़ाहट, तेल अवीव के आसमान में ....