31/05/2026
कई बार लोग कहते हैं — "सारे नेता एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं।"
आज मुझे लगा कि शायद लोगों की बात में थोड़ा-बहुत दम भी होता है! 😄
दोपहर को एक निजी कार्यक्रम से फ्री होकर मैं डीडवाना पहुंचा और सीधे सोलंकी मिष्ठान भंडार जा पहुंचा। दुकान में घुसते ही ओम जी सोलंकी ने फरमान सुना दिया — "इमरान जी, आज ताज़ा केसर कलाकंद बना है, बिना खाए जाने नहीं दूंगा
अब मैं कलाकंद की पहली खुराक ही खत्म कर पाया था कि तभी किस्मत ने ऐसा खेल खेला कि मेरे सबसे बड़े वैचारिक विरोधियों में से एक भी दुकान पर आ धमके। मैं सोच ही रहा था कि अब माहौल गरम होगा, लेकिन ओम जी ने राजनीति को सीधे मिठाई के काउंटर पर ही निपटा दिया
उन्होंने दोनों के हाथ में कलाकंद का टुकड़ा पकड़ाते हुए कहा — "लो भाई, अब तो गठबंधन हो गया।"
हम दोनों एक-दूसरे का मुंह देखने लगे और ओम जी पूरे आत्मविश्वास से बोले — "इस कलाकंद में इतनी मिठास है कि बड़े-बड़े राजनीतिक मतभेद पिघल जाते हैं।"
फिर उन्होंने दूसरा बम फोड़ा — "जब बड़े नेता शाम को एक ही टेबल पर बैठकर चाय पी लेते हैं, तो तुम लोग क्यों ऐसे लड़ते हो जैसे कल चुनाव नहीं, महाभारत हो?"
उस समय मुझे लगा कि अगर देश की सारी राजनीतिक समस्याओं का समाधान किसी के पास है, तो वो संसद में नहीं, बल्कि सोलंकी मिष्ठान भंडार की मिठाई की ट्रे में छुपा बैठा है! 😆
अब देखना यह है कि ओम जी का यह केसर कलाकंद सिर्फ मुंह मीठा करता है या फिर सच में रिश्तों में भी मिठास घोल देता है
हालांकि राजनीति में भरोसा कम और बयान ज्यादा बदलते हैं, इसलिए फिलहाल तो इतना ही कह सकता हूं कि
आज का गठबंधन कलाकंद तक सीमित है, आगे की राजनीति अगली प्लेट मिठाई पर तय होगी! 😂🍮🤝
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