02/02/2026
नौवीं मंज़िल का वो Flat… और अंदर सड़ती हुई एक खामोशी, जो 4 दिन बाद बदबू बनकर बाहर आई।
1999, कोलकाता का पॉश Ballygunge इलाक़ा। 48 साल की पूर्व मॉडल लीना सेन अकेली, अलग रह रही थी, और एक ऐसा रिश्ता जो शक और जलन के cocktail से ज़हर बन चुका था।
3 जुलाई को जब पुलिस ने दरवाज़ा तोड़ा, तो रसोई के फ़र्श पर मिली एक नग्न, सड़ी हुई लाश। लाश को देखकर पता चल रहा था की गला घोंटा गया था, दुपट्टा मुँह में ठूँसकर।
शक गया उसके पति पर, प्रदीप (P.K.) सेन, एक नामी एड एजेंसी का सीनियर एग्ज़िक्यूटिव पर। वो बोला: “मैं फ्लैट में गया ही नहीं।” लेकिन पूछताछ में उसके मुँह से निकल गया एक ऐसा विवरण, सिंगापुर से खरीदी गई खास लांजरी, जो कोई तभी जान सकता था, जब उसने लीना को उस हालत में देखा हो।
कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं। कोई सीसीटीवी नहीं। सिर्फ़ हालात, शक, और एक “Slip of Tongue”। Basically circumstantial evidence |
2001 में कोर्ट ने इसे काफ़ी माना और पति को उम्रकैद की सजा सुनाई गई ।
👉 आपके हिसाब से — क्या सिर्फ़ हालात और एक ज़ुबानी गलती किसी को उम्रकैद दिलाने के लिए काफ़ी है?
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