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खान सर का विवादित बयान और बहस  आईएएस अधिकारियों की आलोचना करते हुए खान सर ने हाल ही में कहा: “आईएएस देश नहीं बदल सकते… य...
12/03/2026

खान सर का विवादित बयान और बहस
आईएएस अधिकारियों की आलोचना करते हुए खान सर ने हाल ही में कहा: “आईएएस देश नहीं बदल सकते… ये केवल अच्छे ‘एग्जीक्यूटर’ हैं; उनसे कुछ नया करने की उम्मीद करना रेगिस्तान में पानी खोजने जैसा है”. उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि होमी भाभा, विक्रम साराभाई, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, एम.एस. स्वामीनाथन, वेरगीस कुरियन आदि ने देश को बदलने वाले काम किए, और ये सभी आईएएस अधिकारी नहीं थे. उनका तर्क है कि बड़े अविष्कार और पहल तो इनोवेटर्स और वैज्ञानिकों की ही रही है, जबकि आईएएस अधिकारी तो बस शासनादेशों को लागू करते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और उदाहरण
वास्तव में इतिहास में कई बड़े वैज्ञानिक और क्रांतिकारी नेता नौकरशाही से बाहर रहे हैं (जैसा खान सर ने नाम लिए)। होमी भाभा और विक्रम साराभाई ने परमाणु और अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किए, अब्दुल कलाम ने मिसाइल का विकास किया, एम.एस. स्वामीनाथन ने हरित क्रांति लाई, वेरगीस कुरियन ने AMUL का मॉडल तैयार किया. ये उदाहरण दिखाते हैं कि तकनीकी और वैज्ञानिक नवाचार में अक्सर ऐसी शख्सियतों का हाथ रहा है जो प्रशासनिक सेवाओं से नहीं आई थीं।
दूसरी ओर, कई आईएएस अधिकारियों ने भी सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण पहल की हैं। उदाहरण स्वरूप, उत्तर प्रदेश के राज यादव ने पाँच सिक्किम गांवों को गोद लेकर 7,500 से अधिक लोगों की जिंदगी बदली, और मिजोरम की डिप्टी कमिश्नर शशांक आला ने स्कूलों में पोषण उद्यान (न्यूट्रिशन गार्डन) खोलकर कुपोषण से लड़ाई छेड़ी. तमिलनाडु के कलेक्टर संदीप नंदूरी ने विकलांग कर्मचारियों के लिए “कैफे एबल” चलाकर सामाजिक सशक्तिकरण का मॉडल पेश किया. इस प्रकार के ठोस काम दिखाते हैं कि आईएएस अधिकारी भी सामाजिक सुधार की बड़ी योजनाएं चला सकते हैं।

बहस और निष्कर्ष
इस बहस में दोनों पक्ष के तर्क हैं। खान सर सही कहते हैं कि प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक नवाचार में नेताओं व वैज्ञानिकों की अहम भूमिका रही है और नौकरशाही में ऐसा बड़ा ‘क्रांतिकारी विचार’ कम ही देखने को मिलता है. दूसरी ओर, आईएएस अधिकारी कानून बनाने और नीतियों को लागू करने में महत्वपूर्ण हैं। सरकारी योजनाओं (जैसे ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा) के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका से करोड़ों की जिंदगी बेहतर हुई है. उदाहरण के लिए, बीटर इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि हमारे ‘अज्ञात बाबुओं’ की मेहनत से बहुत से लोग लाभान्वित हुए हैं. अतः “आईएएस देश नहीं बदल सकते” इतना कठोर नहीं कहा जा सकता – देश चलाने के लिए मजबूत प्रशासन जरूरी है, जबकि नवाचार और दृष्टिकोण बदलने के लिए वैज्ञानिक व उद्यमी मिलकर कार्य करते हैं। खान सर का बयान इसीलिए प्रबल प्रतिक्रियाएं खींच रहा है: यह दर्शाता है कि अच्छी सरकारी नीतियों के साथ-साथ नवीन सोच भी समान रूप से अहम है। दोनों तरह के नेताओं की आवश्यकता है ताकि विकास के निर्णय भी हों और उनके क्रियान्वयन को गति मिले.

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