11/12/2025
पुलिस की गलती से युवक की ज़िंदगी खतरे में:
देशभर में पुलिस पर जनता भरोसा इसलिए करती है क्योंकि वही न्याय प्रक्रिया की पहली सीढ़ी होती है। लेकिन जब कानून की रक्षा करने वाली संस्था ही किसी निर्दोष को झूठे केस में फँसा दे, तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, पूरे समाज की हार होती है।
ताज़ा मामला मंदसौर का है, जहाँ पुलिस अधिकारियों ने एक छात्र के बैग में अफीम रखकर उसे अपराधी बना दिया। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और सुनवाई के बाद एसपी ने भी माना कि पुलिसकर्मियों ने गलत किया।
यह सिर्फ एक केस नहीं, एक बड़ी सामाजिक समस्या है
जब
पुलिस बिना जांच सच्चाई बनाए,
किसी सेट प्लान के तहत सबूत गढ़े,
निर्दोष को अपराधी घोषित कर दे,
तो यह सिर्फ कानून का दुरुपयोग नहीं, बल्कि समाज के अधिकारों का हनन है।
हाईकोर्ट का कहना बिल्कुल स्पष्ट है -
कानून जनता की सुरक्षा के लिए है, न कि किसी बेगुनाह को फँसाने के लिए।
अगर अदालतें ऐसे मामलों में कठोर रुख न अपनाएँ, तो
पुलिस की जवाबदेही खत्म हो जाएगी,
आम आदमी का भरोसा टूट जाएगा,
और अपराध की जगह सत्ता का दुरुपयोग
झूठे केस का असर सिर्फ आरोपी पर नहीं पड़ता, बल्कि-
उसके परिवार की प्रतिष्ठा खत्म हो जाती है
भविष्य अंधकार में चला जाता है
आर्थिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान हो जाता है
और सबसे बड़ी बात-
निर्दोष पर ध्यान लगाने में असली अपराधी बच निकलते हैं।
आगे क्या होना चाहिए?
पुलिस विभाग में पारदर्शिता
सभी मामलों की निष्पक्ष जांच
गलत साबित होने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
फील्ड में बॉडी कैमरा अनिवार्य
कोर्ट के निर्देशों का पालन
यह जरूरी है ताकि फिर किसी निर्दोष की जिंदगी पुलिस की गलती से बर्बाद न हो।
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