09/09/2025
भारत के उपराष्ट्रपति होंगे सीपी राधाकृष्णन, सांसदों के भारी समर्थन से चुनाव जीता
सत्ता पक्ष को मिले उम्मीद से अधिक मत
सीपी राधाकृष्णन को मिले 452 मत, जबकि विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को 300 मत हासिल हुए।
नई दिल्ली। अशोक शर्मा
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सीपी राधाकृष्णन अब भारत के उपराष्ट्रपति होंगे। उन्होंने मंगलवार 9 सितंबर को हुए मतदान में सीपी राधाकृष्णन ने सांसदों के भारी समर्थन से चुनाव जीता। सीपी राधाकृष्णन को 452 मत (करीब 60 फीसदी) मिले, जबकि विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को 300 मत हासिल हुए। सत्ता पक्ष को मिले उम्मीद से अधिक मत मिले। जबकि विपक्ष ने दावा किया कि पिछले चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार को मात्र 26 फीसदी मत प्राप्त हुए थे जबकि इस बार करीब 40 फीसदी मत मिले हैं। जबकि 788 में से 767 सांसदों करीब 97 फीसदी ने मतदान किया। इस प्रकार से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति पद का चुनाव जीत गए हैं।
उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान के दौरान कुल 767 वोट डाले गए, 752 वैध और 15 अवैध थे। लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर भारत की संसद में कुल 788 सांसद होते हैं। वर्तमान में दोनों सदनों को मिलाकर 7 सीटें रिक्त हैं। इस तरह कुल 781 सांसदों को वोट करना था, जिसमें से 13 वोटिंग में शामिल नहीं हुए। इनमें बीआरएस के 4, बीजेडी के 7, अकाली दल के 1 और 1 निर्दलीय सांसद ने वोट नहीं डाला। एनडीए 427 सांसदों ने वोट किया।
राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी ने पत्रकार वार्ता में कहा, एनडीए उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को प्रथम वरीयता के 452 मत मिले। उन्हें भारत का उपराष्ट्रपति चुना गया है। विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जस्टिस सुदर्शन रेड्डी को प्रथम वरीयता के 300 मत मिले।' उपराष्ट्रपति चुनाव में कुल 13 सांसदों ने मतदान नहीं किया।
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तीसरी बार स्वयंसेवक उपराष्ट्रपति चुने गए
चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बतौर स्वयंसेवक की।सीपी राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्टूबर, 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ।
सीपी राधाकृष्णन 1974 में भाजपा के पूर्ववर्ती संगठन, भारतीय जनसंघ की राज्य समिति के सदस्य बने। वर्ष 1996 में, राधाकृष्णन को बीजेपी तमिलनाडु का सचिव नियुक्त किया गया, जिसके बाद वे 1998 में कोयंबटूर से लोकसभा सदस्य चुने गए और 1999 में पुनः निर्वाचित हुए। वह उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार घोषित होने से पहले 31 जुलाई, 2025 तक महाराष्ट्र के 24वें राज्यपाल के रूप में कार्यरत रहे। इससे पहले, उन्होंने फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। मार्च और जुलाई 2024 के बीच, उन्होंने तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। राधाकृष्णन इससे पहले झारखंड, तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। 2004 से 2007 तक, राधाकृष्णन तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष रहे और उन्होंने 93 दिनों तक चली 19,000 किलोमीटर की 'रथ यात्रा' का नेतृत्व भी किया। राधाकृष्णन को 2016 से 2020 तक केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कोच्चि स्थित कॉयर बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और वे चार वर्षों तक इस पद पर रहे। उनके कार्यकाल के दौरान, भारत से कॉयर निर्यात 2532 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। वे 2020 से 2022 तक केरल में भाजपा के अखिल भारतीय प्रभारी भी रहे।