23/05/2025
मदीने की फिजा का क्या कहना यारों,
हर सांस इबादत, हर लम्हा करार
ना जाने क्यों दिल मदीने को चल देता है,
वो सुकून और कहीं नज़र ही नहीं आता है।
रोज़ा-ए-अक़दस की है जब भी तसवीर निगाहों में,
आँखें भीग जाती हैं, रूह महक जाती है साँसों में।
#मदीनाशरीफ