Islamic bate

Islamic bate islam ek aisa dharm hai jo ki islam ki salne firne ka tarika dekh ke aam log pasand kare.. par afsos

07/05/2026

सही हदीस

07/05/2026

तुममें सबसे अच्छा वह है, जिसका अख़्लाक़ (व्यवहार) सबसे अच्छा हो।"
(सहीह बुखारी: 6035)

05/05/2026

तुम ज़मीन वालों पर रहम करो, आसमान वाला (अल्लाह) तुम पर रहम करेगा।"
(सुनन अबू दाऊद: 4941)

अल्कोहल युक्त परफ्यूम का उपयोग:​नाम: लुत्फ़ुर रहमानगांव: खारशिठा, नलबाड़ी​प्रश्न: वर्तमान में जिन परफ्यूम में अल्कोहल मि...
18/04/2026

अल्कोहल युक्त परफ्यूम का उपयोग:
​नाम: लुत्फ़ुर रहमान
गांव: खारशिठा, नलबाड़ी
​प्रश्न: वर्तमान में जिन परफ्यूम में अल्कोहल मिला होता है, क्या उनका उपयोग करना जायज़ है?
​उत्तर: जिन सेंट (Scent) या परफ्यूम में अंगूर, किशमिश या खजूर से बनी अल्कोहल का मिश्रण नहीं होता है, वे "नापाक" (अशुद्ध) नहीं होते हैं। इसलिए ऐसे परफ्यूम का उपयोग करना जायज़ है।
(फ़तावा कासिमिया, खंड: 24, पृष्ठ: 206)

गाँव: जा पिया, कामरूप​प्रश्न: मुफ्ती साहब—क्या कैरम खेलना जायज है?​उत्तर: अगर बाजी लगाकर (शर्त के साथ) खेला जाए—तो यह जु...
17/04/2026

गाँव: जा पिया, कामरूप
​प्रश्न: मुफ्ती साहब—क्या कैरम खेलना जायज है?
​उत्तर: अगर बाजी लगाकर (शर्त के साथ) खेला जाए—तो यह जुए में बदल जाने के कारण कैरम खेलना हराम है। यह 'गुनाह-ए-कबीरा' (बड़ा पाप) है। क्योंकि पवित्र कुरान मजीद में जुआ खेलने की मनाही है।
(सूरा अल-मायदा, आयत नंबर-90)
​यदि कैरम खेलने की आदत बना ली जाए और इससे नमाज के प्रति लापरवाही पैदा हो, तब भी कैरम खेलना हराम है। यह जायज नहीं है।
​अगर बिना किसी शर्त या बाजी के सामान्य रूप से खेला जाए—तो यह 'मक़रूहे तहरीमी' (वर्जित के करीब) है।
​(दारुल उलूम देवबंद: उत्तर संख्या 41631) मुफ्ती अमजद अली २४ जिलहज १४४६ हिजरी
६ आषाढ़ १९४७ (असमिया कैलेंडर)
२१ जून २०२५ अंग्रेजी

17/04/2026

मुफ्ती साहब—क्या कैरम खेलना जायज है?
उत्तर: अगर बाजी लगाकर (शर्त के साथ) खेला जाए—तो यह जुए में बदल जाने के कारण कैरम खेलना हराम है। यह 'गुनाह-ए-कबीरा' (बड़ा पाप) है। क्योंकि पवित्र कुरान मजीद में जुआ खेलने की मनाही है।
(सूरा अल-मायदा, आयत नंबर-90)
​यदि कैरम खेलने की आदत बना ली जाए और इससे नमाज के प्रति लापरवाही पैदा हो, तब भी कैरम खेलना हराम है। यह जायज नहीं है।
​अगर बिना किसी शर्त या बाजी के सामान्य रूप से खेला जाए—तो यह 'मक़रूहे तहरीमी' (वर्जित के करीब) है।
​(दारुल उलूम देवबंद: उत्तर संख्या 41631) मुफ्ती अमजद अली २४ जिलहज १४४६ हिजरी
६ आषाढ़ १९४७ (असमिया कैलेंडर)
२१ जून २०२५ अंग्रेजी

22/02/2026
19/02/2026
19/02/2026

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