04/11/2025
दीपोत्सव की शुभकामना।
आज इस दिवाली पुनः एक कहानी कहता हूँ भारत के उस समृद्ध इतिहास की जिसके आधार पर ये सब उत्सव हैं।
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं यह ओंकारेश्वर मंदिर के पास के सूर्य मंदिर की है, मैंने समझा था की यह समय की धार में कहीं खो गया पर कुछ दिन पहले ओंकारेश्वर से भक्त प्रदीप जी ने इसकी वीडियो बनायी, मुझे भी भेजी और जब मै ओंकार क्षेत्र के लाखों सालों के सनातन इतिहास को खोज रहा था तब मैंने इस सूर्य मंदिर के बारे में बहुत पढ़ा था, यह मंदिर ही था जहाँ से प्रणाम करके आप श्री क्षेत्र ओंकार जी की परिक्रमा आरंभ करते थे।
आज इसकी दुर्दशा देखकर बहुत दुख हुआ, हम भारत के समृद्ध इतिहास की बात करते हैं, पर इस समृद्ध इतिहास के साक्ष्यों के बाबत हम ऐसे दुर्व्यवहार करते हैं जैसे विधर्मियों ने किया था।
भारत में जहाँ करोड़ों की सड़कें और खरबों के डैम बन गए क्या इस मंदिर की सुरक्षा के लिए हम कुछ नहीं कर सकते ? मैं तो आज तक भारत के उस पुरातत्व विभाग के कार्य ना समझ पाया। क्या आप समझे ? ओंकारेश्वर मध्य भारत के सबसे पुराने धर्म स्थलों से हैं और जहाँ आज भी इतिहास के अनेक साक्ष्य हैं, पर कोई भी ध्यान देने वाला कहाँ हैं ? पूरा ओंकार पर्वत ऐसे साक्ष्यों से भरा पड़ा है पर . . .
जब अंग्रेज़ इस क्षेत्र में आए थे तो इस सूर्य मंदिर के बारे में १८९७ में लिखा, एक कथानक तो यह है की यही मंदिर है जहाँ इंद्र देव ने मांधाता जी को स्वास्थ्य और संरक्षण का आशीर्वाद दिया था।
आज इस दिवाली में सब यह संकल्प लें की भारत के सनातन साक्ष्यों के बाबत हम दीपक जलाते रहेंगे, इनकी चेतना है तो भारत के लाखों करोड़ो वर्षों की चेतना है, नहीं तो फिर इस भारत का इतिहास और धर्म हम दोनों से विमुख जो जाएँगे।
अब आप जब ओंकार जी के दर्शन करने जायें तो पूछें कहाँ हैं सूर्य मंदिर, जाएँ, अपने धर्म स्थलों को आपने अगर रिक्त किया तो भारत का सनातन समृद्ध इतिहास भी हमसे छूटता चला जाएगा। ऐसे अनेक धर्म स्थल है जो भक्तों का, और संरक्षण का बस समय देख रहे हैं। युगों से हर एक समय ने अपने से पुरानी इतिहास का संरक्षण किया क्यों भारत आज इससे पीछे हट रहा है ?
#सनातनसाक्ष्य