15/03/2026
प्रश्न : मुझे नहीं पता मेरा इष्ट कौन है, इष्ट का चुनाव कैसे करूं? 🙏
उत्तर :
यह सवाल हर उस साधक के मन में आता है जो आध्यात्मिक मार्ग पर चलना शुरू करता है। इष्ट का चुनाव करना कोई मुश्किल काम नहीं है, लेकिन इसे समझदारी और संवेदनशीलता से करना जरूरी है। आइए इसे बहुत सरल भाषा में समझते हैं —
पहली बात — इष्ट क्या है?
इष्ट का मतलब है — जो आपको सबसे ज्यादा प्रिय हो, जिसके प्रति आपके मन में स्वाभाविक खिंचाव हो, जिसका नाम सुनते ही आपका मन शांत हो जाए। इष्ट कोई चुनने की चीज नहीं है, यह तो महसूस करने की चीज है। जैसे किसी को मिठाई में रसगुल्ला पसंद है तो किसी को जलेबी, यह कोई तय नहीं करता, यह अपने आप पता चल जाता है।
दूसरी बात — यह मत सोचो कि कौन सा देवता बड़ा है
बहुत से लोग यह सोचते हैं कि कौन सा देवता बड़ा है, कौन ज्यादा शक्तिशाली है। यह सोचना गलत है। सभी देवता एक ही परमात्मा के अलग-अलग रूप हैं। जैसे पानी एक ही है, चाहे वह गिलास में हो या बोतल में या नदी में। वैसे ही परमात्मा एक है, चाहे वह राम के रूप में हो या कृष्ण के रूप में या शिव के रूप में।
इसलिए यह मत सोचो कि कौन बड़ा है, यह सोचो कि तुम्हारा मन किसकी ओर ज्यादा खिंचता है।
तीसरी बात — इष्ट चुनने के आसान तरीके
अब बात करते हैं कि इष्ट का चुनाव कैसे करें। यहां कुछ आसान तरीके दिए जा रहे हैं —
🌺 देखो किसकी कहानी अच्छी लगती है — बचपन में तुम्हें राम की कहानी अच्छी लगती थी या कृष्ण की? शिव की कथा सुनकर मन रोमांचित होता था या दुर्गा की? जिसकी कहानी सुनकर तुम्हारा मन खुश हो जाता है, वही तुम्हारे करीब है।
🌺 किसका मंदिर देखकर मन शांत होता है — किसी भी मंदिर में जाओ और देखो कि किस देवता के सामने खड़े होकर तुम्हारा मन सबसे ज्यादा शांत होता है। जहां मन ठहर जाए, समझ लो वही तुम्हारे इष्ट हैं।
🌺 किसका नाम लेकर सुकून मिलता है — राम-राम कहो, कृष्ण-कृष्ण कहो, शिव-शिव कहो, दुर्गा-दुर्गा कहो। देखो किस नाम को सुनकर तुम्हारे हृदय में सुकून की लहर दौड़ जाती है। जिस नाम से मन भर जाए, वही तुम्हारा नाम है।
🌺 किसके गुण तुम्हें आकर्षित करते हैं — राम में मर्यादा है, कृष्ण में चातुर्य है, शिव में त्याग है, दुर्गा में शक्ति है, सरस्वती में ज्ञान है, लक्ष्मी में समृद्धि है। देखो कि तुम्हारे अंदर कौन से गुण ज्यादा हैं या तुम कौन से गुण अपने अंदर लाना चाहते हो।
चौथी बात — एक छोटा सा प्रयोग करो
अगर अभी भी समझ में न आए तो एक छोटा सा प्रयोग करो —
एक शांत जगह पर बैठो। आंखें बंद करो। धीरे-धीरे गहरी सांस लो। अब एक-एक करके सभी देवताओं के नाम लो — राम, कृष्ण, शिव, दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, हनुमान, गणेश। देखो कि किस नाम पर तुम्हारा मन सबसे ज्यादा एकाग्र होता है, किस नाम पर तुम्हारे हृदय में गर्माहट आती है।
जिस नाम पर तुम्हारा मन टिक जाए, समझ लो वही तुम्हारे इष्ट हैं।
पाँचवीं बात — जल्दबाजी मत करो
इष्ट का चुनाव करने में जल्दबाजी मत करो। कुछ दिनों तक सभी देवताओं की पूजा करो, सभी के भजन सुनो, सभी के मंदिर जाओ। धीरे-धीरे तुम्हें खुद पता चल जाएगा कि तुम्हारा मन किसकी ओर ज्यादा जाता है।
छठी बात — सबसे महत्वपूर्ण बात
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इष्ट कोई बाहर की चीज नहीं है। इष्ट तो तुम्हारे अपने मन की वह श्रद्धा है, वह प्रेम है, जो तुम्हें परमात्मा से जोड़ता है। चाहे तुम राम को मानो या कृष्ण को, असली चीज तो तुम्हारा प्रेम है।
इसलिए ज्यादा मत सोचो। मन को देखो, हृदय को सुनो। वहीं तुम्हारा इष्ट बैठा है।
जय श्री राम 🙏 जय श्री कृष्ण 🙏 हर हर महादेव 🙏 जय माता दी 🙏 राधे राधे 🙏