05/06/2026
हाईराइज इमारतें बढ़ीं, लेकिन क्या उतनी ही बढ़ी फायर सेफ्टी? नोएडा की घटना ने खड़े किए बड़े सवाल
नोएडा के सेक्टर-75 स्थित एक हाईराइज अपार्टमेंट में लगी आग ने एक बार फिर शहरी सुरक्षा व्यवस्था और फायर फाइटिंग सिस्टम की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। आग इमारत की 12वीं मंजिल पर लगी थी, लेकिन फायर ब्रिगेड की हाइड्रोलिक व्यवस्था और सीढ़ियां केवल 6वीं मंजिल तक ही प्रभावी ढंग से पहुंच पा रही थीं। नतीजा यह रहा कि आग बुझाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
यह घटना सिर्फ एक अपार्टमेंट में लगी आग नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए चेतावनी है जो रोजाना ऊंची-ऊंची इमारतों में रह रहे हैं। सवाल यह है कि जब आग 12वीं मंजिल पर लगी हो और फायर ब्रिगेड का पानी 6वीं मंजिल तक ही पहुंच पा रहा हो, तो आपात स्थिति में लोगों की जान कैसे बचाई जाएगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई शहरों में तेजी से हाईराइज बिल्डिंगों का निर्माण तो हो रहा है, लेकिन उसी अनुपात में अग्निशमन संसाधनों और सुरक्षा मानकों को मजबूत नहीं किया जा रहा। कई स्थानों पर फायर एनओसी मिलने के बाद भी सुरक्षा उपकरणों का नियमित ऑडिट नहीं होता। वहीं फायर ब्रिगेड के पास पर्याप्त ऊंचाई तक पहुंचने वाले आधुनिक उपकरणों की भी कमी देखने को मिलती है।
नोएडा की इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या फायर विभाग के पास इतनी ऊंची इमारतों में लगने वाली आग से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं? क्या बिल्डरों द्वारा लगाए गए फायर सेफ्टी सिस्टम नियमित रूप से काम कर रहे हैं? और सबसे बड़ा सवाल, क्या हाईराइज इमारतों में रहने वाले लोग वास्तव में सुरक्षित हैं?
गौरतलब है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई और अन्य महानगरों में बड़ी संख्या में लोग 15 से 40 मंजिल तक की इमारतों में रह रहे हैं। ऐसे में यदि किसी ऊपरी मंजिल पर आग लगती है और राहत-बचाव दल समय पर वहां तक नहीं पहुंच पाता, तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती है।
नोएडा की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि केवल गगनचुंबी इमारतें खड़ी कर देना विकास नहीं है। जब तक उनके अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक फायर फाइटिंग उपकरण और नियमित निगरानी सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक ऐसी इमारतें लोगों के सपनों का आशियाना कम और संभावित खतरा ज्यादा साबित हो सकती हैं।