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लक्ष्मी-हरि स्मृति उपन्यास सम्मान अपर्ण समारोह 2026जाल (उपन्यास)क विमोचन एवं सच्चिदानंद सच्चू केँ सम्मान अर्पण अध्यक्षता...
20/09/2026

लक्ष्मी-हरि स्मृति उपन्यास सम्मान
अपर्ण समारोह 2026

जाल (उपन्यास)क विमोचन एवं सच्चिदानंद सच्चू केँ सम्मान अर्पण

अध्यक्षता : मणींद्र नाथ ठाकुर
सान्निध्य : ज्ञानतोष कुमार झा
प्रमुख वक्ता : तारानंद वियोगी, देवशंकर नवीन, कमलानंद झा
सम्मानित लेखकक वक्तव्य
'जनम जुआ मति हारहु' पर बिपिन कुमार शर्मा
संचालन : शुभेंदु शेखर

स्थान : सभागार, आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज, धौला कुआँ, नई दिल्ली

दिनांक : 28 सितम्बर, 2026, अपराह्न 5 बजे सँ

कार्यक्रम के बाद भोजन 7:30 बजे सँ

संगहि अंतिका प्रकाशनक महत्त्वपूर्ण पुस्तकक प्रदर्शनी सेहो रहत।
एहि अवसर पर मित्र-परिजन सहित अपने लोकनि सादर आमंत्रित छी।

निवेदक
गौरीनाथ
श्रीधरम

प्रेस-विज्ञप्ति“लक्ष्मी-हरि स्मृति उपन्यास सम्मान 2026" ‘जाल’ उपन्यास लेल सच्चिदानंद सच्चू कें देल जायत  नई दिल्ली, 09 अ...
09/08/2026

प्रेस-विज्ञप्ति

“लक्ष्मी-हरि स्मृति उपन्यास सम्मान 2026" ‘जाल’ उपन्यास लेल सच्चिदानंद सच्चू कें देल जायत


नई दिल्ली, 09 अगस्त, 2026। “लक्ष्मी-हरि स्मृति उपन्यास सम्मान 2026" ‘जाल’ उपन्यास लेल मैथिलीक महत्त्वपूर्ण उपन्यासकार सच्चिदानंद सच्चू कें देल जायत। तीन सदस्यीय निर्णायक-मंडलक सर्वसम्मति सँ लेल गेल निर्णयक अनुसार आमंत्रित पांडुलिपिक आधार पर देल जायवला ‘लक्ष्मी-हरि स्मृति उपन्यास सम्मान’ मैथिलीक महत्त्वपूर्ण उपन्यासकार आ पत्रकार सच्चिदानंद सच्चू कें हुनकर उपन्यास ‘जाल’ लेल 28 सितंबर, 2026 कें नई दिल्ली मे आयोजित सम्मान-अर्पण कार्यक्रम मे देल जायत। ई घोषणा ‘लक्ष्मी-हरि स्मृति उपन्यास सम्मान सह कथेतर गद्य सम्मान’क संयोजक, लेखक-संपादक गौरीनाथ द्वारा निर्णायक-मंडलक ऑनलाइन मीटिंगक बाद कयल गेल अछि। कथेतर गद्य मे कोनो पांडुलिपि सम्मान आकि प्रकाशन योग्य नहि पाओल गेल। ज्ञातव्य अछि जे एहि सम्मानक आरंभ मैथिली-हिन्दीक लेखक श्रीधरम आ हुनकर पत्नी प्रोमिला अपन माता-पिता महालक्ष्मी आ हरिदास जीक स्मृति मे 2021 मे कयने छलाह। हरिदासक आत्मकथा ‘जनम जुआ मति हारहु’ मूल मैथिली आ हिन्दी मे ‘अंतिका प्रकाशन’ सँ प्रकाशित आ चर्चित अछि। एहि वर्षक निर्णायक-मंडल मे महत्त्वपूर्ण आलोचक कमलानंद झा, वरिष्ठ कवि केदार कानन आ युवा कवि लेखक राम नरेश यादव शामिल छलाह।

एहि योजनाक अंतर्गत अंतिका प्रकाशन द्वारा सम्मान लेल चयनित भेल कृतिक प्रकाशन सेहो कयल जाइत अछि। प्रकाशित पुस्तकक लेखकीय प्रतिक संग सम्मान स्वरूप 21,000 टाका, स्मृति-चिह्न, मानपत्र आ अंगवस्त्र 28 सितंबर कें आयोजित एक टा सादगीपूर्ण सम्मान समारोह सह विमोचन कार्यक्रम मे लेखक कें प्रदान कयल जायत।

सच्चिदानंद सच्चूक जन्म 6 सितंबर, 1978 कें हटाढ़ रुपौली, जिला मधुबनी मे भेलनि। ‘अल्लाह हो राम’ आ ‘लालटेनगंज’ हुनकर विशिष्ट आ चर्चित उपन्यास अछि। पत्रकारिता सँ सम्बद्ध सच्चू केर पहिचान एक टा जनधर्मी रचनाकारक रूप मे रहल अछि जे मैथिली उपन्यास कें नव ऊँचाइ प्रदान करैत छथि।

सच्चिदानंद सच्चू कें ई सम्मान दोसर बेर भेटतनि। एहि सं पहिने वर्ष 2021 मे ई सम्मान हुनका हुनकर उपन्यास ‘लालटेनगंज’ लेल आ 2022 मे विभा रानी कें ‘कनियाँ एक घुंघरुआवाली’ लेल देल गेल छल। वर्ष 2023 मे निर्णायक-मंडलक सदस्य सभ द्वारा कोनो पांडुलिपि कें योग्य नहि पाओल गेलाक कारण उपन्यास-केन्द्रित संगोष्ठीक आयोजन कयल गेल छल। तहिना वर्ष 2024 आ 2025 मे सेहो ई स्थिति बनल रहल, जाहि स्थिति मे वरिष्ठ उपन्यासकार गंगेश गुंजन, सुभाष चंद्र यादव आ विभूति आनंद कें ‘विशिष्ट उपन्यासकार सम्मान’ सँ सम्मानित करैत मैथिली उपन्यासक स्थिति-परिस्थिति पर हम सभ चर्चा-परिचर्चा करैत रहल छी। नियमानुसार एहि सम्मान सं सम्मानित रचनाकार तीन वर्षक बाद पुनः अपन नव पांडुलिपि पठा सकैत छथि।

‘जाल’ उपन्यासक पांडुलिपिक सर्वसम्मति सं चयन करैत चयन-समितिक सदस्य लोकनि अपन संक्षिप्त टिप्पणी एहि प्रकारें देलनि—

कमलानन्द झा : उपन्यास 'जाल' शीर्षक मे जतबे छोट, अपन औपन्यासिक संरचना आ ठाठ मे ओतबे व्यापक आ विस्तृत उपन्यास अछि। 'जाल' शीर्षक अभिधा मे अपन नामक सार्थकता तं सिद्ध करितै अछि व्यंजना मे सेहो विशेष अर्थ ध्वनित करैत अछि। कथाक केंद्र मे मलाह जाति आ ओकर समाज अछि; जकर जीवनधूरी जाल होइछ। दोसर दिस नेता बिदेसर मिसर सौंसे गाम पर अपन राजनीतिक जाल पसारने अछि। एहि अन्हरजालक आगू मलाह सभक जाल झूस बुझाइछ। एहि जाल सं कियो बचि नहि सकैत अछि, ओकर एकमात्र बेटी सुनीतो नहि। उपन्यास 'जाल'क मूल कथा प्रेम अछि, मुदा एहि प्रेम कथा कें अन्य रोचक आ अर्थवान प्रासंगिक कथा सभक संगे एहि कलात्मकता संग प्रस्तुत कयल गेल अछि जे कथा मे कतहु टूट वा फांक नहि बुझाइत अछि। उपन्यास मे मिथिला समाजक लगभग सभ हिस्सा अपन सीमा आ सामर्थ्य संग उपस्थित अछि, जे उपन्यास कें बहुलतावादी पाठ बनबैत अछि। उपन्यासक अधिकांश चरित्र अपन निजी वैशिष्ट्य सं युक्त अछि। ...मिथिला संग भारतीय राजनीति केर विद्रूपता, समाज मे कोढ़ जकां पसरैत धर्मांधता, अमानवीय वर्णश्रेष्ठता आ अपहृत स्त्री अस्मिता आदि समकालीन समस्या आ मुद्दा सभ निपट नांगट रूप मे आबि उपन्यास कें सम्पूर्णता प्रदान करैत अछि।

केदार कानन : जाल मैथिलीक एक महत्त्वपूर्ण आ विचारोत्तेजक उपन्यास थिक जे मैथिली उपन्यासक नव क्षितिजक उद्‌घाटन करैत अछि। प्रेम केन्द्रित उपन्यास रहितो आजुक जीवन मे पैसल कुटिल राजनीति आ छल-छद्मक बहुत धारदार आ मेंही चित्रण एहि उपन्यास मे भेल अछि। कथा-पात्रक चयन आ प्रस्तुति, संवादक चुस्ती आ भाषाक मनोहर छवि-छटा, नव कथानक पर गतानल औपन्यासिक वितान एहि कृति कें महत्त्व प्रदान करैत अछि। निस्संदेह आजुक मैथिली उपन्यास मध्य ई विशेष रेखांकित करबा योग्य कृति थिक। उपन्यासकार कें बधाइ आ शुभकामना।

राम नरेश यादव : ‘जाल’ उपन्यासक जड़ि मे महेसर आ सुनीताक प्रेम कथा अछि। मुदा ई उपन्यास मिथिलाक सामाजिक आ राजनीतिक पटल धरि नीक विस्तार पौने अछि। ई उपन्यास एक्कैसम शताब्दीक दोसर दशकक मिथिला समाजक सोच-विचार, उलझन, आ षडयंत्रक दस्तावेजक रूपें दर्जा प्राप्त करबा मे सफल रहल अछि। समाज मे जातिक रोग आ भ्रष्ट आचरणक घून लागल छै। तैयो समाज निते बदलि रहल छै। मिथिला समाज मे बढ़ैत जा रहल अन्तरधार्मिक आ अन्तरजातीय विवाहक यथार्थ उपन्यास मे वर्णित उदाहरण सँ मेल खाइत अछि। नेता सभक किरदानी आ ठिकेदार सभक बेइमानी सँ आमजन त्राहिमाम क’ रहलाह अछि। जाति आ धर्मक तानी-भरनी सँ बुनल ‘जाल’ मे लोक ओझरायल अछि। ‘जाल’ तं कटबे करत, मुदा से कहिया? उपन्यासकार ई प्रश्न पाठकक सोझाँ ठाढ़ करैत छथि।

सर्व सम्मति सं भेल निर्णयक आधार पर सच्चिदानंद सच्चू कें नव उपन्यास 'जाल' लेल सम्मानित करबाक घोषणा करैत लेखक संपादक गौरीनाथ प्रसन्नता संग कहलनि, "सच्चू जी वास्तव मे मैथिली उपन्यासक नइं मात्र नव जमीन कोड़ि-तामि रहल छथि, मैथिली उपन्यास कें भारतीय भाषाक उपन्यासक समक्ष ठाढ़ करबा योग्य सेहो बना रहल छथि। एक संग तीन टा महत्त्वपूर्ण उपन्यासक एहन रचनाकार मैथिली मे ताकब, हमरा जनैत, कठिन हैत। एहि उपलब्धि लेल सेहो हम सच्चू जी कें बधाई देब जरूरी बुझैत छी।"

अंत मे धन्यवाद ज्ञापन करैत कथाकार-आलोचक आ महालक्ष्मी-हरिदासक सुपुत्र श्रीधरम कहलनि जे एहि वर्षक ई कार्यक्रम 28 सितंबर, 2026 कें नई दिल्ली मे सम्पन्न हैत। ओहि अवसर पर ‘जाल’ उपन्यासक लोकार्पण आ एहि पर चर्चाक आयोजन सेहो कयल जायत। निर्णायक लोकनिक काज श्रमसाध्य छल आ ओ लोकनि ई कठिन काज जाहि तत्परता संग कयलनि, ओहि लेल धन्यवाद छोट शब्द थिक।

(कथाकार उपन्यासकार शुभेंदु शेखर द्वारा आयोजन समिति आ अंतिका दिस सं जारी)

20/05/2026

#लक्ष्मी_हरि_स्मृति_उपन्यास_सह_कथेतर_गद्य_सम्मान_2026_लेल

#पांडुलिपि_सादर_आमंत्रित

लक्ष्मी-हरि स्मृति उपन्यास सह कथेतर गद्य सम्मान 2026 लेल अंतिका प्रकाशन दिस सँ मैथिली मे मौलिक-अप्रकाशित उपन्यास आ कथेतर गद्य पुस्तक केर पांडुलिपि सादर आमंत्रित अछि। एहि सम्मानक शुरुआतक पाछाँ उद्येश्य मूलतः मैथिली मे उपन्यास-लेखन केँ प्रोत्साहित करबाक दिशा मे एक टा विनम्र प्रयास थिक जाहि मे आब कथेतर गद्य विधा केँ सेहो जोड़ल जा रहल अछि। एहि सँ पहिने ई सम्मान 2021 मे सच्चिदानंद सच्चू केँ 'लालटेनगंज' उपन्यास लेल, 2022 मे विभा रानी केँ 'कनियाँ एक घुँघरुआवाली' उपन्यास लेल देल गेलनि। गत वर्ष 2023 मे कोनो पांडुलिपि केँ योग्य नइं पाओल गेला पर तीन सत्र मे उपन्यास केंद्रित एक टा सेमीनार केर आयोजन कयल गेल छल आ 2024 मे एहन स्थिति मे दू गोट वरिष्ठ उपन्यासकार, गंगेश गुंजन आ सुभाष चंद्र यादव केँ एवं 2025 मे विभूति आनंद केँ सम्मानित करबाक सर्वसम्मति सँ निर्णय भेल छल।

आगामी आयोजन लेल रचनाकार लोकनि सँ विनम्र आग्रह जे ुलाई_2026 धरि अपन पांडुलिपि अंतिकाक ई-मेल पर पठाबी।

सम्मान सँ सम्बन्धित नियम आ शर्त :

1. उपन्यास अथवा कथेतर गद्य पुस्तकक पांडुलिपि मूलतः मैथिली मे हो आ स्तरीय हो। पांडुलिपि कम सँ कम चालीस हजार शब्दक हो।

2. पांडुलिपि वर्ड फाइल आकि पेजमेकर मे टंकित हैब जरूरी अछि। टंकित पांडुलिपि [email protected] पर ईमेल करी। हस्तलिखित पांडुलिपि स्वीकार्य नहि होयत।

3. सम्मानक घोषणा 9 अगस्त केँ (महालक्ष्मी जीक पुण्यतिथि पर) कयल जायत आ सम्मान अर्पण सह पुस्तक विमोचन कार्यक्रम 28 सितंबर केँ (हरिदास जीक पुण्यतिथि पर) सम्पन्न हैत।

4. पांडुलिपि प्रकाशित करबाक अधिकार ‘अंतिका प्रकाशन’क पक्ष मे रहत आ प्रकाशित पुस्तकक लेखकीय छओ गोट प्रतिक संग 21,000 टाका, 28 सितंबरक सादगीपूर्ण सम्मान समारोह सह विमोचन कार्यक्रम मे लेखक केँ स्मृति चिह्न, मानपत्र आ अंग वस्त्र संग देल जयतनि।

5. कार्यक्रम (सम्मान-समारोह सह विमोचन) सामान्यतः चनौरा गंज (झंझारपुर, मधुबनी) अथवा नई दिल्ली मे होयत। विशेष स्थिति मे आयोजक स्थान परिवर्तन क' सकैत अछि।

6. कार्यक्रम मे अबै-जाइक मार्गव्यय आ अन्य व्यवस्था आयोजक करत।

7. सम्मानक अंतिम निर्णय तीन सदस्यीय चयन-समितिक हैत। ओहि पर कोनो विवाद मान्य नइँ।

8. सम्मानित कृतिक अतिरिक्त जँ बाकी पांडुलिपि प्रकाशन योग्य हैत तँ ओकरो प्रकाशनक पहिल अधिकार अंतिकाक हैत।

9. विशेष स्थिति मे जँ एक संग दू गोट कृतिकारक रचना एक पर एक होइ आ एक टा केँ खारिज करब कठिन, तँ ओहि स्थिति मे दुनू केँ संयुक्त रूप सँ पुरस्कृत कयल जायत। तहिना यदि कोनो वर्ष कोनो कृति सम्मान योग्य नइँ प्राप्त हैत तँ ओहि वर्ष ई सम्मान आब "विशिष्ट रचनाकार सम्मान" रूप मे मैथिलीक एक टा विशिष्ट रचनाकार केँ देल जयतनि।

10. विगत वर्ष मे सम्मानित भ' चुकल उपन्यासकार सेहो आब एहि वर्ष अपन नव पांडुलिपि पठा सकै छथि।

11. ई सम्मान प्रति वर्ष एही तिथि-क्रम मे सम्पन्न करबाक प्रयास रहत।

12. एहि सम्मानक प्रायोजक छथि डॉ. प्रोमिला आ डॉ. श्रीधरम।

पांडुलिपि सभक प्रतीक्षा अछि।

आयोजक
अंतिका प्रकाशन प्रा लि
सी-56/यूजीएफ-4, शालीमार गार्डन एक्सटेंशन-2,
गाजियाबाद-201005

ईमेल : [email protected]
दूरभाष : +91-9874856053

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15/01/2026


Day6
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विश्व पुस्तक मेला में यह अंक अंतिका प्रकाशन के स्टॉल (हॉल नं 2-3, स्टॉल नं. N -06) पर उपलब्ध है।
13/01/2026

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12/01/2026

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प्रेस विज्ञप्ति लक्ष्मी हरि स्मृति विशिष्ट उपन्यासकार सम्मान विभूति आनंद को अर्पित नई दिल्ली, 28 सितम्बर 2025। आत्माराम ...
30/09/2025

प्रेस विज्ञप्ति

लक्ष्मी हरि स्मृति विशिष्ट उपन्यासकार सम्मान विभूति आनंद को अर्पित

नई दिल्ली, 28 सितम्बर 2025। आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज, धौलाकुआं, नई दिल्ली के सभागार में 'लक्ष्मी-हरि स्मृति विशिष्ट उपन्यासकार सम्मान' अर्पण समारोह का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। वर्ष 2025 का यह सम्मान मैथिली के वरिष्ठ साहित्यकार विभूति आनंद को प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन ने अंतिका परिवार के साथ अपने लंबे जुड़ाव की चर्चा करते हुए इस सम्मान को एक जरूरी और महत्वपूर्ण वार्षिक आयोजन बताया। वरिष्ठ कवि केदार कानन और जेएनयू के प्रोफेसर देवशंकर नवीन ने सम्मानित रचनाकार की रचना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके विशाल लेखन की चर्चा की जिसमें यह भी बताया गया कि उनका लेखन मात्रा में जीवकांत से भी ज्यादा है। कथाकार शुभेंदु शेखर ने विभूति आनंद के उपन्यासों की विस्तृत चर्चा की तो खुद विभूति आनंद ने अपने लिए लिखते रहने को बहुत जरूरी बताया।

बीएचयू के प्रोफेसर रामाज्ञा शशिधर ने हरिदास की आत्मकथा 'जनम जुआ मति हारहु' पर अपनी बातें रखते हुए कहा कि हरिदास की आत्मकथा मिथिला के किसान समाज मात्र की पीड़ा-कथा नहीं कहती, मिथिला राज के दमन और उत्पीड़न के सच को भी साहस पूर्वक उजागर करती है।

द्वितीय सत्र में मैथिली के वरिष्ठ कवि-कथाकार व आलोचक तारानंद वियोगी ने मैथिली उपन्यास के अतीत और वर्तमान की चर्चा करते हुए बताया कि मैथिली में गिनती में भले हजार उपन्यास हो जाएं, गौरतलब उपन्यासों की संख्या दस-पंद्रह से अधिक नहीं है। वहीं वरिष्ठ आलोचक प्रोफेसर कमलानंद झा ने मैथिली आलोचना की दृष्टिहीनता, विचित्रता और पूर्णकालिक आलोचक के अभाव को रेखांकित किया।

अंतिका प्रकाशन के संपादक तथा कार्यक्रम के संयोजक कथाकार गौरीनाथ ने स्वागत के क्रम में उपन्यास विधा के लोकतांत्रिक गुणों और उसके उद्देश्यों की चर्चा की और बताया कि विचारार्थ आने वाली पांडुलिपि में भी यह गुण खोजने की कोशिश रहती है। फिर घोषणा की कि अगले वर्ष से इस सम्मान के अंतर्गत उपन्यास के साथ-साथ कथेतर गद्य की पांडुलिपि पर भी समान रूप से विचार किया जाएगा। पिछले वर्षों में जिनको इस सम्मान से नवाजा गया है, अब वे भी पुनः अपनी पांडुलिपि विचारार्थ भेज सकते हैं। साथ ही सम्मान योग्य कोई भी पांडुलिपि नहीं मिलने की स्थिति में दिए जाने वाले "विशिष्ट उपन्यासकार सम्मान" में मामूली परिवर्तन करते हुए भविष्य में इसकी जगह "विशिष्ट रचनाकार सम्मान" दिया जाएगा।

हरिदास के पुत्र और मैथिली हिन्दी के कहानीकार-आलोचक श्रीधरम ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालने के क्रम में मैथिली उपन्यास के काल विभाजन और उसके विकास को दर्शाने की कोशिश की।

प्रथम सत्र के अंत में विभूति आनंद पर लिखी गई समीक्षात्मक और संस्मरणात्मक पुस्तक 'कथा एखन शेष...' भाग 1एवं 2 का विमोचन उपस्थित विद्वानों के हाथों किया गया।

प्रथम तथा द्वितीय सत्र का संचालन क्रमश: कथाकार शुभेंदु शेखर तथा श्रीधरम ने किया। मैथिली के साहित्यिक कार्यक्रम में दिल्ली के साहित्यकारों, खासकर मैथिली साहित्यकारों की उपस्थिति सराहनीय रही जिनमें सारंग कुमार, मोहन यादव, आभा झा, अकबर रिजवी, प्रकाश झा, वैद्यनाथ मिश्र, निवेदिता झा, संस्कृति मिश्र, कविता पाठक, प्रोमिला सहित अनेक साहित्यनुरागी शामिल थे।

लक्ष्मी-हरि स्मृति विशिष्ट उपन्यासकार सम्मान अर्पण समारोह 2025 मे अपने सभ कें सादर आमंत्रित करैत प्रसन्नता भ' रहल अछि। ब...
22/09/2025

लक्ष्मी-हरि स्मृति विशिष्ट उपन्यासकार सम्मान अर्पण समारोह 2025 मे अपने सभ कें सादर आमंत्रित करैत प्रसन्नता भ' रहल अछि। बेसी सँ बेसी संख्या मे आबि अहाँ सभ एहि आयोजन कें सफल-सार्थक करब से भरोस अछि।
28 सितम्बर, 2025, अपराह्न 3: 30 बजे, सभागार, आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज, धौलाकुआं, नई दिल्ली

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