07/05/2026
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. वाराणसी दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस घड़ी के आकर्षण से बंधे नजर आए. उन्होंने काशी विश्वनाथ परिसर में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अवलोकन किया. मध्यप्रदेश के महाकाल की नगरी उज्जैन से शुरू हुआ विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का सफर देश के अन्य तीर्थ स्थलों से भी गुजर रहा है. इस वैदिक घड़ी की खासियत है कि यह समय तो बताती ही है, साथ ही सूर्योदय, मुहूर्त, ग्रहों की स्थिति और पंचांग की जानकारी भी देती है.
कितनी अलग है वैदिक घड़ी?
- जहां आम घड़ियां (GMT) रात के 12 बजे से दिन की शुरुआत मानती हैं और 24 घंटों के चक्र पर आधारित होती हैं, वहीं वैदिक घड़ी पूरी तरह अलग है.
यह घड़ी एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय के मध्य समय की गणना करती है.
सूर्योदय से सूर्यास्त- 15 मुहूर्त
सूर्यास्त से अगले सूर्योदय- 15 मुहूर्त
- इसमें पूरे दिन को 24 घंटों के बजाय 30 मुहूर्तों में विभाजित किया गया है.
- यह घड़ी जिस स्थान पर स्थापित है, वहां के सटीक सूर्योदय के समय के अनुसार खुद को सिंक (Sync) करती है.