22/09/2025
बिहार चुनाव 2025: जातीय राजनीति से ऊपर उठकर क्या नया इतिहास लिखेंगे युवा?
बिहार की राजनीति हमेशा से पूरे देश में चर्चा का विषय रही है। जातीय समीकरण, गठबंधन की राजनीति और नेताओं के बयानों के बीच इस बार एक नई ताक़त केंद्र में है—युवा वोटर। लगभग 35-40% मतदाता 35 वर्ष से कम आयु के हैं, और यही वर्ग तय करेगा कि सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा।
1. रोजगार और पलायन: सबसे बड़ी चुनौती
बिहार का युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, पंजाब और यहां तक कि विदेशों तक जाता है।
उम्मीद: ऐसी नीतियाँ और योजनाएँ जो राज्य के भीतर रोज़गार और उद्यमिता के अवसर पैदा करें।
निराशा: अब तक के चुनावों में नौकरी देने के वादे अधूरे रहे हैं।
युवाओं का साफ़ कहना है—"अगर बिहार में काम मिलेगा, तो हम यहीं रहेंगे। सिर्फ़ वादों से अब वोट नहीं मिलेगा।"
2. शिक्षा और कौशल विकास
बिहार ने स्कूलों में नामांकन तो बढ़ाया है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता और रोजगारपरक कौशल की कमी अब भी गंभीर समस्या है।
कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों का स्तर सुधारना होगा।
युवाओं को आईटी, डिजिटल और आधुनिक उद्योगों से जोड़ने वाली स्किल ट्रेनिंग की आवश्यकता है।
3. बुनियादी ढांचा और डिजिटल कनेक्टिविटी
आज का युवा इंटरनेट और टेक्नोलॉजी से सीधा जुड़ा है।
डिजिटल सेवाएँ: ऑनलाइन जॉब पोर्टल, ई-गवर्नेंस, स्टार्टअप सपोर्ट।
बुनियादी सुविधाएँ: बिजली, पानी, सड़क और ग्रामीण इंटरनेट नेटवर्क।
अगर ये सुविधाएँ मज़बूत होंगी तो युवाओं को बाहर पलायन करने की ज़रूरत कम होगी।
4. पारदर्शिता और सुशासन
युवाओं की सोच पुरानी राजनीति से अलग है। वे जाति या वंशवाद से ज़्यादा नतीजों और ईमानदारी को महत्व देते हैं।
भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और फंड की हेराफेरी युवाओं को स्वीकार नहीं।
सोशल मीडिया ने उन्हें और जागरूक बना दिया है—हर वादा तुरंत परखा जाता है।
5. सामाजिक न्याय और समावेशिता
युवा वर्ग जातीय खाई पाटने और सबको साथ लेकर चलने की सोच रखता है।
महिलाएँ, पिछड़े और दलित समाज के लिए अवसर और सम्मान उनकी प्राथमिकता में है।
वे चाहते हैं कि शिक्षा, रोजगार और राजनीति में सबकी समान भागीदारी हो।
6. राजनीति में युवाओं की भागीदारी
आज का युवा
सोशल मीडिया पर बहस करता है,
नेताओं के भाषणों का विश्लेषण करता है,
और अपने वोट को परिवार/समुदाय की परंपराओं से अलग डालने में सक्षम है।
तेजस्वी यादव जैसे युवा चेहरे उन्हें आकर्षित करते हैं, लेकिन भरोसा तभी मिलेगा जब नीतियाँ ठोस और लागू करने योग्य हों।
निष्कर्ष
बिहार चुनाव 2025 सिर्फ़ गठबंधन या जातीय गणित का खेल नहीं है, बल्कि यह युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं की परीक्षा भी है।
रोजगार, शिक्षा, डिजिटल विकास और सुशासन जैसे मुद्दे तय करेंगे कि अगली सरकार कौन बनाएगा।
जो भी दल युवाओं की भाषा बोलेगा और उनकी ज़रूरतों को पूरा करेगा, वही सत्ता की कुर्सी पर मज़बूती से बैठेगा।
युवा मतदाता अब सिर्फ़ भविष्य की उम्मीद नहीं, बल्कि राजनीति की दिशा बदलने वाली निर्णायक ताक़त बन चुके हैं।